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घर खरीदने के लिए डाउन पेमेंट जुटानी है? फॉलो करें ये टिप्स

डाउन पेमेंट अरेंज करना आसान हो सकता है, अगर आप इसे एक फाइनेंशियल टारगेट बना लें
अपडेटेड Apr 29, 2019 पर 10:33  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अपना मकान हो और बिल्कुल मनचाही जगह पर हो- बहुत से भारतीय परिवारों का ये एक सपना होता है। पिछली पीढ़ी ईंट जोड़-जोड़कर अपना घर बनाती थी लेकिन 21वीं सदी के शुरुआती वक्त में पैदा हुई पीढ़ी मासिक किश्तों में भुगतान करके अपना घर खड़ा करने का सपना पूरा करती है। लेकिन, ये बात भी सच है कि आप पहले डाऊन पेमेंट के रुप में कुछ रकम अदा करते हैं, तभी कोई फाइनेंस कंपनी आपको अपने घर का सपना साकार करने में मदद देने के लिए सामने आती है।


महानगरों में मकान 50 लाख से 1 करोड़ रुपए के रेंज में मिलते हैं सो डाउन पेमेंट की रकम 10 लाख से लेकर 20 लाख तक की हो जाती है और इतनी रकम जुटा पाना बहुतों के लिए पहाड़ चढ़ने जितना कठिन होता है।


पुणे के एक दंपत्ति कैवल्य कुलकर्णी और केतकी हल्लुर की ही मिसाल लीजिए। कैवल्य (33) एक फार्मास्युटिकल कंपनी में साइंटिस्ट हैं और केतकी (28) कंस्ट्रक्शन केमिकल कंपनी में सिविल इंजीनियर। इस दंपत्ति ने ढाई साल पहले अपना मकान खरीदने का फैसला किया और दोनों ने पूंजी जुटाने के मोर्चे पर एकदम ही जीरो से शुरुआत की।


दोनों कार के लोन की किश्त पहले से ही चुका रहे थे। ऐसे में होमलोन ले पाना उनके लिए बड़ा कठिन था। कैवल्य कुलकर्णी बताते हैं कि कर्जदाता होमलोन तब ही देने को तैयार होता है जब आपके पास पहले से कुछ जमापूंजी होती है। हमलोग मासिक किश्तों में कर्ज चुका पाने की स्थिति में तो थे लेकिन चुनौती शुरुआती पूंजी यानी डाऊन पेमेंट जुटाने की थी।


दोनों ने तय किया कि सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए कुछ पूंजी जोड़ी जाए। ढाई सालों में एसआईपी के जरिए जो रकम दोनों ने जोड़ी उसका इस्तेमाल अपने घर के लिए डाऊन पेमेंट के रूप में किया। कुलकर्णी बताते हैं कि जो बैंक बेहतर दर पर कर्ज दे रहे थे उनके हिसाब से उनकी जोड़ी गई जमापूंजी काफी नहीं थी। सो, हमने एक नॉन-बैंक फाइनेंस कंपनी को चुना। यह कंपनी अधिकतम कर्ज देने को तैयार थी, हालांकि कंपनी ने सूद की दर कुछ ऊंची रखी थी।


मकान की कीमत का ऊंचा होना ही सिर्फ उसकी खरीदारी में खलल नहीं डालता। नई पीढ़ी के ज्यादातर लोग अपनी हर खरीदारी कर्ज की रकम के जरिए करने के आदी हो गए हैं। कर्ज की रकम वे बाद में किश्तों में चुकाते हैं। लेकिन घर की खरीदारी के वक्त उन्हें शुरुआती तौर पर कुछ रकम देनी होती है, तभी होम लोन हासिल होता है और इसी कारण मुश्किल खड़ी होती है। फाइनेंशियल प्लानर्स का कहना है कि डाउन पेमेंट की व्यवस्था करना बहुत आसान हो सकता है बशर्ते आप इसे एक वित्तीय लक्ष्य के रुप में लेकर चलें।
 


