Tata-Mistry Case: Ratan Tata ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत, जानिए क्या बोले रतन टाटा

टाटा संस-साइरस मिस्त्री विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने टाटा ग्रुप के पक्ष में फैसला सुनाया और कोर्ट ने NCLAT के फैसले को पलट दिया जिसमें मिस्त्री को दोबारा टाटा ग्रुप का चेयरमैन बनाने का आदेश दिया गया था
अपडेटेड Mar 27, 2021 पर 10:24  |  स्रोत : Moneycontrol.com

टाटा संस और साइरस मिस्त्री विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने टाटा ग्रुप के पक्ष में फैसला सुनाया और कोर्ट ने NCLAT के उस फैसले को पलट दिया है जिसमें साइरस मिस्त्री को दोबारा टाटा ग्रुप का चेयरमैन बहाल करने का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा (Ratan Tata) ने खुशी जाहिर की और कोर्ट के फैसले का स्वागत किया।

रतन टाटा ने ट्वीट किया, सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मैं सराहना करता हूं और कोर्ट का आभारी भी हूं। यह मामला हार और जीत का नहीं है। मेरी ईमानदारी और टाटा ग्रुप के नैतिक आचरण पर हमले किए गए। ग्रुप की अखंडता और नैतिकता पर प्रहार किए गए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने एकबार फिर से टाटा ग्रुप की अखंडता और नैतिकता पर मुहर लगा दी है। न्याय की जीत हुई है और इस फैसले ने न्यायपालिका की निष्पक्षता को और मजबूत किया है।

नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्राइब्यूनल (NCLAT) ने 17 दिसंबर 2019 को यह फैसला सुनाया था कि टाटा संस के चेयरमैन पद पर मिस्त्री की दोबारा बहाली होगी। सुप्रीम कोर्ट ने आज यह फैसला पलट दिया। हालांकि NCLAT ने 10 जनवरी 2020 को जो फैसला लिया था सुप्रीम कोर्ट ने उसे बरकरार रखा।

चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन की बेंच ने यह फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 17 दिसंबर 2020 को अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

क्या था NCLAT का पुराना फैसला

NCLAT ने अपने ऑर्डर में 24 अक्टूबर 2016 के फैसले को अवैध बताया जिसमें मिस्त्री को डायरेक्टर और चेयरमैन पद से हटाया गया था। ट्राइब्यूनल का कहना है कि यह फैसला गलत ढंग से लिया गया है लिहाजा अब मिस्त्री को बहाल कर दिया गया है। ट्राइब्यूनल ने यह भी कहा कि टाटा संस के नए चेयरमैन के तौर पर एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति इलीगल है।

इस फैसले को लागू करने में 4 हफ्ते का वक्त दिया गया ताकि टाटा ग्रुप अपील कर सके। फैसले के दूसरे हिस्से में कोर्ट ने कहा है कि तीन कंपनियों में मिस्त्री को तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा है। यह फैसला सिर्फ उन्हीं तीन कंपनियों पर लागू होगा जिससे मिस्त्री को हटाया गया था।

सेबी के नियम के मुताबिक, किसी भी कंपनी में किसी भी बदलाव की जानकारी शेयर बाजार को देनी होगी क्योंकि उन फैसलों का असर शेयरों पर होता है। हालांकि टाटा ग्रुप ने अभी तक शेयर बाजार को मिस्त्री की बहाली की जानकारी आधिकारिक तौर पर नहीं दी है।

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