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रिटायरमेंट प्लानिंग में कितना कारगर है NPS

सरकारी कर्मचारियों के लिए अलग से फंड मैनेज किया जाता है।
अपडेटेड May 14, 2019 पर 15:26  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

NPS ने 10 साल पूरे किए। लेकिन इस 10 सालों में NPS के सफर में कई उतार चढाव आएं हैं, पर इस प्रोडक्ट को लेकर अब ऐसा क्या हो गया कि निवेशक और पेंशन फंड मैनेजर्स में भी इसे लेकर भरोसा बढ रहा है। आज योर मनी इसकी ही पडताल करेगा।
एनपीएस में रिटायरमेंट के लिए कॉर्पस जुटाने में मदद मिलती है। इसमें 50,000 अतिरिक्त टैक्स छूट से रुझान बढ़ा है। NPS में अच्छा रिटर्न और कोई खर्च नहीं है। पेंशन प्लान रिटायमेंट सेविंग के लिए सही विकल्प है। लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखने का मॉडल हो सकता है। हालांकि  मैच्योरिटी पर 40 प्रतिशत रकम की एन्युटी खरीदना अनिवार्य है। मैच्योरिटी पर  60 प्रतिशत रकम निकालने का प्रावधान है। 60 प्रतिशत रकम पूरी तरह टैक्स फ्री है।


NPS के 8 फंड मैनेजर हैं। हर फंड मैनेजर 3 फंड मैनेज करता है। हालांकि हम एक ही फंड मैनेजर का चुनाव कर सकते हैं। NPS में कई विकल्प होते हैं जैसे एक्टिव विकल्प जिसमें सब्सक्राइबर खुद फंड चुनते हैं। दूसरा होता है ऑटो विकल्प जिसमें उम्र के मुताबिक इक्विटी-डेट में निवेश होता है। एक्टिव विकल्प में इक्विटी निवेश की अधिक्तम सीमा 75 प्रतिशत होती है। ऑटो च्वाइस में भी तीन विकल्प होते हैं। एग्रेसिव लाइफसाइकल फंड, मॉडरेट लाइफसाइकल फंड और कंजरवेटिव लाइफसाइकल फंड।


सरकारी कर्मचारियों को NPS में ज्यादा फायदा होता है। नए नोटिफिकेशन के तहत सरकारी कर्मचारी के निवेश विकल्प में बदलाव कर सकता है। निवेश विकल्प में बदलाव किया गया है जिसके तहत सरकारी कर्मचारी इक्विटी निवेश अब बढ़ा सकते हैं। सरकारी कर्मचारियों का निवेश 3 फंड मैनेजर्स के पास होगा। SBI, LIC और UTI के पास सरकारी कर्मचारियों का निवेश होता है। फंड का 15 प्रतिशत तक का निवेश इक्विटी में करते हैं। बाकी निवेश सरकारी सिक्योरिटीज और कॉर्पोरेट बॉन्ड में किया जाता है।


सरकारी कर्मचारियों के लिए अलग से फंड मैनेज किया जाता है। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए स्कीम CG है। राज्य कर्मचारियों के लिए स्कीम SG है। दोनों स्कीमों ने 10 साल तक सालाना 9-9.5 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। EPFO के 8.7 प्रतिशत के रिटर्न के मुकाबले रिटर्न ज्यादा है।