RBI MPC Minutes: Interest Rates में अभी बदलाव के आसार नहीं, इकोनॉमिक रिकवरी में लग सकती है उम्मीद से अधिक देरी

MPC के कमेंट्स साफ तौर पर इस ओर इशारा कर रहे हैं कि अगर निवेश की कमी होती है तो देश की इकोनॉमी में जो रिकवरी हो रही है, उसमें उम्मीद से कहीं अधिक समय लग सकता है
अपडेटेड Feb 23, 2021 पर 08:46  |  स्रोत : Moneycontrol.com

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के बैठक की मिनट्स (Minutes) आज रिलीज की गई है। इसके मुताबिक पैनल में यह आम सहमति है कि कोरोना वायरस महामारी से बुरी तरह प्रभावित भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए RBI को अपना एकोमोडेटिव स्टांस (accommodative stance) बरकरार रखना चाहिए। MPC के कमेंट्स साफ तौर पर इस ओर इशारा कर रहे हैं कि अगर निवेश की कमी होती है तो देश की इकोनॉमी में जो रिकवरी हो रही है, उसमें उम्मीद से कहीं अधिक समय लग सकता है।

समिति से सदस्यों ने सुझाव दिया है कि ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए RBI को लंबे समय तक अपना एकोमोडेटिव स्टांस बरकरार रखना होगा। इससे साथ ही समिति ने आशंका व्यक्त की कि बैंकिंग सिस्टम के एसेट की क्वालिटी में दबाव और बढ़ सकता है। समिति के सदस्य माइकल पात्रा (Micheal Patra) ने हिदायत दी कि जैसे ही रेगुलेटरी डिस्पेंसेशन का लाभ खत्म होगा, वैसे ही बैंकों का NPA और बढ़ सकता है। आपको बता दें कि RBI की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि कोरोना के कारण अर्थव्यवस्था की स्थिति बेहद खराब होने की स्थिति में सितंबर तक बैंकों को NPA 15% तक पहुंच सकता है।

MPC की बैठक में सदस्यों ने जो राय रखी है, उसके मुताबिक महंगाई को देखते हुए RBI नीतिगर ब्याज दरों में लंबी अवधि के लिए यथास्थिति बरकरार रख सकता है। MPC की सदस्य Ashima Goyal ने कहा कि ग्रोथ जरूर पॉडिटिव लेवल में आ गया है, लेकिन आउटपुट लेवल 2-19 से लेबल से अभी भी नीचे है। वहीं शशांक भीडे (Shashanka Bhide) ने कहा कि इंवेस्टमेंट डिमांड में बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था की रिकवरी के अहम पहलू है।

उन्होंने कहा कि FY21 में ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेंशन (GFCF) में 14.5% की गिरावट आई है। वहीं, समिति के एक और सदस्य Mridul K Saggar ने कहा कि ग्रोथ अभी भी कमजोर है और सपोर्ट को FY2021-22 की पहली तिमाही या इससे अधिक अवधि के लिए बढ़ाने की जरूरत है। MPC की अगला बैठक अब 5 से 7 अप्रैल के बीच होगी।

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