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चीनी Virologist ने सबूतों के साथ किया खुलासा, वुहान लैब में बनाया गया कोरोना वायरस

डॉक्‍टर यान ने कहा कि कोरोना वायरस को दो चमगादड़ों के जेनेटिक मैटेरियल को मिलाकर तैयार किया गया है
अपडेटेड Sep 16, 2020 पर 17:04  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कोरोना वायरस (CoronaVirus) को लेकर चीन की महिला वायरोलॉजिस्ट (Chinese virologist) डॉ. ली-मेंग यान (Dr. Li-Meng Yan) ने एक बड़ा खुलासा किया है। यान का कहना है कि कोरोना को वुहान की लैब में बनाया गया है। इसका उन्होंने सबूत भी पेश किए हैं। यह लैब सरकारी नियंत्रण में है। हॉन्‍ग कॉन्‍ग स्‍कूल ऑफ पब्लिक हेल्‍थ में रिसर्च कर चुकीं डॉक्‍टर यान ने कहा कि कोरोना वायरस को दो चमगादड़ों के जेनेटिक मैटेरियल को मिलाकर तैयार किया गया है।


डॉक्‍टर यान ने कहा कि कोरोना वायरस के स्‍पाइक प्रोटीन को बदलकर उसे आसान बनाया गया ताकि वह ह्यूमन सेल में चिपककर बैठ जाए। हालांकि उनके इस दावे को अन्य वैज्ञानिकों ने सिरे से खारिज कर दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस का जन्म चमगादड़ों से हुआ है। इसे इंसानों के लिए बनाए जाने के कोई सबूत नहीं है।


डॉक्टर यान ने कहा कि कोरोना वुहान के मीट मार्केट से नहीं आया है, क्योंकि यह मीट मार्केट एक स्मोक स्क्रीन है और यह वायरस प्रकृति की देन नहीं है। यान ने दावा किया कि उन्हों स्थानीय डॉक्टरों और कुछ खुफिया जानकारी के जरिए यह पता चला है कि वायरस मीट मार्केट में नहीं पैदा हुआ, बल्कि उसे बनाया गया है। उन्होंने कहा कि जीनोम सीक्वेंस मानव फिंगर प्रिंट जैसा है। इस आधार पर इसकी पहचान की जा सकती है। किसी भी वायरस में मानव फिंगर प्रिंट की उपस्थिति यह बताने के लिए काफी है कि इसकी उत्पत्ति मनुष्य द्वारा की गई है।


डॉ. यान ने दावा किया कि उनकी जानकारी चीन के डेटाबेस से हटा दी गई है। उनके साथियों को उनके बारे में झूठी खबरें फैलाने के लिए कहा है। उनका कहना है कि कोरोना वायरस की स्टडी करने वाले पहले वैज्ञानिकों में वो भी शामिल थीं। उन्होंने कहा कि अगर चीन सही समय पर इसे पूरी दुनिया को बता देता तो इसे काबू किया जा सकता था।



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