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अमेरिकी सेना पर ईरान का हमला, बाजार में 5-6% तक आ सकती है गिरावट

ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इराक में मौजूद अमेरिकी बेस पर मिसाइल दागे हैं, जिससे बाजार में बिकवाली शुरू हो गई
अपडेटेड Jan 08, 2020 पर 15:31  |  स्रोत : Moneycontrol.com

भारतीय शेयर बाजार में 8 जनवरी को गिरावट का दौरा रहा। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इराक में अमेरिकी बेस पर मिसाइल दागे हैं। यह खबर आते ही बाजार में बिकवाली शुरू हो गई। ब्रेंट क्रूड भी 70 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने की वजह से गोल्ड प्राइस भी हर दिन बढ़ता जा रहा है।


दुनिया भर के निवेशकों को अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने का डर सता रहा है। इसका नकारात्मक असर भारत सहित दूसरे शेयर बाजार पर देखने को मिल सकता है।


बाजार के जानकारों का कहना है कि इस तनाव की वजह से शेयर बाजार में 5-6 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। लिहाजा लॉन्ग टर्म निवेशक इस मौके का फायदा उठाते हुए निवेश कर सकते हैं। निफ्टी इंडेक्स का एक मजबूत सपोर्ट 11,980 पर है।


कमजोर GDP ग्रोथ


भारत की GDP ग्रोथ फिस्कल ईयर 2019-20 में 5 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। पहले 6.8 फीसदी ग्रोथ का अनुमान था। क्रू़ड प्राइस बढ़ना भारतीय शेयर बाजार के लिए हमेशा से ही बुरी खबर रही है। भारतीय डिमांड की 80 फीसदी आपूर्ति आयात से करता है। लिहाजा क्रूड प्राइस बढ़ने से सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ जाता है। 


कोटक सिक्योरिटीज के सीनियर VP (फंडामेंटल रिसर्च के हेड-PCG) रश्मिक ओझा ने कहा, "जियोपॉलिटिकल तनाव से बाजार की टेंशन बढ़ती जा रही है। यह मुश्किल शुरू होने से पहले निफ्टी बजट की उम्मीदों के सपोर्ट से बढ़ रहा था।"


ओझा का कहना है कि अगर अमेरिका-ईरान के बीच टेंशन नहीं बढ़ता है तो निफ्टी का सपोर्ट या बॉटम 11,600 के लेवल पर बन सकता है। उन्होंने कहा बाजार के पीक से इसमें 5-6 फीसदी की गिरावट आ सकती है तो लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट के लिए सही है।


निफ्टी अपने रिकॉर्ड हाई 12,293 के लेवल से 5 फीसदी नीचे आ सकता है। क्रू़ड प्राइस और करेंसी में स्टेबिलिटी बने रहने से निवेशकों को थोड़ी राहत है। हालांकि अगर कोई बुरी खबर आती है तो बाजार को तगड़ा झटका लग सकता है।


निवेशकों को क्या करना चाहिए?


क्रूड प्राइस और रुपए का स्थिर रहना अच्छी खबर है। लेकिन GDP ग्रोथ का अनुमान घटने से बाजार की तेजी पर रोक लग सकती है। अगर हम ऐतिहासिक आंकड़ों पर गौर करेंगे तो पता चलेगा कि जियोपॉलिटिकल तनाव की वजह से अगर बाजार में गिरावट आती है तो वह लॉन्ग टर्म निवेश के लिए सही वक्त है। छोटे निवेशकों को भी इस मौके का फायदा उठाना चाहिए।


अमेरिका-ईरान में तनाव की वजह से सेंसेक्स और निफ्टी अपने ऑल टाइम हाई से नीचे आए हैं। इसके साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट आई है।


ओझा ने कहा, "2020 में कंजम्प्शन और इंफ्रा स्टॉक्स का दबदबा रहेगा। IT शेयरों से भी बेहतर रिटर्न मिल सकता है। T20 पोर्टफोलियो में FMCG, IT और सीमेंट स्टॉक्स को शामिल कर सकते हैं।" 


गिरावट का फायदा उठाते हुए निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का 60 फीसदी निवेश लार्जकैप और 40 फीसदी निवेश स्मॉल कैप में करना चाहिए।


निवेश के विचार जानकारों के निजी हैं।


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