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Coronavirus: वैक्सीन की ह्यूमन टेस्टिंग सफल होने का अमेरिकी कंपनी का दावा

क्लीनिकल टेस्टिंग के दौरान अमेरिका में 18 से 50 साल आयुवर्ग के 40 लोगों को वैक्सीन दी गई थी।
अपडेटेड Jul 02, 2020 पर 12:08  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कोरोना की वैक्सीन बनाने के लिए पूरा विश्व इस समय एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। कई देशों के वैज्ञानिक युद्ध स्तर पर कोरोना को ठीक करने वाली वैक्सीन ईजाद करने के लिए दिन-रात एक किये हुए हैं। ऐसे में अमेरिका की एक कंपनी ने अपने द्वारा बनाई गई वैक्सीन की ह्यूमन टेस्टिंग सफल होने का दावा किया है। अमेरिका की बायोटेक फर्म इनोवेटिंव ने दावा किया है उसकी वैक्सीन की टेस्टिंग 94 प्रतिशत सफल रही है।


इनोवेटिव कंपनी द्वारा बनाई गई आईएनओ-4800 नाम की वैक्सीन की टेस्टिंग 40 लोगों पर की गई है और ये टेस्टिंग 94 प्रतिशत सफल होने का दावा कंपनी ने किया है। क्लीनिकल टेस्टिंग के दौरान अमेरिका में 18 से 50 साल आयुवर्ग के 40 लोगों को वैक्सीन दी गई थी।


इन 40 लोगों को हफ्ते में 2 बार ये वैक्सीन दी गई। इस वैक्सीन के कारण उनकी रोग प्रतिकार क्षमता बढ़ी और इस टेस्टिंग के दौरान वैक्सीन का कोई भी दुष्परिणाम दिखाई नहीं दिया ऐसा दावा कंपनी ने किया है।


इनोवेटिव कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष केट ब्रॉडरिक ने कहा कि 10 जनवरी को चीन के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस का जेनेटिक कोड प्रकाशित किया था। उसके आधार पर कंपनी ने फॉर्मूला तैयार किया। ये डीएनए वैक्सीन कोरोना के वायरस के स्पाइक प्रोटीन की पहचान करके उसी प्रकार की प्रोटीन का निर्माण करते हुए कोरोना वायरस को निष्क्रिय करती है।


केट ने आगे कहा कि स्पाइक प्रोटीन के कारण मनुष्य के शरीर की रोग प्रतिकार क्षमता बढ़ेगी। वैक्सीन के कारण स्पाइक प्रोटीन पैदा होने से शरीर उसको वायरस समझकर और एंटीबॉडी तैयार करेगा। लेकिन इस प्रोटीन से शरीर का कोई भी नुकसान नहीं होगा पर कोरोना वायरस का खात्मा जरूर होगा। उन्होंने कहा कि अब जल्दी ही वैक्सीन की दूसरे और तीसरे चरण की टेस्टिंग शुरू होगी।


महाराष्ट्र टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक फिलहाल विश्व भर में 120 से अधिक कंपनियों द्वारा वैक्सीन बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें से 13 वैक्सीन क्लीनिकल टेस्टिंग के चरण में हैं। इसमें चीन की कंपनियों द्वारा बनाई गई वैक्सीन की संख्या सबसे अधिक है। इस समय चीन में 5, इंग्लैंड में 2, अमेरिका में 3, रूस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया में एक-एक वैक्सीन क्लीनिकल जांच के चरण में है।


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