जब Depression में चले गए थे विराट कोहली, तो इस खिलाड़ी ने की थी ठीक होने में उनकी मदद

विराट कोहली (Virat Kohli) ने 2014 के दौरे के दौरान डिप्रेशन से गुजरने के बारे में अपने एक खुलासे से सभी को चौंका दिया
अपडेटेड Feb 21, 2021 पर 09:08  |  स्रोत : Moneycontrol.com

भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) के कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) ने 2014 के दौरे के दौरान डिप्रेशन से गुजरने के बारे में अपने एक खुलासे से सभी को चौंका दिया है, लेकिन 32 साल के खिलाड़ी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य लेकर सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) के साथ हुई बातचीत ने उनकी मानसिकता को खोल दिया। कोहली ने कहा कि तेंदुलकर ने उन्हें नेगेटिव फीलिंग से नहीं लड़ने की सलाह दी, जिसने उनके लिए अच्छा काम किया।


न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, फेमस ब्रॉडकास्टर मार्क निकोलस के साथ एक पॉडकास्ट नॉट जस्ट क्रिकेट में कोहली ने कहा, "मैंने उनसे चीजों के मानसिक पक्ष के बारे में और उनकी बताई गई बातों के बारे में बात की, क्रिकेट में उन्होंने जो अनुभव किया, वो ये था कि अगर आप एक मजबूत नकारात्मक भावना से गुजर रहे हैं और अगर वो आपके सिस्टम में बार-बार आ रही है, तो उसे इग्नोर करें, अगर आप इससे लड़ेंगे, तो ये और मजबूत होती जाती है। इसलिए उनकी ये सलाह मैंने अपनाई और मेरी मानसिकता तब से खुल गई।"


इससे पहले कोहली ने कहा था, “मैंने भी डिप्रेशन महसूस किया था।" कोहली ने 2014 में इंग्लैंड दौरे को याद करते हुए कहा, "जब आप यह जान लेते हैं कि आप कोई रन नहीं बना पाएंगे, तो यह बहुत अच्छा अहसास नहीं होगा और मुझे लगता है कि सभी बल्लेबाजों ने महसूस किया है कि किसी न किसी स्तर पर आप किसी भी चीज के नियंत्रण में नहीं रहते हैं और आपको समझ में नहीं आता कि इससे कैसे बाहर निकला जाए। मुझे लगता है कि जब आप बहुत मुश्किल दौर में पीछे मुड़कर देखते हैं, तो आपको पता चलता है कि आपको उस चरण से पूरी तरह गुजरना था, जिससे ये समझने में मदद होती है कि क्या गलत है और सुधार कर आगे बढ़ना है और बदलाव के लिए खुद को खोलना है। यह एक ऐसा चरण था, जब मैं सचमुच कुछ भी नहीं कर पर रहा था और न ही इसस बाहर निकल सकता था। मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं दुनिया का सबसे अकेला आदमी हूं"


उन्होंने यह भी कहा कि मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से, यह ऐस था, जैसे आप एक बड़े ग्रुप का हिस्सा होते हुए भी अकेला महसूस कर सकते थे। मैं यह नहीं कहूंगा कि मेरे पास ऐसे लोग नहीं थे जिन्हें मैं बोल सकता था, लेकिन कोई ये सब बोलने के लिए कोई एक पेशेवर नहीं था, जो यह समझ सके कि मैं पूरी तरह से क्या कर रहा हूं, मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा कारक है। मुझे लगता है कि मैं इसे बदलते देखना चाहूंगा।


कोहली ने आगे कहा कि कोई ऐसा जिसके पास आप किसी भी समय में जा सकते हैं, उससे कभी भी बातचीक हो और कह सकते हैं कि ये सुनो कि मैं क्या महसूस कर रहा हूं, मुझे नींद आने में भी मुश्किल हो रही है, मुझे लगता है कि मैं सुबह जागना नहीं चाहता। मुझे खुद पर भरोसा नहीं है, मैं क्या करूं?


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