जानिए क्यों, कर्नाटक हाई कोर्ट ने केंद्र से की गैंगरेप के लिए डेथ पेनल्टी की सिफारिश

हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई कि आजादी के 70 साल बाद भी भारत में महिलाएं खतरे में हैं
अपडेटेड Oct 28, 2020 पर 08:57  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कर्नाटक हाई कोर्ट (Karnataka High Court) ने मंगलवार को विधायिका (Legislature) और केंद्र सरकार (Central Government) को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 या गैंगरेप के प्रावधानों में संशोधन करने और आजीवन कारावास (life imprisonment) और जुर्माना की मौजूदा सजा के अलावा मृत्युदंड को शामिल करने की सिफारिश की। यह देखते हुए कि IPC को 1860 के अधिनियम 45 द्वारा अधिनियमित किया गया था और आजादी के 74 सालों बाद भी महिलाएं बलात्कारियों/कानून के उल्लंघनकर्ताओं से सुरक्षित नहीं है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने IPC की धारा 376 में संशोधन की सिफारिश की है ताकि गैंगरेप के अपराध के लिए मृत्युदंड (capital punishment) की सजा दिया जा सके।


जस्टिस बी वीरप्पा (B Veerappa) और जस्टिस के नटराजन (K Natarajan) की खंडपीठ ने साल 2012 में बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (National Law School of India University) की छात्रा के साथ हुए गैंगरेप के मामले में सात अभियुक्तों को दी गई, आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए अपने फैसले में विधायिका और केंद्र सरकार से यह सिफारिश की है। पीठ ने नाराजगी जताई कि आजादी के 70 साल बाद भी भारत में महिलाएं अभी भी खतरे में हैं।


पीठ ने अपील की है कि बलात्कार के अपराधों को रोकने के लिए लिंग संवेदनशीलता को लेकर जागरूकता फैलाने का समय आ गया है। कोर्ट ने कहा कि हम आशा और विश्वास करते हैं कि लैंगिक संवेदनशीलता को बढ़ाना महिलाओं की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। निर्भया के मामले के बाद कड़े संशोधित कानून के बावजूद महिलाओं की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। समय आ गया है कि गृह विभाग, राज्य कानूनी सेवा अधिकारी, महिला संगठन और प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आम जनता के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना शुरू कर दें।


कोर्ट ने दिए ये सुझाव


लाइव लॉ के मुताबिक, साथ ही हाई कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया है कि TV और प्रेस के माध्यम से लिंग न्याय पर जनता के संवेदीकरण का स्वागत किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि ऑटो, टैक्सियों और बसों आदि जैसे सार्वजनिक परिवहन वाहनों में बैनर और प्लेकार्ड लगाए जाने चाहिए। रात के समय सड़क लाईट जलाना, बस-स्टॉप पर रोशनी और अतिरिक्त पुलिस गश्त को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। पुलिस/ सुरक्षा गार्डों को अंधेरे और एकांत वाले स्थानों जैसे पार्क, सड़कों आदि पर तैनात किया जाना चाहिए, महत्वपूर्ण जगहों पर CCTV कैमरे लगाए जाने चाहिए।


महिलाओं की तत्काल सहायता के लिए मोबाइल ऐप तैयार किए जाने चाहिए और उनका प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए। महिलाओं की रक्षा करने वाले विभिन्न कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के अलावा, बड़े पैमाने पर समाज की मानसिकता में बदलाव और लिंग न्याय पर जनता में जागरूकता पैदा करना, महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने का एक लंबा रास्ता तय करेगा।


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