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चीन की नई चाल, भारत को BRI प्रोजेक्ट में सहभागी होने का दिया ऑफर

चीन ने भारत को BRI का प्रस्ताव दिया गया है। उसमें कहा गया है कि चीन के प्रस्तावित BRI प्रोजेक्ट के कारण भारत को आर्थिक रूप से फायदा होगा।
अपडेटेड Jun 03, 2020 पर 10:43  |  स्रोत : Moneycontrol.com

चीन ने लद्दाख सीमा पर भारत से तनाव के बीच नई चाल चलते हुए भारत के सामने आर्थिक तरक्की के लिए चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट में शामिल होने का ऑफर दिया है। उसका कहना है कि इससे भारत को आर्थिक रूप से फायदा होगा जबकि बीआरआई चीन का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है।


चीन के लद्दाख सीमा पर हजारों सैनिकों को तैनात करने के बाद भारत के सैनिकों की तरफ से प्रतिरोध के बाद चीन ने इस तनाव को कम करने और भारत से संबंध सुधारने के लिए भारत को बीआरआई का प्रस्ताव दिया है। चीन का कहना है कि बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) भारत की आर्थिक तरक्की के लिए काफी अवसर उपलब्ध करायेगा।


चीन सरकार के ग्लोबल टाइ्म्स में छपे लेख के अनुसार चीन ने भारत को BRI का प्रस्ताव दिया गया है। उसमें कहा गया है कि चीन के प्रस्तावित BRI प्रोजेक्ट के कारण भारत को आर्थिक रूप से फायदा होगा। BRI प्रोजेक्ट का उद्देश्य देश और संबंधित क्षेत्रों का विकास करना है।


लेख में आगे कहा गया है कि बुनियादी सुविधाओं में निवेश करने के बाद BRI प्रोजेक्ट से भारत को बड़े अवसर उपलब्ध होंगे और भारत में विदेशी निवेश बढ़ेगा। इसलिए भारत के औद्योगिक विकास के लिए ये निवेश काफी महत्वपूर्ण साबित होगा।


महाराष्ट्र टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक चीन ने कहा है कि पिछले कुछ सालों से भारत की इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है। लेकिन बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त रूप से विकसित नहीं होने के कारण उसकी तरक्की में अड़चन आ रही है। भारत ने 1991 से आर्थिक सुधार किये हैं परंतु आर्थिक संकट, व्यापार नुकसान, महंगाई का संकट भी है।


चीन ने आगे कहा कि यदि भारत बीआरआई प्रोजेक्ट में निवेश करता है तो बड़े पैमाने पर उसकी समस्याएं दूर हो जायेंगी। कोरोना संकट के बाद सभी देश आर्थिक विकास के लिए प्रयास करने वाले हैं। इसलिए हिंद महासागर और अगल-बगल का परिसर बीआरआई प्रोजेक्ट के लिए उपयुक्त है।


इस बीच भारत ने इसके पहले ही बीआरआई प्रोजेक्ट में सहभागी होने का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया था। भारत का कहना है कि चीन का ये प्रोजेक्ट भारत की संप्रभुता और सार्वभौमिकता के लिए खतरा है। चीन ने पाकिस्तान के साथ मिल कर इकोनॉमिक कोरीडोर का प्रोजेक्ट शुरु किया है जिसका भारत ने विरोध किया है। इस कोरीडोर का रास्ता पाक द्वारा कब्जा किये गये कश्मीर के गिलगिट-बाल्टिस्तान से होकर गुजरता है।


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