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योर मनीः स्मार्ट रिटायरमेंट प्लानिंग से होगी जिंदगी सुखद

प्रकाशित Tue, 21, 2019 पर 13:09  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

योर मनी पर आपको रिटायरमेंट के लिए सही निवेश विकल्प बताएं, उस से पहले रिटायरमेंट का लक्ष्य आंका कैसे जाए, उसे समझना जरूरी है। योर मनी में सीएनबीसी-आवाज़ पर आपके सवालों का जवाब देने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या और मॉर्निगस्टार इन्वेसटमेंट एडवाइजरी के डायरेक्टर धवल कपाड़िया।


सबसे पहले जानते हैं सुखद रिटायरमेंट के लिए क्या करना चाहिए।


1. खर्चों का आंकलन करें


जैसे कि रिटायरमेंट के बाद जारी रहने वाले खर्चों पर ध्यान दें, मौजूदा खर्चों में से रिटायरमेंट के बाद के जारी खर्चों को तवज्जों दें।


2. रिटायरमेंट के बाद कमाई का आंकलन करें


जैसे निवेश, पेंशन, इंश्योरेंस प्लान, PPF - सभी तरह से होने वाली कमाई को देखें।


3. रिटायरमेंट के बाद की आय, निवेश से होनेवाली कमाई से खर्चे निकाल जरूरत का आंकलन करें।


4. रिटायरमेंट के बाद जरूरी कॉर्पस


जैसे उम्र चाहे जो हो, रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू करें


5. रिटायरमेंट कॉर्पस में महंगाई जोड़ें


6. रिटायरमेंट के लिए मौजूदा कॉर्पस कितना है?


7. रिटायरमेंट तक निवेश से कितना जमा होगा?


8. अगर कम पड़ा कॉर्पस तो कैसे जुटाएंगे अतिरिक्त रकम


9. अतिरिक्त रकम जमा करने के लिए हर महीने कितना निवेश जरूरी?


10. अगर मौजूदा निवेश कम, तो क्या रणनीति अपनाएं?


अर्णव पंड्या ने अपनी सलाह में बताया कि NPS में टैक्स छूट कितने काम की है।


NPS में अतिरिक्त 50 हजार की छूट होती है। 80CCD के तहत छूट है। 60 की उम्र में निवेश का 60 प्रतिशत टैक्स फ्री विड्रॉल है। बाकी बचे 40 प्रतिशत का पेंशन प्लान खरीदना अनिवार्य होता है। पेंशन पर स्लैब के मुताबिक टैक्स लगेगा। देर से निवेश करने पर कम कॉर्पस जमा, जिस पर टैक्स ज्यादा लगता है। 60 साल तक के लॉक इन पर पैसों की लिक्विडिटी नहीं है। निवेश के 10 साल के बाद 25 प्रतिशत रकम कुछ शर्तों पर निकाल सकते हैं। इंश्योरेंस कंपनियों के रिटायरमेंट प्लान में पारदर्शिता कम होती है। रिटायरमेंट प्लान में रिटर्न कम और अतिरिक्त टैक्स छूट नहीं होती है।


धवल कपाड़िया की सलाह के अनुसार रिटायरमेंट और निवेश प्लानिंग


निवेश के डायवर्सिफिकेशन से जोखिम घटेगा। अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश करें। जोखिम के मुताबिक हर एसेट क्लास का प्रदर्शन अलग होता है। अलग प्रदर्शन होने से निवेश में घाटे की संभावना कम होती है। NPS से इक्विटी, कॉरपोरेट डेट, सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करना चाहिए। रिटेल निवेशकों के लिए ऑटो चॉइस का विकल्प भी उपलब्ध है।   NPS में उम्र के मुताबिक एसेट एलोकेशन बदलता है।