Vikas Dubey Encounter: विकास दुबे 90 के दशक में कैसे यूपी का बाहुबली बना?

Vikas Dubey encounter live Updates: विकास दुबे अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया है जिसकी जवाब अब कभी नहीं मिल पाएगा
अपडेटेड Jul 10, 2020 पर 21:43  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Vikas Dubey encounter Latest Updates: कानपुर एनकाउंटर के करीब 7 दिनों के बाद 9 जुलाई को मध्य प्रदेश की पुलिस ने विकास दुबे (Vikas Dubey) को उज्जैन के महाकाल मंदिर से पकड़ा। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, विकास दुबे ने खुद सरेंडर किया था। उसने मंदिर के गार्ड को बोला था कि मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला। इसके बाद सिक्योरिटी गार्ड ने पुलिस को इसकी सूचना दी। हालांकि यूपी पुलिस जब विकास दुबे को लेकर कानपुर आ रही थी तभी रास्ते में कार पलट गई और विकास दुबे ने भागने की कोशिश। पुलिस ने अपने बचाव में गोलियां चलाईं और विकास दुबे इस मुठभेड़ में मारा गया। हालांकि विकास दुबे ने अपने पीछे कई सवाल छोड़ दिए हैं जिनका कभी जवाब नहीं मिल पाएगा। पिछले 20 साल से दुबे यूपी में अपराध का सिक्का जमाए हुए था। वह कई बार पकड़ा गया और छूट गया। पढ़िए बाहुबली विकास दुबे का उदय कैसे हुआ था।


90 के दशक में "बाहुबली" का हुआ उदय


1980 के दशक की समाप्ति और 90 के दशक की शुरुआत में दलितों के साथ जातिगत भेदभाव अपने चरम पर था। इस दौरान जब सामाजिक परिवर्तन की शुरूआत हुई तो पिछड़ी जातियां अपने खिलाफ हो रहे अत्याचार के विरोध में आवाज उठाना शुरू दिए। इसके बाद अक्सर उच्च जाति के पुरुषों और निचली जातियों के लोगों में अहंकार को लेकर छोटी-मोटी झड़पें शुरू हो गई। इस दौरान 1990 में वह समय भी देखने को मिला जब 20 साल की उम्र में विकास को पहली बार पुलिस स्टेशन में घसीटा गया था, क्योंकि उसने अपने पिता का अपमान करने के लिए दूसरी जाति के कुछ लोगों को बेरहमी से पीटा था। यह एक ऐसा क्षण था जब पुलिस की कुछ कार्रवाई ने इस उपद्रवी युवक को सबक तो सिखाया, लेकिन स्थानीय दबंग लोगों के हस्तक्षेप के कारण बिना मामला दर्ज किए उसे छोड़ दिया गया।


1992 में की थी पहली हत्या


यूपी पुलिस के 8 पुलिसकर्मियों का हत्यारा विकास दुबे ने वर्ष 1992 में अपने ही गांव के एक दलित युवक की निर्मम हत्या कर अपराध की दुनिया में पहला कदम रखा था। पुलिस ने विकास को गिरफ्तार कर लिया और उसे जेल भेज दिया गया, लेकिन जल्द ही वह जमानत पर सलाखों से बाहर आ गया। दलित युवक की हत्या के बाद उच्च जातियों के एक वर्ग के लिए वह गर्व का प्रतीक बन गया। जैसे-जैसे उसका दबदबा बढ़ता गया, धीरे-धीरे उसको राजनीतिक संरक्षण भी मिलने शुरू हो गए। वह कई युवाओं के लिए एक रोल मॉडल बन गया, और जल्द ही गुर्गे की एक छोटी लेकिन समर्पित सेना तैयार करने में सफल हो गया।


क्या राजनीतिक संरक्षण की वजह से बढ़ता गया हौसला?


आठ पुलिसवालों की हत्या करनेवाला हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे मामले में बड़ी बात सामने आई है। वह करीब तीन दशक से उत्तर प्रदेश में खुलेआम तांडव मचा रहा था। पर राजनीतिक संरक्षण के चलते आजतक उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर पाया था। पुलिस इनके आगे असहाय नजर आती थी। 2017 के एक वीडियो में विकास दुबे ने अपने राजनीतिक संबंधों पर भी खुलकर बात की थी। उसने स्वीकार किया था कि बीजेपी विधायक भगवती सागर ने हत्या के एक केस में उसकी पैरवी की थी।


हालांकि, बीजेपी विधायक सागर ने इस बात से साफ इनकार कर दिया कि उन्होंने विकास दुबे की किसी भी तरह से मदद की। सवाल यह है कि आठ पुलिसकर्मियों का हत्यारा विकास अभी तक यूपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों है? आज नहीं तो कल आखिर वह पुलिस की पकड़ में आ जाएगा। मगर बड़ा सवाल यह है कि क्या राजनेताओं, पुलिस और अदालतों में जिसने भी उसे संरक्षण देने की कोशिश की उसे इसके लिए जिम्मेदार माना जाए या नहीं?


