Zika Virus: अब महाराष्ट्र में सामने आया पहला केस, केरल में अब तक 63 मामले

Maharashtra Zika Virus: पुणे जिले की पुरंदर तहसील में एक 50 साल की महिला मरीज मिली। हालांकि, मरीज ठीक है
अपडेटेड Aug 01, 2021 पर 15:37  |  स्रोत : Moneycontrol.com

केरल (Kerala) के बाद अब महाराष्ट्र (Maharashtra) में जीका वायरस (Zika Virus) का पहला मामला सामने आया है। न्यूज एजेंसी ANI ने महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग के हवाले से बताया, "जीका वायरस का पहला केस महाराष्ट्र में सामने आया है। पुणे (Pune) जिले की पुरंदर तहसील में एक 50 साल की महिला मरीज मिली। हालांकि, मरीज ठीक है।"


वहीं केरल में लगातार जीका वायरस के मामले बढ़ रहे हैं। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने शनिवार को बताया, "राज्य में दो और लोगों में जीका वायरस की पुष्टि हुई है। इसके साथ, राज्य में कुल 63 लोगों में वायरस का पता चला है। वर्तमान में 3 एक्टिव केस हैं।"


क्या है Zika Virus और इसके लक्षण?


WHO की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, Zike वायरस बीमारी मुख्य रूप से Aedes मच्छरों से फैले एक वायरस के कारण होती है, जो दिन में काटता है।


जीका के लक्षण डेंगू की तरह ही होते हैं और आम तौर पर हल्के होते हैं। इसमें बुखार, दाने, आंख आना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, बेचैनी या सिरदर्द शामिल हैं। लक्षण आमतौर पर 2-7 दिनों तक रहते हैं। जीका वायरस संक्रमण वाले ज्यादातरल लोगों में लक्षण विकसित नहीं होते हैं।


गुइलेन-बैरे सिंड्रोम, न्यूरोपैथी और मायलाइटिस सहित वयस्कों और बच्चों में जीका वायरस के संक्रमण से न्यूरोलॉजिकल रिस्क का एक बढ़ा जोखिम जुड़ा हुआ है।


पहली बार कहां मिला ये वायरस?


जीका वायरस एक मच्छर से फैलने वाला फ्लेविवायरस है, जिसे पहली बार 1947 में युगांडा में बंदरों में पाया गया था। इसे बाद में 1952 में युगांडा और तंजानिया में इसानों में इसकी पहचाना हुई थी। जीका वायरस रोग का प्रकोप अफ्रीका, अमेरिका, एशिया और पेसिफिक तक में फैला हुआ है।


रोकथाम और उपचार


जीका वायरस के लिए कोई विशिष्ट इलाज या वैक्सीन नहीं है और जीका वैक्सीन पर अभी रिसर्च जारी है। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी लक्षणों वाले लोगों को भरपूर आराम करने, तरल पदार्थ पीने और "सामान्य दवाओं से दर्द और बुखार का इलाज" करने की सलाह देती है।


WHO का कहना है कि जीका वायरस के संक्रमण को मच्छरों के काटने से बचाकर ही रोका जा सकता है। गर्भवती महिलाओं, प्रजनन उम्र की महिलाओं और छोटे बच्चों में मच्छरों के काटने से बचाव के लिए विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।