अपना हिसाब-किताब दुरुस्त रखिए


आपको दो चीजें एकदम साफ पता होनी चाहिए। एक तो यह कि आपको मकान की खरीद कब करनी है और दूसरी ये कि आप कितनी कीमत का मकान खरीदना चाहते हैं। अगर आप वन बेडरूम, हॉल और किचन यानी वन बीएचके का मकान खरीदना चाह रहे हैं तो इसकी कीमत अभी 50 लाख रुपए है और ढाई साल बाद खरीद करनी है तो फिर इसकी कीमत में इस दरम्यान होने वाली इंफ्लेशन को भी जोड़ लें और इसके बाद ही अपने डाउन पेमेंट के रकम की गिनती करें।


50 लाख रुपए का मकान अब से दो साल बाद 5 प्रतिशत की इंफ्लेशन के हिसाब से 55.12 लाख रुपए का हो जाएगा। इसका मतलब हुआ कि 20 प्रतिशत के हिसाब से आपको डाउन पेमेंट के रुप में 11.02 लाख रुपए चुकाने होंगे। गेटिंग यू रीच के फाउंडर और सीईओ रोहित शाह बताते हैं कि डाउन पेमेंट की गिनती करते वक्त आपको इंफ्लेशन का भी ध्यान रखना होता है, स्टॉम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन कॉस्ट की भी गिनती करनी होती है।


 
स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन की दर बदलती रहती है. सो, आपको अपने हिसाब में इतनी गुंजाइश रखनी होगी कि बदली हुई कीमत के हिसाब से पूंजी जोड़ सकें।


एक मोटा नियम यह भी है कि आपकी महीने की जितनी आमदनी है, कोशिश करें कि आपकी ईएमआई उसके 40 प्रतिशत से कम ही रहे। सभी वित्तीय सलाहकार इसकी सलाह देते हैं। आइए, इस बात को एक उदाहरण के जरिए समझते हैं। मान लीजिए कि आप 50 लाख की कीमत वाले मकान के लिए 40 लाख रुपए 9.25 प्रतिशत की सूद के दर पर 20 साल के लिए लोन पर लेते हैं तो आपकी ईएमआई 36,635 रुपए की होगी। ऐसे में आपका मासिक वेतन 90,000 रुपए होना चाहिए ताकि ईएमआई चुकाने पर आपके हाथ एकदम से तंग ना हो जाएं।


आप जितना ही कम लोन लेंगे आपके लिए उसकी अदायगी कर पाना उतना ही आसान होगा। अगर आपकी आमदनी में बाधा है या फिर आपने अपनी प्राथमिकता के तौर पर कुछ और भी वित्तीय लक्ष्य निर्धारित कर रखे हैं तो फिर आपको मकान खरीदने का इरादा बदल देना चाहिए। अगर आप मकान की खरीद को प्राथमिकता के तौर पर अपना लक्ष्य रखते हैं तो आपको अपनी आमदनी बढ़ानी होगी या फिर अन्य वित्तीय लक्ष्यों के मद में दी जा रही रकम में कटौती करनी होगी।


निवेश कहां करें


आप मकान की खरीद के मद में डाउन पेमेंट की रकम जमा करने का फैसला ले लेते हैं तो फिर आपको ध्यान इस बात पर लगाना होगा कि आखिर आपकी कितनी रकम जुटानी है, आपके पास कितना है और आपका रिस्क प्रोफाइल क्या है। ऑप्टिमा मनी मैनजर्स के संस्थापक और सीईओ पंकज मठपाल कहते हैं कि अगर आपके पास पांच साल का वक्त है तो फिर आपको रकम इक्विटी म्युचुअल फंड या फिर एग्रेसिव हाइब्रिड फंड में लगानी चाहिए।


अगर रकम जमा करने के लिए आपके पास समय कम है तो फिर आपको फिक्स्ड इनकम का विकल्प जैसे कि फिक्स्ड डिपॉजिट, रेकरिंग डिपॉजिट और बांड फंड्स को चुनना चाहिए।