हर नेता का करना चाहता था इस्तेमाल


1992 से अगले कुछ वर्षों तक विकास ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बेहद मजबूत कर ली। विकास की नजर सभी राजनेताओं पर थी, लेकिन विशेषकर बीएसपी और बीजेपी के नेताओं पर ज्यादा थी। क्षेत्र में विपक्षी पार्टियों के नेताओं से प्रतिस्पर्धा करने वाले राजनेताओं ने उससे संपर्क किया और उसके बाद विकास राजनीतिक सुविधा के अनुसार पार्टियों को बदलता चला गया। वह क्षेत्र में वोट हासिल करने के साथ-साथ अपने नेटवर्क के माध्यम से जमीन और व्यापार सौदों के लिए उसका नाम ही काफी था।


दबंग विधायक हरिकिशन ने दिया पहला राजनीतिक संरक्षण


1996 में विकास दुबे चौबेपुर विधानसभा से दबंग विधायक हरिकिशन श्रीवास्तव के संपर्क में आया था। विकास को यह पहला राजनीतिक संरक्षण मिला था। विकास ने विधायक के लिए काम करना शुरू कर दिया। विधायक के जो काम कोई नहीं कर पा रहा था, उसे विकास चुटकियों में कर देता था। किसी का जमीन कब्जा करना, व्यापारियों से रंगदारी वसूलना इस तरह के कामों से विकास विधायक का करीबी बन गया। अपने गुरु हरिकिशन श्रीवास्तव के बीजेपी से बीएसपी में चले जाने के बाद 1996 में विकास भी BSP में शामिल हो गए। विकास शिवली और आसपास के क्षेत्र में हरिकिशन के प्रमुख सहयोगी के रूप में सामने आया।


अपराध की दुनिया में जमाया अपना सिक्का


1999 के बाद से कानपुर और आसपास के इलाकों में विकास दुबे का खौफ तेजी से बढ़ता चला गया। यह वर्ष 2000 था जिसमें डॉन का वास्तविक रूप देखने को मिला। विकास दुबे ने वर्ष 2000 में ताराचंद इंटर कॉलेज की जमीन कब्जा कर मार्केट बनाने के लिए उसके प्रिंसिपल सिद्धेश्वर पांडे की सरेआम हत्या कर दी। इसमें उसे उम्र कैद की सजा हुई, लेकिन जल्द ही वह जमानत पर बाहर आ गया। इसके अगले साल, विकास ने कुछ अकल्पनीय किया।


थाने के अंदर कर दी मंत्री की हत्या


2001 में कानपुर के शिवली थाने के अंदर यूपी के दर्जा प्राप्त तत्कालीन मंत्री संतोष शुक्ला की उस वक्त हत्या कर दी जब थाने में 5 सब इंस्पेक्टर और 25 सिपाही मौजूद थे। वे सब उस हत्या के गवाह थे, लेकिन किसी ने विकास के खिलाफ अदालत में गवाही नहीं दी। इस हत्याकांड के बाद वह मोस्टवांटेड विकास ‘पंडित’ बन गया। क्राइम की दुनिया में लोग उसे विकास पंडित के नाम से पुकारने लगे। वर्तमान केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।


इस हत्याकांड को हरिकिशन श्रीवास्तव और संतोष शुक्ला के बीच पुरानी रंजिश का राजनीतिक नतीजा बताया गया। पिछले चुनाव में बीएसपी के उम्मीदवार के रूप में श्रीवास्तव ने चौबेपुर से बीजेपी उम्मीदवार शुक्ला को हराया था। इस घटना के बाद से विकास का मनोबल बढ़ता गया और उसने आसपास की कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया। कई राजनीतिक पार्टियों में अच्छी पकड़ होने की वजह से विकास दुबे कुछ दिन जेल में बंद रहता और फिर जमानत पर रिहा हो जाता था। वर्तमान में विकास की पत्नी रिचा दुबे जिला पंचायत सदस्य हैं।


30 सालों में अपराध की दुनिया में एकक्षत्र कर रहा है राज


जिस एकमात्र हत्या के मामले में उसे दोषी ठहराया गया था, वह सिद्धेश्वर पांडे का था। लेकिन सजा के आदेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रोक दिया था और विकास जमानत पर बाहर था। सूत्रों का कहना है कि 2017 में यूपी में योगी सरकार आने के बाद विकास भारतीय जनता पार्टी में भी शामिल होने की पूरी कोशिश की लेकिन उसकी दाल नहीं गली। पिछले 30 सालों में विकास दुबे ने अपराध की दुनिया में अपनी बड़ी हनक बना ली। इस वक्त उसके ऊपर 60 क्रिमिनल केस चल रहे हैं।


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