नमक की सप्लाई कम होगी? लॉकडाउन की वजह से प्रोडक्शन घटा

नमक उत्पादन का पीक सीजन मार्च-अप्रैल होता है लेकिन लॉकडाउन में मजदूरों की कमी से प्रोडक्शन घटा
अपडेटेड May 08, 2020 पर 07:59  |  स्रोत : Moneycontrol.com

लॉकडाउन की वजह से जल्दी ही आपके खाने का स्वाद भी फीका पड़ सकता है। बहुत हद तक मुमकिन है कि अगर लॉकडाउन इसी तरह चलता रहा तो अगले महीने से आपको नमक की कमी हो सकती है। कोरोनावायरस (Coronavirus) संक्रमण रोकने के लिए 25 मार्च से ही देशभर में लॉकडाउन है।


इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के तटीय इलाकों में नमक बनाने वाले लोगों का कहना है कि उनका प्रोडक्शन कम हो गया है। लॉकडाउन के बाद ज्यादातर मजदूर अपने घर लौटने लगे। पिछले कुछ दिनों से सरकार ने इन मजदूरों के लिए खास तौर पर श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई है ताकि देश में अलग-अलग जगहों पर फंसे मजदूर अपने घर जा सकें। ऐसे में मजदूरों की कमी के कारण नमक का प्रोडक्शन लगभग बंद हो गया है। जल्द ही इसका असर सप्लाई पर भी नजर आ सकता है।


बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी होगी कि सॉल्ट मैन्युफैक्चरिंग का सीजन अक्टूबर से लेकर जून मध्य तक रहता है। नमक का सबसे ज्यादा प्रोडक्शन मार्च और अप्रैल में होता है। देश के कुल नमक उत्पादन का करीब 95 फीसदी गुजरात, राजस्थान, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु में होता है। बाकी प्रोडक्शन महाराष्ट्र, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में  होता है। हर साल देश में करीब 200 से 250 किलो सॉल्ट प्रोडक्शन होता है।


ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन सॉल्ट मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (ISMA) के प्रेसिडेंट भरत रावल ने कहा, "हमारा आधा मार्च और पूरा अप्रैल निकल गया। ये 40 दिन हमारे प्रोडक्शन का पीक सीजन होता है। सॉल्ट प्रोडक्शन में गर्मी के एक महीने के नुकसान दूसरी इंडस्ट्री के 4 महीने के नुकसान के बराबर होता है।"


कितनी है खपत?


देश में हर साल करीब 95 लाख टन एडिबल सॉल्ट की खपत होती है। इसके अलावा 110-130 लाख नकम का इस्तेमाल इंडस्ट्री में किया जाता है। जबकि 58-60 लाख टन नमक उन देशों को निर्यात किया जाता है जो नमक के लिए पूरी तरह भारत पर निर्भर हैं। नमक का इस्तेमाल करने वाली इंडस्ट्रीज में पावर प्लांट, ऑयल रिफाइनरीज, सोलर पावर कंपनी, केमिकल मैन्युफैक्चरर्स , टेक्सटाइल मेकर्स, मेटल, फार्मा, रबर और लेदर मैन्युफैक्चरर्स हैं।


रावल ने कहा, "हमें अभी यह पता नहीं है कि हमने जो एक महीने का वक्त खो दिया है उसकी भरपाई कर पाएंगे या नहीं। अब हमारे पास सिर्फ 45 दिन है। सॉल्ट प्रोडक्शन का साइकिल 60 से 80 दिनों का होता है।" उन्होंने कहा, "अगले कुछ दिनों में अगर हम प्रोडक्शन नहीं बढ़ा पाए तो मुश्किल होगी क्योंकि हमारा ऑफ-सीजन (मॉनसून) बफर स्टॉक इतना ज्यादा नहीं है। साथ ही लॉकडाउन खत्म होते ही इंडस्ट्रीज में भी नमक की डिमांड बढे़गी।" उन्होंने कहा कि इस साल अगर बारिश देर से हुई तभी हमारा प्रोडक्शन ठीक लेवल पर आ सकता है।


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