अगर आपके पास एक या दो साल का ही वक्त है और आप रकम म्युचुअल फंड में लगाते हैं और मार्केट बीच की अवधि में मंदा पड़ता है या फिर उसमें ज्यादा उतार-चढ़ाव आता है तो फिर आपने जितनी रकम लगाई है उससे कम ही रिटर्न आपको हासिल होगा।


छोटी अवधि में मार्केट का रुख क्या रहेगा यह जान पाना मुश्किल होता है। अगर रकम जुटाने के लिए आपके पास ज्यादा वक्त नहीं है तो आपको इक्विटी फंड से बचना चाहिए। बेशक आपके हाथ में पांच साल का समय ही क्यों ना हो, अच्छा यही होगा कि आप मल्टीकैप या लार्जकैप इक्विटी फंड में पैसा लगाएं ना कि स्मॉल कैप इक्विटी फंड में- स्मॉल कैप में रिटर्न कुछ ऊंचा मिलता है लेकिन उनमें जोखिम भी ज्यादा होता है।


दरअसल, यहां आपका मकसद पैसे कमाना नहीं बल्कि मकान के डाउन पेमेंट के लिए रकम जुटाना है, सो आपको पैसे बढ़ाने से ज्यादा पैसा बचाने पर जोर देना होगा। जैसे ही लगे कि अब निर्धारित समय-अवधि पूरी होने के करीब पहुंच रही है या फिर जितनी रकम जुटाने की बात सोची थी उस रकम के आस-पास तक पहुंच गए हैं तो फिर आपको इक्विटी फंड्स में रकम लगाने की जगह कम जोखिम वाले फिक्स्ड इनकम ऑप्शन का विकल्प चुनना चाहिए।


 मान लीजिए कि आप बांड मे निवेश करते हैं और उसमें 6 प्रतिशत की दर से रिटर्न हासिल हो रहा है तो फिर आपको 2 साल में 20 लाख रुपए की जमापूंजी तक पहुंचने के लिए 78,250 रुपए प्रतिमाह का निवेश करना होगा. ये मानकर चल रहे हैं कि आपको डाउन पेमेंट के रुप में 20 लाख रुपए जोड़ने हैं। यह खुद में एक बड़ा काम है। लेकिन अगर आपके घर में पति-पत्नी दोनों कमाते हैं और कोई बच्चा नहीं है, साथ ही आपको फिजूलखर्ची की आदत नहीं है तो फिर ऐसा कर पाना मुमकिन है। आपको बांड फंड में ही निवेश करना चाहिए क्योंकि आपको डाउन पेमेंट की रकम दो सालों की अवधि में जुटानी है।


अगर आपके हाथ में पांच साल का समय है और यह मानकर चला जाए कि इक्विटी फंड में 12 प्रतिशत की दर से रिटर्न मिलेगा तो फिर आपको प्रतिमाह 24659 रुपए निवेश करने होंगे। जिस परिवार में पति-पत्नी दोनों कमा रहे हैं वैसे परिवारों में तनिक बेहतर प्लानिंग के साथ ऐसा कर पाना कोई मुश्किल काम नहीं।


चट मंगनी पट ब्याह की तर्ज पर सोचने वालों को ये बातें बोरिंग लग सकती हैं। लेकिन कदम साधकर चलने वाले बहुत से लोग इस बात को मानेंगे। मुंबईवासी केतन पंडित (37) एक मार्केटिंग प्रोफेशनल हैं और एक टेक्नालॉजी कंपनी में काम करते हैं। उनकी इच्छा है कि मुंबई के उपनगरीय इलाके में दो साल में उनका एक स्टैंडअलोन बिल्डिंग में 2बीएचके का घर हो। वे अपनी जरुरत में कतर-ब्यौंत नहीं करना चाहते। लेकिन एक अच्छी बात यह भी है कि वे किसी आलीशान हाऊसिंग सोसायटी में रहने का सपना नहीं पाल रहे सो मकान की खरीद के बजट पर टिके रहने में उनको दिक्कत नहीं आने वाली।


