Vikas Dubey Encounter: विकास दुबे जहां से भी गुजरता, कोई सिर नहीं उठा सकता था

Vikas Dubey encounter live Updates: विकास दुबे का अगर कोई नमस्ते के साथ अभिवादन करना नहीं करता था तो उसे बेरहमी से पीटा जाता था
अपडेटेड Jul 11, 2020 पर 12:05  |  स्रोत : Moneycontrol.com

उत्तर प्रदेश का कुख्यात अपराधी एवं कानपुर (Kanpur) के बिकरू गांव (Bikru Village) में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले का मुख्य आरोपी विकास दुबे (Vikas Dubey) शुक्रवार सुबह कानपुर के भौती इलाके में पुलिस मुठभेड़ मे मारा गया। कानपुर के एडीजी जेएन सिंह ने बताया कि पुलिस और एसटीएफ की गाड़ियां विकास को उज्जैन से ला आ रही थी, तभी अचानक एक गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। उसमें बैठे विकास दुबे ने भागने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस मुठभेड़ हुई और वह घायल हो गया।


सिंह ने बताया कि हादसे के बाद दुबे ने एक एसटीएफकर्मी की पिस्तौल छीन ली और भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उसे घेर लिया और दोनों तरफ से हुई गोलीबारी में वह घायल हो गया। उन्होंने बताया कि विकास को तुरंत हैलट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दुर्घटना में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए है, जिनका कानपुर के अस्पताल में इलाज चल रहा है।


ग्रामीणों ने ली राहत की सांस


न्यूज़ चैनलों पर विकास दुबे की मौत की खबर आते ही बिकरू गांव के पड़ोसियों और निवासियों ने जमकर जश्न मनाया। लोगों ने आतंक के एक दौर के खत्म होने पर खुशी जाहिर की। गैंगस्टर अपने गांव के स्थानीय लोगों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने 2 जुलाई को आठ पुलिसकर्मियों की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी थी।


ग्रामीणों ने 2013 में CM से की शिकायत, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई


न्यूज 18 से बात करते हुए विकास दुबे के पड़ोसी ने नाम न बताने के शर्त पर कहा कि हम सभी उसके आतंक के शिकार थे। हमने पहले भी कई बार पुलिस से शिकायत की थी और 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री को भी इसके खिलाफ पत्र लिखा था लेकिन कुछ नहीं किया गया। ग्रामीण ने बताया कि विकास दुबे का सभी राजनेताओं ने समर्थन किया। इतना ही नहीं एक पूर्व विधायक ने दुबे को राखी तक बांधी और दावा किया कि वह उनके भाई हैं।


गैंगस्टर के सामने सिर झुकाकर रहते थे ग्रामीण


शख्स ने बताया कि हमारे पिता और चाचा को बेरहमी से पीटा गया था। जब भी गैंगस्टर और उसके आदमी हमारी गली से गुजरते थे, तो हमें अपना सिर उठाने की इजाजत नहीं थी और नमस्ते के साथ उन सभी का अभिवादन करना अनिवार्य था। यदि कोई ऐसा नहीं करता था तो उसे बेरहमी से पीटा जाता था। हमें दुबे के आतंक के साथ जीने के लिए मजबूर किया गया। आज का दिन हमारे लिए किसी त्यौहार से कम नहीं है, क्योंकि आखिरकार आतंक का शासन खत्म हो गया है, भगवान ने हमारी प्रार्थनाएं सुन ली है। पड़ोसी ने उस पत्र को दिखाया जो उसने पुलिस और मंत्रियों को हिस्ट्रीशीटर के खिलाफ लिखे थे।


सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।