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भारत और ताइवान के साथ विवाद के चलते नाटो के रडार पर आया चीन

नाटो में अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि बेली हचिसन ने बताया कि चीन की गतिविधियों पर नाटो द्वारा नजर रखी जा रही है।
अपडेटेड Jun 19, 2020 पर 20:28  |  स्रोत : Moneycontrol.com

चीन के अपने पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद पर पूरी दुनिया की निगाहें लगी हुई हैं। भारत के साथ हालिया विवाद के बाद अब चीन नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) के रडार पर आ गया है। नाटो में अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि बेली हचिसन ने बताया कि चीन की गतिविधियों पर नाटो द्वारा नजर रखी जा रही है।


नाटो सदस्यों की ऑनलाइन बैठक गुरूवार को संपन्न हुई जिसके बाद मीडिया से बात करते हुए हचिसन ने कहा कि चीन क्या कर रहा है इसका विश्लेषण नाटो ने शुरु कर दिया है। चीन द्वारा पिछले कुछ महीनों में ताइवान, जापान और भारत के विरोध में की गई आक्रामक कार्रवाईयों के आधार पर चीन से खतरा और चीन की तरफ से क्या उम्मीद की जा सकती है इसका विश्लेषण करना जरूरी है।


उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक व्यवस्था में चीन को भागीदार बनाने की अमेरिकी की स्पष्ट इच्छा है। तुलनात्मक रूप से स्पर्धा करने की चीन की क्षमता हमें ज्ञात  है और हम चीन से ऐसी स्पर्धा करने को कहते भी हैं परंतु चीन के फिलहाल दक्षिण चीन समुद्र में बर्ताव को देखने के बाद हमें सावधानी बरतना जरूरी हो गया है ऐसा हचिसन ने स्पष्ट किया।


इस बीच लद्दाख में चीन द्वारा की गई घुसपैठ के विरोध में अमेरिका के प्रभावशीली थिंकटैंक ने भारत और अमेरिका को सावधान रहने की सलाह दी है। दक्षिण एशिया में भारत के बढ़ते कदम को सीमित करने और भारत एवं अमेरिका की मैत्रीपूर्ण संबंधों को खराब करने का प्रयत्न चीन की तरफ से शुरू किया गया है यह दावा अमेरिका थिंकटैंक ने किया है। महाराष्ट्र टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक ये दावा हडसन इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट में किया गया है।


रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पाकिस्तान के साथ अच्छी दोस्ती और श्रीलंका के साथ अच्छे संबंध चीन के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। चीन राजनीतिक और आर्थिक फायदे के लिए फिलहाल पूरे विश्व में फैली हुई महामारी को मौके के रूप में उपयोग कर रहा है।


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