 केतन डाउन पेमेंट समेत अपने कई सारे वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए पिछले 15 सालों से एसआइपी के जरिए मिक्स इक्विटी और डेट फंड में निवेश कर रहे हैं। केतन कहते हैं कि उन्हें उम्मीद है कि म्युचुअल फंड में रेगुलर इन्वेस्टमेंट से मुंबई में अपना मकान खरीद पाने का उनका सपना साकार करने में मददगार होगा।


पर्सनल लोन का ख्याल अच्छा नहीं


लेकिन हर किसी के पास केतन पंडित जितना धीरज नहीं होता। यह भी देखने में आता है कि लोग-बाग डाउन पेमेंट के लिए पर्सनल लोन ले लेते हैं। लेकिन सभी फाइनेंशियल प्लानर आपको पर्सनल लोन की सलाह दें- ऐसी बात नहीं। फाइनेंशियल प्लानर पर्सनल लोन की सलाह देने की जगह कहेंगे कि आप अपने बैलेंस शीट पर गौर करें। आपने बीते वक्त में अपने फाइनेंशिल लक्ष्य की परवाह किए बगैर कुछ ऐसे निवेश किए होंगे जिनमें रिटर्न कम मिलता होगा। आपको ऐसे निवेशों के बारे में भी सोचना चाहिए जो आपको विरासत में मिली हैं और जो आपके फाइनेंशियल प्लान में फिट नहीं बैठती।


मिसाल के लिए आप ऐसे फिक्स्ड डिपॉजिट को तोड़ने का फैसला कर सकते हैं जिसमें टैक्स कटने के बाद आपको 6 प्रतिशत का रिटर्न मिल रहा हो। अगर आपने ऊंची प्रामियम वाली लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली है और इसमें इंश्योर्ड रकम ज्यादा नहीं है, साथ ही इसका लॉकिंग पीरियड खत्म हो गया हो तो फिर ऐसी पॉलिसी सरेंडर की जा सकती है ताकि आपके हाथ में कुछ नकदी आ सके।


ऐसा फैसला लेते वक्त एक बात का आपको विशेष ध्यान रखना होगा- आपका ध्यान बराबर इस बात पर होना चाहिए कि आपको कितने का लाइफ कवर हासिल है। अगर लाइव कवर पर्याप्त ना हो तो आप लिए जाने वाले लोन और अपनी जरूरतों का ख्याल रखते हुए लाइव कवर खरीदने का विचार बना सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको टर्म लाइफ इंश्योरेंस का विकल्प चुनना चाहिए।


अगर आप पर्सनल लोन लेते हैं तो दो मोर्चों पर आपको इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है- एक तो पर्सनल लोन के मद में सूद की दर ऊंची होती है, सालाना 14 प्रतिशत की दर से सूद देना पड़ सकता है। साथ ही, होम लोन लेने के मद में आपकी जो साख देखी जाती है, उसमें भी कमी आती है। चूंकि मकान की खरीदारी एक बड़ी रकम की मांग करती है और इसके लिए आपको ऊंची ईएमआई चुकानी होती है, सो अच्छा यही होगा कि आप अपनी अन्य उधारियों और कर्जों को जहां तक हो सके कमतर रखें। आपको मौजूदा कर्जों का भुगतान समय से करना चाहिए और अनपेड क्रेडिट कार्ड ड्यूज से भी बचना चाहिए। इससे आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर बनेगा और आपको होमलोन लेने में मदद मिलेगी।


