Onion Price: इन 4 कारणों से आसमान छू रहे प्याज के दाम, जानिए कब कम होगी कीमत?

पहले 60 रुपए किलो मिलने वाली प्याज की कीमत 80 से लेकर 100 रुपए किलो तक पहुंच गई है
अपडेटेड Oct 24, 2020 पर 14:37  |  स्रोत : Moneycontrol.com

केंद्र सरकार ने प्याज  (Onion) की कीमतों में नियंत्रण लाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने प्याज व्यापारियों पर भंडारण की सीमा तय करने का फैसला किया है। इसके तहत खुदरा विक्रेता को स्टॉक में मात्र 2 टन प्याज रखने की इजाजत होगी और वहीं थोक विक्रेता को मात्र 25 टन स्टॉक में रखने की इजाजत होगी। दरअसल, पहले 60 रुपए किलो मिलने वाली प्याज की कीमत 80 से लेकर 100 रुपए किलो तक पहुंच गई है। मुंबई में रिटेल में प्याज 100 रुपए किलो के भाव से मिल रहा है, वहीं दिल्ली में एक किलो प्याज की कीमत 70 से 80 रुपए हो गई है। कोलकाता में भी लगभग यही रेट है। चेन्नई में प्याज का खुदरा भाव 70 से लेकर 90 रुपए प्रति किलो पहुंच गया।


गुरुवार को दूसरे मेट्रो शहरों के मुकाबले चेन्नई और मुंबई में प्याज सबसे महंगा बिका। अगर पूरे देश की बात करें तो एक ही दिन में प्याज के रेट में 2 रुपये से लेकर 47 रुपये प्रति किलो तक उछाल आया है। उपभोक्ता मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक, बेंगलुरु में बुधवार को 40 रुपये किलो बिकने वाला प्याज गुरुवार को 47 रुपये महंगा होकर 87 रुपये पर पहुंच गया। वहीं, दरभंगा में 40 से 62 रुपये, इंदौर में 45 से 55 रुपये पर और पटना में 10 रुपये महंगा होकर 65 रुपये कलो पहुंच गया। हालांकि, सरकार के इन आंकड़ों और गली-मोहल्लों, साप्ताहिक बाजारों में प्याज के रेट में काफी अंतर है।


इन 4 कारणों से आसमान छू रहे प्याज के दाम


नेशनल हॉर्टिकल्चर एंड रिसर्च फाउंडेशन के कार्यवाहक डायरेक्टर डॉ. पीके गुप्ता (Dr PK Gupta) ने प्याज के बढ़ते दामों के पीछे निम्न कारणों को माना है...


बारिश ने बिगाड़ा किचन का टेस्ट


पीके गुप्ता के मुताबिक, भारत में प्याज तीन सीजन खरीफ (गर्मी), खरीफ (गर्मी के बाद) और रबी (सर्दी) में बोया जाता है। सितंबर में खरीफ प्याज की आवक शुरू हो जाती है, जबकि नवंबर के बाद की खरीफ और अप्रैल के बाद से रबी प्याज की आवक होती है। पिछले साल और इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून में भारी बारिश ने प्याज की आवक को बुरी तरह प्रभावित किया है। आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में बारिश ने प्याज की फसलों को बर्बाद कर दिया, जिस वजह से कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।


बीजों की भारी कमी


प्याज के कीमतों के आसमान छूने का दूसरा कारण प्याज के बीजों की भारी कमी। पीके गुप्ता ने कहा कि हमारे पास पिछले साल रबी और खरीफ की बुवाई के लिए बीजों की कमी थी और हम इस साल भी रबी की बुवाई के लिए प्याज की कमी का सामना करेंगे और फिर प्याज की कीमतों में तेजी आएगी। देश में प्याज के बीजों की कम से कम 10 फीसदी की कमी का सामना करना पड़ रहा है, हालांकि, अधिकांश किसानों ने कीमतों में उछाल के बाद पिछले साल रबी के दौरान पुनः बुवाई के लिए अपनी पूरी उपज बेचने का विकल्प चुना। ऐसे में किसानों ने बढ़ती कीमतों को देखते हुए इसे बेचना उचित समझा।


बफर स्टॉक की कमी


चेन्नई स्थित राजति ग्रुप के निदेशक और प्याज निर्यातक मदन प्रकाश ने कहा कि केंद्र सरकार के पास प्याज का बफर स्टॉक नाकाफी है। उन्होंने सरकार के प्याज के बफर स्टॉक (एक लाख टन) पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि अकेले तमिलनाडु को एक दिन में 2,000 टन प्याज की जरूरत होती है, तो इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि देशभर में प्याज की कितनी मांग हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारी वर्षा के चलते प्याज की फसलों में एंथ्रोनोज और ट्विस्टर नामक बैक्टीरिया की संख्या बढ़ गई, जिस कारण प्याज की 70 फीसदी खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा। इससे रबी फसल की प्याज का 35 फीसदी भंडारण भी सड़ गया। प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी की मुख्य वजहों में से एक बफर स्टॉक की कमी है।


प्रीमियम का मामला


कमोडिटी की प्रत्याशित कमी की वजह से प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए चौथा कारण अस्थिरता प्रीमियम (premium volatility) है। अस्थिरता प्रीमियम की स्थिति में कृषि उपज विपणन समिति (APMC) के बाजारों में खुदरा कीमतें लगभग दोगुनी हो जाती हैं। कृषि अर्थशास्त्रियों के अनुसार, इन उत्पादों के विकल्प की कमी होने पर कीमतें और प्रीमियम में खतरनाक वृद्धि होती है, लेकिन डॉ. गुप्ता ने प्याज की कीमतों की वृ्द्धि पर अंकुश लगाने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इसके लिए विभिन्न महत्वपूर्ण कदम उठा रही है, खासकर वह मिस्र जैसे देशों से आयात को अनुमति भी दे रही है।


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