Delhi Gymkhana Club और सरकार के बीच आखिर क्यों छिड़ी है कानूनी जंग?

MCA ने जो पाया, उसमें सबसे ज्यादा परेशान करने वाला ये था कि क्लब मेंबरशिप चार्च के लिए 100,000 रुपये ले रहा था और उसने ब्याज नहीं दिया
अपडेटेड Mar 06, 2021 पर 17:24  |  स्रोत : Moneycontrol.com

दिल्ली का जिमखाना क्लब (Gymkhana Club), जिसे 1913 में स्थापित किया गया, वो भी स्पोर्ट्स यानी खेल को बढ़ावा देने के लिए, लेकिन साल बीत गए और जिमखाना एक अलग ही खेल खेला जाने लगा, अब ये क्लब एक अजीबोगरीब संकट के बीच में है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की तरफ से वित्तीय अनियमितताओं से लेकर सेवाओं के कुप्रबंधन तक, अनियमित सदस्यता के लिए, यहां तक ​​कि खेलकूद के पुरस्कार जीतने में असफल रहने के आरोपों के बाद अदालत ने क्लब को पूरे मैनेजमेंट को निलंबित कर दिया।


जिमखाना क्लब एक स्पोर्ट्स क्लब के रूप में रजिस्टर्ड है, इसलिए MCA ने पूछ लिया कि खेल से जुड़े मेडल कहां हैं? जिसके बाद सामने आया कि क्लब के राजस्व का दो प्रतिशत से भी कम हिस्सा खेल पर खर्च होता था, जबकि 30 प्रतिशत खर्च हाई क्वालिटी की वाइन, बियर और तंबाकू पर जा रहा था। क्लब में शामिल होने वाले सरकारी अधिकारियों ने यूटिलिटी चार्ज के रूप में 1,50,000 रुपये का भुगतान किया, ये दो दशक पहले 5,000 रुपये था। गैर-सरकारी कैंडिडेट्स ने चार्ज के लिए 750,000 रुपये का भुगतान किया, ये भी साल 2000 में 5,000 रुपये था।


MCA ने जो पाया, उसमें सबसे ज्यादा परेशान करने वाला ये था कि क्लब मेंबरशिप चार्च के लिए 100,000 रुपये ले रहा था और उसने ब्याज नहीं दिया। इससे भी बदतर ये कि दो से तीन दशकों के बाद भी सदस्यता की कोई गारंटी नहीं थी। दिल्ली जिमखाना ने कहा कि ये एक प्राइवेट क्लब है और किसी भी सरकारी कानून का पालन नहीं करना चाहिए।


मोहन गुरुस्वामी, वित्त मंत्रालय के पूर्व सलाहकार और एक स्वतंत्र थिंक टैंक के प्रमुख ने कहा कि क्लब के खिलाफ अदालत में सरकार की याचिका को देखें, इसमें कहा गया है कि क्लब का मैनेजमेंट किसी तरह का परिवारवाद चला रहा था। इसलिए ये जनहित के लिए पूरी तरह से पूर्वाग्रहपूर्ण है। क्लब ने कभी भी नियमों का पालन करने की जहमत नहीं उठाई और सदस्यता पर लगातार रोक लगी हुई थी।


आईआईसी, दिल्ली जिमखाना और दिल्ली गोल्फ क्लब जैसे क्लब हमेशा से ही किन्हीं एक दो खास कारणों से चर्चा में रहे हैं। अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के अभियान के बाद, दिल्ली के गोल्फ क्लब को भ्रष्टाचार और वंशवाद का अड्डा कहा था।


लेकिन अब सरकार इन क्लबों में कुछ प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर रही है। NCLAT ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के जून 2020 के आदेश को चुनौती देते हुए केंद्र की याचिका पर सुनवाई की। अपने आदेश में, एनसीएलटी ने दिल्ली जिमखाना की पूरी जनरल केमटी को निलंबित करने से इनकार कर दिया था और केंद्र को इसके बजाय प्रबंध समिति में दो सदस्य नियुक्त करने को कहा था।


संक्षेप में कहा जाए तो सरकार ने रूल बुक के हवाले से काम किया, जिसमें अवैध कुछ भी नहीं था। यह क्लब और उसके प्रबंधन के खिलाफ सरकार का ये गेम, सेट और वॉच प्लान था। इसके बाद नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ने क्लब के बोर्ड को सस्पेंड किया, जिसके बाद मंत्रालय ने दिल्ली जिमखाना क्लब का कामकाज अपने हाथ में ले लिया।


श्रीनिवास, जो वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र के अध्यक्ष हैं, ने न केवल जिमखाना क्लब में बल्कि भारतीय अंतर्राष्ट्रीय केंद्र जैसी संस्थाओं में भी विसंगतियों का मुद्दा उठाया था। क्लब में विसंगतियों को सबसे पहले श्रीनिवास ने ही उजागर किया था। वाणिज्य सचिव के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, श्रीनिवास ने सदस्यता प्रदान करते समय क्लब में भेदभाव पर ध्यान दिया था।


यहां आपको बता दें कि क्लब के खिलाफ कई शिकायतें 2014 से MCA के पास लंबित हैं। अब कंपनी मामलों के मंत्रालय डायरेक्टर जनरल मनमोहन जुनेजा को क्लब का प्रशासक नियुक्त किया गया है।  शायद ये कहना गलत नहीं होगा कि MCA और दिल्ली जिमखाना क्लब के बीच की ये लड़ाई ऐसे ही जारी रहेगी, जब तक ये मामला सुप्रीम
कोर्ट नहीं पहुंच जाता है।


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