क्रेडिट स्कोर का बुरा होना आपकी घर की खरीदारी के सपने में अड़ंगा लगा सकता है, खासकर उस घड़ी जब आपने डाउन पेमेंट कर दिया हो और होमलोन लेते वक्त दिखे कि आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर नहीं है। रिटेललेंडिंग डॉट कॉम के फाउंडर और सीईओ संजय कुमार का कहना है कि डाउन पेमेंट करने से पहले होमलोन लेने संबंधी अपनी एलिजिबिलिटी पता कर लेनी चाहिए, साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आप अपने क्रेडिट कार्ड बिल और मौजूदा कर्जों की किश्त का भुगतान समय पर कर रहे हैं।


पर्सनल लोन लेने से बचना तो चाहिए लेकिन सबके पास एक जैसा वक्त तो नहीं होता। हो सकता है कि आपको एक अच्छा सौदा नजर आ रहा हो लेकिन आपके हाथ में डाउन पेमेंट के लिए एकमुश्त राशि ना हो। ऐसी स्थिति में दोस्त और रिश्तेदार आपकी मदद के लिए आ सकते हैं। अगर आप संयमित जीवन जी रहे हैं तो फिर कम अवधि के लिए पर्सनल लोन ले सकते हैं।


पंकज मठपाल का कहना है कि लोन के मोर्चे पर कई विकल्पों के बारे में सोचना चाहिए। अगर आपके पास नेशनल सेविंग स्कीम, लिक्विड बांड और फिक्स्ड डिपॉजिट में सरीखी सिक्योरिटीज में लगाई हुई रकम है तो आपको इनके सहारे रकम जुटानी चाहिए। ये सिक्योरिटीज सस्ती दर पर हासिल हैं। फिर आपको ऐसे लोन उसी सूरत में लेने चाहिए जब लगे कि आने वाले वक्त में आपकी आमदनी में बढ़वार अच्छी खासी रहने वाली है। आपके पास बांड इन्वेस्टमेंट के रूप में लगाई गई एक बड़ी रकम हो सकती है और मुमकिन है कि उसकी अवधि साल के खत्म होने पर पूरी होने वाली हो। आपको ईएसओपीज् का इस्तेमाल करना चाहिए, बशर्ते वो आपके पास हो। संक्षेप में कहें तो जो रकम आपके पास मौजूद है उसी के इस्तेमाल के बारे में सोचिए और जहां तक संभव हो सके, पर्सनल लोन लेने से बचिए।


बंगलुरु के वेल्थ मैनेजमेंट फर्म इन्वेस्टोग्राफी की फाउंडर श्वेता जैन का कहना है कि लोग अमूमन मकान की खरीदारी में हड़बड़ी दिखाते हैं और हम सलाह देते हैं कि आपने जो बचत कर रखी है उसी का इस्तेमाल डाउन पेमेंट के रूप में कीजिए। डाउन पेमेंट के रूप में अदा की जा रही रकम के अतिरिक्त आपके हाथ में अपनी बचत का आधा हिस्सा होना ही चाहिए। किसी भी वक्त मामला गड़बड़ा सकता है, कुछ ऐसी बातें हो सकती हैं जिन्हें आपने सोचा ना हो।


ज्यादातर लोगों का जोर डाउन पेमेंट की रकम जुटाने पर होता है। वे इस बात की अनदेखी कर जाते हैं मकान की खरीदारी के क्रम में डाउन पेमेंट तो बस शुरुआती चरण है।


लैडर 7 फाइनेंशियल एडवायजरीज के फाउंडर और सीईओ सुरेश सदगोपन का कहना है कि जब आप डाउन पेमेंट कर देते हैं और उसमें 80 फीसदी रकम कर्ज देने वाले की लगी होती है तो आपके इस मकान में आपकी हिस्सेदारी बहुत कम होती है। जबतक आप कर्ज देने वाले को आखिरी रुपया तक नहीं चुका देते, आप खरीदे गए मकान को अपना नहीं कह सकते। उधारी के रूप में ली जा रही रकम के बारे में खूब सोच-समझकर निर्णय करें। ऐसा करने से आप कर्ज में ली गई रकम को बगैर किसी मुश्किल का सामना किए चुका सकेंगे।