Uri Operation: सेना का 10 दिनों का ऑपरेशन खत्म, 18 साल का लश्कर का घुसपैठिया जिंदा पकड़ा, एक आतंकी ढेर

LoC क्षेत्रों में घुसपैठ को रोकने के लिए सेना का ये अभियान 18-19 सितंबर को शुरू हुआ था
अपडेटेड Sep 28, 2021 पर 18:35  |  स्रोत : Moneycontrol.com

जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) के उरी में चल रहा सेना का ऑपरेशन (Uri Operation) 10 दिनों में मंगलवार को जाकर खत्म हुआ, जिसमें एक 18 साल के पाकिस्तानी घुसपैठिए को जिंदा पकड़ा गया है, जबकि एक आतंकी का मार गिराया गया। उरी और पड़ोसी नियंत्रण रेखा (LoC) क्षेत्रों में घुसपैठ को रोकने के लिए सेना का अभियान 18-19 सितंबर को शुरू हुआ था, जिसके कारण इन इलाकों में मोबाइल, इंटरनेट और टेलीफोन कनेक्टिविटी भी बंद कर दी गई थी।


रविवार को CNN-News18 ने सेना के सूत्रों के हवाले से बताया था कि दो घुसपैठियों के मारे जाने की संभावना है, लेकिन शव अभी तक बरामद नहीं हुए हैं। इस घटना में चार जवान घायल हो गए थे।


सेना ने ऑपरेशन की जानकारी देते हुए एक बयान में कहा, "अंधेरी रात, असमान जमीन, खराब मौसम और घने अंडरग्राउंड का फायदा उठाकर पाकिस्तान ने आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा को पनाह दी और पाकिस्तानी चौकी जाबरी के सामान्य इलाके से छह आतंकवादियों को घुसपैठ कराने की कोशिश की। घुसपैठ के दौरान, जब दो आतंकवादी नियंत्रण रेखा पार कर रहे थे, उसी समय गश्ती दल ने उन्हें देख लिया।"


इसमें आगे कहा गया, "घने अंडरग्राउंड का फायदा उठाते हुए, चार आतंकवादी नियंत्रण रेखा के POK की ओर वापस भाग गए, जबकि बाकी दो आतंकवादी भारतीय इलाके में घुसने में सफल रहे।"


इस ऑपरेशन में मारे गए आतंकी की पहचान अतीक उर रहमान उर्फ ​​​​कारी अनस (33) के रूप में की, जो पंजाब (पाकिस्तान) के जिला अटॉक का रहने वाला था।


सेना ने कहा, "आतंकियों का घुसपैठ करने वाला रास्ता सवाई नाला टेररिस्ट कैंप से हल्लन शुमाली लॉन्च पैड से जाबरी तक जाता था, जो सलामाबाद नाला की ओर जाता था। यहां ये बताना सही होगा कि, ये सलामाबाद नाला के साथ वाला वही रास्ता है, जिसके जरिए 2016 में आतंकवादियों ने पाकिस्तानी सेना की मदद से घुसपैठ की और उरी गैरीसन पर आत्मघाती हमला किया।"


पकड़े गए 18 साल के आतंकवादी के बारे में बात करते हुए, सेना ने कहा, "आत्मसमर्पण करने वाला आतंकवादी जिला ओकारा के दीपालपुर का रहने वाला है। कम उम्र में ही अपने पिता को खो देने के कारण, गरीबी के कारण उसे गुमराह किया गया और लश्कर-ए-तैयबा में शामिल होने का लालच दिया गया। दीपालपुर में उसके परिवार में उसकी विधवा मां और एक दत्तक बहन हैं। परिवार निम्न वर्ग से ताल्लुक रखता है जो बमुश्किल दो वक्त की रोटी कमा पाता है।"


उन्होंने बताया, "गरीबी से बचने के लिए इसने सातवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी। उसने 2019 में गढ़ी हबीबुल्लाह कैंप (KPK) में तीन हफ्ते की शुरुआती ट्रेनिंग के बाद 2021 में दोबारा ट्रेनिंग ली। शारीरिक और हथियारों की ट्रेनिंग के लिए नियुक्त किए जाने वाले ज्यादातर ट्रेनर पाकिस्तानी सेना के जवान थे।"


आगे बताया गया, "आत्मसमर्पण करने वाले आतंकवादी के अनुसार, अतीक उर रहमान उर्फ ​​कारी अनस निवासी गांव-पिंडी, जिला-अटॉक, पंजाब (पाकिस्तान) ने उसे उसकी मां के इलाज के लिए 20,000/- रुपए दिए थे और उसे अतिरिक्त 30,000/- रुपए देने का वादा किया था। साथ ही बारामूला के पास पट्टन से सुरक्षित वापसी का भी वादा किया था, जहां इस ग्रुप को युद्ध का सामान पहुंचाना था। हालांकि, ये साफ है कि इसमें और भी नापाक मंसूबे थे, जिनसे आत्मसमर्पण करने वाला आतंकवादी भी अनजान है।"


ये साफ रूप से कश्मीर घाटी में हुई घुसपैठ की कुछ कोशिशों में से एक है। कथित तौर पर हाल ही में राजौरी के पीर पंजाल इलाके में भी कुछ प्रयास किए गए थे, जहां सेना और आतंकवादियों के बीच गोलीबारी भी हुई थी।


सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।