भीमा कोरेगांव मामले में गौतम नवलखा को नहीं मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत, जमानत याचिका खारिज

गौतम नवलखा ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी
अपडेटेड May 12, 2021 पर 15:52  |  स्रोत : Moneycontrol.com

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने एल्गार परिषद का माओवादियों से संबंध मामले में नवलखा की जमानत अर्जी खारिज कर दी। गौतम नवलखा ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ नवलखा कि याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने इस मामले में 26 मार्च को फैसला सुरक्षित रखा था।
इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने 8 फरवरी को नवलखा की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा था कि कोर्ट को विशेष अदालत के आदेश में दखल देने का कोई कारण नजर नहीं आता। इससे पहले NIA की विशेष अदालत ने भी नवलखा की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।

गोतम नवलका उन 15 लोगों में शामिल हैं जिन्हें भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस मामले में नवलखा ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दाखिल करते हुए कहा था NIA 90 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल करने में नाकाम रही है, इसलिए उन्हें जमानत दी जाए।

क्या है मामला

31 दिसंबर 2017 को पुणे में एल्गार परिषद की बैठक में गैतम नवलखा सहित अन्य लोगों ने कथित तौर पर उत्तेजक और भड़काऊ भाषण दिया था, जिसके बाद भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़की थी। पुलिस ने यह आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम को कुछ माओवादी संगठनों का भी समर्थन प्राप्त था। NIA इस मामले की जांच कर रही है।

नवलखा के खिलाफ जनवरी, 2020 में दोबारा FIR दर्ज की गई थी और पिछले साल 14 अप्रैल को ही उन्होंने NIA के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। वह 25 अप्रैल तक 11 दिन के लिए NIA की हिरासत में रहे और उसके बाद से ही नवी मुंबई के तलोजा जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।

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