RBI ने जारी किया माइक्रोफाइनेंस रेगुलेशन पर कंसल्टिव डॉक्यूमेंट, प्री-पेमेंट पेनल्टी शामिल नहीं

माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट से जुड़ी फर्मों के लिए एक समान रेगुलेशन बनाने के उद्देश्य से कंसल्टिव डॉक्यूमेंट प्रस्तुत किया गया है
अपडेटेड Jun 15, 2021 पर 09:35  |  स्रोत : Moneycontrol.com

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट से जुड़ी फर्मों के लिए एक समान रेगुलेशन पर सोमवार को एक कंसल्टिव डॉक्यूमेंट जारी किया। इस डॉक्यूमेंट का उद्देश्य माइक्रोफाइनेंस से जुड़े विभिन्न रेगुलेटेड लेंडर्स के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को बेहतर बनाना है।


इसके प्रमुख बिंदुओं में सभी रेगुलेटेड एंटिटीज के लिए माइक्रोफाइनेंस लोन की एक सामान्य परिभाषा, एक परिवार की आमदनी के प्रतिशत के अनुसार लोन चुकाने की लिमिट तय करना, परिवार की आमदनी के आकलन के लिए एक पॉलिसी बनाना और निर्धारित अवधि से पहले लोन चुकाने पर कोई प्री-पेमेंट पेनल्टी नहीं वसूलना शामिल हैं।


इसके अलावा डॉक्यूमेंट में नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) के लिए गाइडलाइंस के अनुसार NBFC-MFI के लिए प्राइसिंग गाइडलाइंस बनाना, बेहतर पारदर्शिता के लिए माइक्रोफाइनेंस लोन की प्राइसिंग पर एक आसान फैक्ट शीट तैयार करना और रेगुलेटेड एंटिटीज की वेबसाइट्स पर माइक्रोफाइनेंस लोन के लिए न्यूनतम और अधिकतम औसत ब्याज दरों को दिखाने से जुड़े प्रस्ताव हैं।


RBI ने कंसल्टिव डॉक्यूमेंट पर 31 जुलाई तक टिप्पणियां मांगी हैं।


इस वर्ष की शुरुआत में डिवेलपमेंटल एंड रेगुलेटरी पॉलिसीज पर एक बयान में RBI ने बताया था कि माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट में विभिन्न रेगुलेटेड एंटिटीज के लिए एक समान रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने के उद्देश्य से एक कंसल्टिव डॉक्यूमेंट जारी किया जाएगा।


इस डॉक्यूमेंट पर स्टेकहोल्डर्स की ओर से फीडबैक मिलने के बाद माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट के लिए रेगुलेशंस में बदलाव किया जा सकता है।


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