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एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के Trial Results पर उठे सवाल, मंजूरी मिलने में हो सकती है देरी

ब्रिटिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा डेवलप किए गए कोरोना वैक्सीन के ट्रायल रिजल्ट्स में गड़बड़ी पाई गई है
अपडेटेड Nov 27, 2020 पर 09:38  |  स्रोत : Moneycontrol.com

ब्रिटिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) द्वारा डेवलप किए गए कोरोना वैक्सीन के ट्रायल रिजल्ट्स में गड़बड़ी पाई गई है। कंपनी ने स्वीकार किया है कि इसके मैन्युफैक्चरिंग में गलती हुई है। इससे वैक्सीन के ट्रायल रिजल्ट्स पर सवाल उठ रहे हैं। जिस तरीके से वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल में नतीजों पर पहुंचा गया है और कंपनी ने लोगों को सूचना दी है, उस पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। ये आंशिक परिणाम सोमवार को घोषित किए गए, जो ब्रिटेन और ब्राजील में चल रहे बड़े अध्ययन का हिस्सा हैं। इससे अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या इस वैक्सीन को अमेरिका के साथ दुनिया के दूसरे देश के रेगुलेटर्स मंजूरी देंगे।

एस्ट्राजेनेका ने पिछले सप्ताह कहा कि वैक्सीन की एक डोज लेने वाले समूह पर टीका 90 प्रतिशत तक असरदार है, जबकि जिस समूह को दो डोज दिए गए, उनमें टीका 62 फीसदी तक असरदार दिखा। कुल मिलाकर दवा बनाने वाली कंपनी ने कहा कि टीका 70 फीसदी तक असरदार है। एस्ट्राजेनेका ने बुधवार को एक बयान जारी गलती के बारे में बताया। इससे कुछ दिन पहले कंपनी और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने कहा था कि यह वैक्सीन बेहद प्रभावी है। तब इस बात का उल्लेख नहीं किया गया था कि स्टडी में हिस्सा लेने वाले कुछ लोगों को टीके की दो खुराकों में से पहली वाली में उतनी मात्रा में डोज क्यों नहीं दिया गया, जितना अपेक्षा के अनुसार दिया जाना था।

हाफ डोज ज्यादा कारगर

जिन लोगों को दो फुल डोज दी गई थी, उन लोगों की अपेक्षा वो लोग ज्यादा सुरक्षित पाए गए जिन्हें बेहद कम डोज दी गई थी। अब इस वैक्सीन की विश्वसनीयता पर खतरा मंडराता दिख रहा है। एस्ट्राजेनेका ने घोषणा की थी कि हाफ और फुल डोज लेने वाले लोगों की संख्या 2800 से कम थी। वहीं दो फुल डोज लेने वालों की संख्या 8900 थी। विशेषज्ञ यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर छोटी डोज और बड़ी डोज के चलते नतीजों में इतना बड़ा अंतर क्यों दिखाई दे रहा है। एस्ट्राजेनेका की रिसर्च एंड डेवलपमेंट के एक्जेक्यूटिव मेनेलास पेंगालोस ने कहा, कंपनी ने हाफ डोज देने की तैयारी नहीं की थी, लेकिन गलती से ऐसा हो गया। उन्होंने इस गलती को अपने लिए फायदेमंद बताया और कहा कि इस गड़बड़ी ने उन्हें काफी पॉजिटिव नतीजे मिले हैं। 

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