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इन 5 गलतियों से आपका बड़ा नुकसान होगा

नौकरी मिलते ही आप क्या करना चाहते हैं. अगर ये 5 चीजें आपकी प्लानिंग में है तो सावधान हो जाइए
अपडेटेड Apr 22, 2019 पर 13:43  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पहली नौकरी के साथ ही आर्थिक आजादी मिलती है। फाइनेंशियल प्लानिंग का जज्बा होता है। लेकिन ज्यादातर युवाओं को यह समझ नहीं आता कि सही फाइनेंशियल प्लानिंग क्या है। आज हम यहां कुछ ऐसी गलतियों के बारे में बता रहे हैं जो आमतौर फाइनेंशियल प्लानिंग के दौरान होती हैं।


लाइफ इंश्योरेंस को निवेश समझने की भूल


जी हां। क्या आप भी लाइफ इंश्योरेंस को निवेश समझने की गलती कर बैठे हैं। यह बात समझना बेहद जरूरी है कि इंश्योरेंस और निवेश का मकसद बिल्कुल अलग है। इंश्योरेंस से हमें कवर मिलता है। जबकि निवेश के मायने बेहतर रिटर्न से है। दोनों को एकसाथ मिलाने का मतलब है कि दोनों में से कोई भी मकसद पूरा नहीं हो पाएगा।


कई लोग टैक्स छूट को ध्यान में रखकर बीमा लेते हैं। लिहाजा वे इस बात पर बिल्कुल ध्यान नहीं देते कि जो इंश्योरेंस वे खरीद रहे हैं वह उनके कितने काम का है। क्या जरूरत पड़ने पर वही उनके पैसों की कमी पूरी हो सकती है। इन बातों को भी ध्यान में रखने बीमा खरीदें या निवेश करें।  


घर खरीदने की जल्दी ना करें


भारतीय युवाओं की आदत होती है कि जैसे ही नौकरी मिले होम लोन लेकर घर खरीदना। होता ये है कि नौकरी मिलने के बाद बाकी सभी जरूरतों को छोड़कर सबसे पहले प्रॉपर्टी में निवेश करते हैं। कई बार लोग शादी होते ही सबसे पहले अपना घर खरीदने का फैसला करते हैं। लोगों की सलाह भी यही होती है कि जब घर खरीद सकते हैं तो रेंट पर रहने की जरूरत क्या है। ज्यादातर लोग होम लोन लेकर घर खरीदते हैं। होम लोन में 30 से 40 फीसदी सैलरी EMI में चली जाती है। इससे फाइनेंशियल सिचुएशन पर बहुत दबाव पड़ता है। नतीजा यह होता है कि दूसरी कई अहम चीजें पीछे छूट जाती हैं। जैसे रिटायरमेंट प्लान। नौकरी मिलने के बाद जिस चीज के बारे में सबसे पहले सोचना चाहिए वह रिटायरमेंट प्लान होता है ना कि घर। इसलिए कभी भी जल्दबाजी में घर खरीदने का फैसला ना करें।


इमरजेंसी फंड है क्या


कई लोग अच्छी खासी सैलरी होने के बाद भी अपने बुरे वक्त या किसी बीमारी के लिए कोई इमरजेंसी फंड नहीं रखते। कुछ लोग कमाते बहुत हैं लेकिन बचाते नहीं। लिहाजा जब भी जरूरत पड़ती है वे पर्सनल लोन लेते हैं या क्रेडिट कार्ड से खर्च करते हैं। ऐसे किसी बड़े खर्च के बाद एक दुष्चक्र शुरू हो जाता है जिससे निकलना मुश्किल होता है।


इतना ही नहीं कुछ लोग प्रॉपर्टी खरीदते हुए अपने PPF और EPF का सारा पैसा निकाल लेते हैं। लिहाजा उनके पास इमरजेंसी के नाम पर एक भी पैसा नहीं बचता है। आपके पास कम से कम 6 महीने की सैलरी इमरजेंसी फंड के तौर पर होना चाहिए।
अगर आपके पास कोई फंड नहीं है तो रेकरिंग डिपॉजिट करना शुरू कर दें।


हेल्थ बीमा है क्या


लोगों से जब भी पूछा जाता है, क्या आपके पास हेल्थ बीमा है तो उनका जवाब होता है कंपनी कवर देती है। एक तरफ इलाज का बढ़ता खर्च और दूसरी तरफ अनहेल्दी लाइफस्टाइल, ऐसे में सिर्फ कंपनी के भरोसे रहना गलत फैसला है। मान लीजिए किसी वजह से आपकी नौकरी छूट जाती है और परिवार का कोई सदस्य गंभीर रूप से बीमार हो जाता है। तो आप क्या करेंगे। कभी भी कंपनी के इंश्योरेंस पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।


फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज में निवेश करना


रिस्क से बचने के चक्कर में कई लोग अपना पैसा फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज में लगा देते हैं। यानी पैसा कुछ खास समय के लिए लॉक हो जाता है। इस तरह के निवेश में रियल रिटर्न बहुत कम होता है। बैंक FD, रेकरिंग डिपॉजिट, पोस्ट ऑफिस स्मॉल सेविंग्स में 8 से 9 फीसदी का रिटर्न होता है। दूसरी तरफ महंगाई की ग्रोथ रेट 5 फीसदी के आसपास है। ऐसे में आपका रियल रिटर्न 3 से 4 फीसदी होता है। इसके साथ ही आपको रिटर्न पर टैक्स भी चुकाना पड़ता है। कुल मिलाकर देखें तो आपके हाथ में बहुत कम पैसे आएंगे। इसलिए जरूरी है कि निवेश का एक हिस्सा इक्विटी या इक्विटी वाले म्यूचुअल फंड में लगाएं। इनमें आपको बेहतर रिटर्न मिल सकता है। लेकिन इस दौरान इस बात की अनदेखी ना करें कि आप कितना रिस्क ले सकते हैं।