भारत-चीन सीमा विवाद की मध्यस्थता के लिए मैं तैयार: ट्रंप

ट्रंप ने पहले कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच भी मध्यस्थता की पेशकश की थी लेकिन भारत तैयार नहीं हुआ था
अपडेटेड May 28, 2020 पर 08:46  |  स्रोत : Moneycontrol.com

भारत और चीन की सीमा पर पिछले 20 दिनों से तनातनी का माहौल है। चीन के प्रेसिडेंट शी ज़िनपिंग ने सीमा पर सेना को युद्ध के लिए तैयार रहने को कहा है। दोनों देशों के बीच हालात खराब हो रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बुधवार को अचानक भारत और चीन के बीच सीमा विवाद में मध्यस्थता करने की पेशकश की। ट्रंप ने कहा, वे दोनों पड़ोसी देशों की सेनाओं के बीच जारी गतिरोध के दौरान तनाव कम करने के लिए "तैयार, इच्छुक और सक्षम" हैं।


ट्रंप ने पहले कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच भी मध्यस्थता की पेशकश की थी, लेकिन भारत सरकार ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। भारत का कहना है कि द्विपक्षीय संबंधों में तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।


अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार सुबह ट्वीट किया, "हमने भारत और चीन दोनों को सूचित किया है कि अमेरिका उनके इस समय जोर पकड़ रहे सीमा विवाद में मध्यस्थता करने के लिए तैयार, इच्छुक और सक्षम है। धन्यवाद।"


ट्रंप का यह प्रस्ताव ऐसे दिन आया है जब चीन ने एक तरह से सुलह वाले अंदाज में कहा कि भारत के साथ सीमा पर हालात कुल मिलाकर स्थिर और काबू पाने लायक हैं। बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा कि चीन और भारत के पास संवाद और परामर्श के माध्यम से मुद्दों को सुलझाने के लिए उचित प्रणालियां और संचार माध्यम हैं।


भारत में चीनी राजदूत सुन वीदोंग ने कहा कि चीन और भारत को कभी अपने मतभेदों की छाया समग्र द्विपक्षीय संबंधों पर नहीं पड़ने देनी चाहिए तथा आपसी विश्वास को बढ़ाना चाहिए। सुन ने सैन्य गतिरोध का जिक्र किये बिना कहा कि दोनों पक्षों को संचार के जरिये अपने मतभेदों को सुलझाना चाहिए और इस बुनियादी बात को मानना चाहिए कि वे एक- दूसरे के लिए खतरा नहीं हैं।


उन्होंने कहा, "हमें अपने मतभेदों को सही से देखना चाहिए और उनकी छाया द्विपक्षीय सहयोग के समग्र हालात पर नहीं पड़ने देनी चाहिए। हमें अपने मतभेदों को सुलझाना चाहिए।" ट्रंप का इस समय व्यापार, नोवेल कोरोना वायरस महामारी की उत्पत्ति, हांगकांग पर चीन की नयी सुरक्षा कार्रवाई और विवादास्पद दक्षिण चीन सागर में उसकी सेना के बढ़ने जैसे मुददों पर चीन से टकराव चल रहा है।


इस बीच रोचक बात है कि एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक ने चीन के साथ मौजूदा सीमा विवाद पर भारत का समर्थन किया है। उन्होंने बीजिंग पर यथास्थिति को बदलने की कोशिश में भारत के साथ सीमा पर संघर्ष में शामिल होने का आरोप भी लगाया। दक्षिण एशिया के लिए शीर्ष अमेरिकी राजनयिक एलिस जी वेल्स ने भारत को चीन के आक्रामक रुख का विरोध करने के लिए भी प्रोत्साहित किया था।


उन्होंने रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले 20 मई को यहां अटलांटिक काउंसिल में कहा, "अगर आप दक्षिण चीन सागर की तरफ देखें तो यहां चीन के परिचालन का एक तरीका है और यह सतत उग्रता है तथा यथास्थिति को बदलने, नियमों को बदलने की लगातार कोशिश है।"


चीन ने अगले दिन वेल्स के बयान को बेतुका कहकर खारिज कर दिया था। चीन के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने यह भी कहा कि बीजिंग और नयी दिल्ली में राजनयिक माध्यमों से बातचीत हो रही है और वाशिंगटन का इसमें कोई लेना-देना नहीं है।


करीब 3,500 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) भारत और चीन के बीच वस्तुत: सीमा है। LAC पर लद्दाख और उत्तरी सिक्किम में अनेक क्षेत्रों में भारत और चीन दोनों की सेनाओं ने हाल ही में सैन्य निर्माण किये हैं। इससे दो अलग-अलग गतिरोध की घटनाओं के दो सप्ताह बाद भी दोनों के बीच तनाव बढ़ने तथा दोनों के रुख में सख्ती का स्पष्ट संकेत मिलता है।


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