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डेट फंड में डाउनग्रेड-डिफॉल्ट का डर, कैसे चुनें सही फंड

प्रकाशित Fri, 21, 2019 पर 13:20  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

डेट फंड में कहानी लगातार डरावनी होती जा रही है। डाउनग्रेड और डिफॉल्ट की वजह से निवेशकों में डेट फंड को लेकर डर पैदा हो गया है। सिर्फ निवेशक ही नहीं, AMC की परेशानियां भी बढ़ गयी हैं । हमने देखा कि HDFC AMC का स्टॉक 7 प्रतिशत गिरा। FMP स्कीम में पैसों की किल्लत के चलते AMC में फैसला लिया कि वो निवेशकों का पैसा अपनी जेब से भरेगी। जिसके लिए HDFC AMC को 500 करोड़ की लिक्विडिटी का सपोर्ट डालना पड़ा।


ये तो केवल एक AMC की बात है, अगर हम MF इंडस्ट्री की बात करें तो 31 मई के आंकडों के मुताबिक लगभग 18 हजार करोड़ रुपये TROUBLED कंपनियों की सिक्योरिटी में लगा हुआ है। जिसमें से 13.38 लाख करोड़ टॉप की AMC-HDFC और ICICI का लगा हुआ है। अब वक्त आ गया है के निवेशक इस झटके से बाहर निकलें और डेट फंड की इन मुसीबतों का डटकर सामना करें। डेट फंड के बारे में ज्यादा जानकारी देने के लिए सीएनबीसी-आवाज़ के साथ जुड़े हैं फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या।


डेट फंड कैसे चुनें


डेट फंड का चुनाव करते समय यह ध्यान दें कि फंड की किस्म उसके निवेश से मेल खानी चाहिए। फंड का बेंचमार्क सही होना चाहिए। जाने माने संस्थान और कंपनी में निवेश सुरक्षित होता है। फंड के डिबेंचर, G-Sec, बॉन्ड में निवेश पर गौर करना चाहिए। फंड के निवेश की क्रेडिट रेटिंग को जांचना चाहिए। फंड का चुनिंदा एसेट में निवेश ज्यादा, तो जोखिम भी ज्यादा होता है। एक ही सेक्टर में ज्यादा निवेश जोखिम भरा हो सकता है। फंड के कुल निवेश पर ध्यान देना चाहिए। फंड के निवेश की मैच्योरिटी फंड का नेचर बताती है और ब्याज दरों का फंड पर असर होता है।


डेट फंड निवेश कितना सुरक्षित


बॉन्ड, डिबेंचर्स, सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश होता है। डेट फंड कमर्शियल पेपर्स में निवेश करते हैं। डेट को अकसर सुरक्षित निवेश माना जाता है। हालांकि डेट फंड में भी कई तरह के जोखिम होते हैं। कंपनियों की डाउनग्रेडिंग, ब्याज दरों से जुड़े जोखिम होते हैं। कंपनियों के डिफॉल्ट हो जाने से सबसे ज्यादा रिस्क होता है। कॉरपोरेट बॉन्ड फंड में रिस्क ज्यादा रहता है।


किसी एक कंपनी के ग्रुप में ज्यादा एक्सपोजर से जोखिम बढ़ जाता है। अचानक हुए डाउनग्रेड्स की वजह से गिरावट आती है। छोटी गिरावट से भी निवेशकों को घाटा हो सकता है। गिरावट का असर NAV पर होता है जिससे रिकवरी मुश्किल हो जाती है और निवेशकों को घाटा सहना पड़ता है।


सवालः क्रेडिट रिस्क फंड कितने रिस्की होते हैं। मैंने SBI Credit Risk Fund में 30 लाख का निवेश किया है। अक्टूबर 2016 में फंड में निवेश किया है। फंड से रिटर्न अच्छा नहीं मिला है। फंड में निवेश जारी रखें या निकालें।


अर्णव पंड्या की सलाहः क्रेडिट रिस्क फंड काफी जोखिम भरे होते हैं। कम क्रेडिट रिस्क वाली सिक्योरिटी में निवेश करना चाहिए। लक्ष्य की तुलना में क्रेडिट रिस्क फंड सही चुनाव नहीं होता है। सिक्योरिटीज से ज्यादा रिटर्न देते हैं। अच्छी रिटर्न ना मिलने पर फंड से निकल सकते हैं।


किसी अच्छे फंड में निवेश कर सकते हैं। SBI Credit Risk Fund फंड का 95.29 प्रतिशत निवेश डेट में करें। लो रिस्क सिक्योरिटी में 66.7 प्रतिशत निवेश किया जा सकता है। बेंचमार्क- क्रिसिल 10 साल गिल्ट। 2 साल की रिटर्न 5.92 प्रतिशत और 5 साल की रिटर्न- 8.41 प्रतिशत है।