Toolkit Case: दिशा रवि की जमानत पर मंगलवार को आएगा फैसला, कोर्ट में पुलिस ने कहा- रची जा रही थी खतरनाक साजिश

कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने कहा कि ये सिर्फ एक टूलकिट नहीं था। असली योजना भारत को बदनाम करने और यहां अशांति पैदा करने की थी
अपडेटेड Feb 21, 2021 पर 10:26  |  स्रोत : Moneycontrol.com

टूलकिट मामले (Toolkit Case) में एक्टिविस्ट दिशा रवि (Disha Ravi) की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने शनिवार को एक अदालत में आरोप लगाया कि वह किसान आंदोलन (Farmers Protest) के जरिए खालिस्तान की वकालत करने वालों के साथ टूलकिट तैयार कर रही थीं और भारत को बदनाम करने और देश में अशांति पैदा करने की वैश्विक साजिश का हिस्सा थी। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने दिशा रवि की जमानत अर्जी पर आदेश मंगलवार तक सुरक्षित रखा लिया है।


अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा के सामने पुलिस ने कहा, "यह सिर्फ एक टूलकिट नहीं था। असली योजना भारत को बदनाम करने और यहां अशांति पैदा करने की थी।" इसमें आरोप लगाया गया कि रवि ने Whatsapp चैट, ईमेल और दूसरे सबूतों को मिटा दिया, क्योंकि उन्हें उनके खिलाफ होने वाली कानूनी कार्रवाइयों की भनक लग गई थी।


"अगर वह कुछ नहीं कर रही थीं, तो उन्होंने सभी सबूतों को क्यों मिटाया?" पुलिस ने आरोप लगाते हुए कहा कि ये सब उसके दो दिमाग में चल रही किसी खतरनाक साजिश को दर्शाता है।


पुलिस ने अदालत को बताया रवि "भारत को बदनाम करने और किसानों के विरोध की आड़ में अशांति पैदा करने के वैश्विक षड्यंत्र के भारतीय अध्याय का हिस्सा थीं।" पुलिस ने आगे कहा कि खालिस्तान की वकालत करने वालों के साथ वह संपर्क में थी और टूलकिट तैयार कर रही थी और शेयर भी कर रही थी। ये दर्शाता है कि इस टूलकिट के पीछे एक खतारनाक साजिश रची जा रही थी।


वहीं दिशा की तरफ से अदालत में पेश हुए वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि दिशा के सिख फॉर जस्टिस या पीजेएफ से संबंध होने के कोई सबूत नहीं हैं। दिशा बिना कारण के विद्रोही नहीं कर रही हैं। इसके पीछे पर्यावरण का एक कारण है, जिसके जरिए कृषि और उनके बीच का संबंध है। उन्होंने आगे कहा कि अगर वो किसी से मिलती हैं, तो उस शख्स के ऊपर ऐसा को प्रतीक तो नहीं है कि वह अलगाववादी है।


वकील ने दिशा का पक्ष रखते हुए कहा, "अगर विश्व स्तर पर किसानों के विरोध प्रदर्शन को उजागर करना राजद्रोह है, तो इससे अच्छा है कि मैं जेल में ही रहूं।" FIR में आरोप है कि योग और चाय को निशाना बनाया जा रहा है। क्या यह अपराध है?


एक ट्रायल कोर्ट ने शुक्रवार को रवि को उनकी पांच दिन की पुलिस हिरासत खत्म होने के बाद तीन दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को रवि की याचिका पर सुनवाई करने से रोकने के लिए पुलिस को उनके खिलाफ दर्ज की गई किसी भी जांच सामग्री को मीडिया में लीक करने से रोकने के लिए सुनवाई की थी।


हाईकोर्ट ने अपने आदेश में मीडिया घरानों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि कोई भी लीक हुई जांच सामग्री प्रसारित न हो, क्योंकि यह जांच को प्रभावित कर सकता है और दिल्ली पुलिस को हलफनामे पर अपने रुख का पालन करने का निर्देश दिया है कि प्रेस में कोई जानकारी लीक नहीं हुई है और न ही कोई जांच विवरण लीक करने का इरादा है।


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