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NASA के JWST ने पास किया अंतिम टेस्ट, दुनिया के सबसे बड़े टेलीस्कोप से खुलेंगे ब्रह्मांड के गहरे राज

वेब के 18 हेक्सागोनल मिरर को अंतरिक्ष में लंबी यात्रा और गहन खोज के लिए अब भेजा जा सकता है
अपडेटेड May 13, 2021 पर 07:40  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA द्वारा बनाए गए दुनिया के सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली अंतरिक्ष टेलीस्कोप जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space Telescope) ने प्रक्षेपण से पहले अपने फाइनल टेस्ट को पास कर लिया है। इस टेस्ट के दौरान टेलीस्कोप के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से यानी उसके गोल्डन मिरर पृथ्वी पर आखिरी बार समेट कर बंद कर दिया गया है।


इस टेस्ट के दौरान वेब टेलीस्कोप एक 6.5 मीटर बड़े आइने (Giant mirror of Telescope) को पूरी तरह से खोला गया और फिर वापस सुरक्षित तरीके से समेट कर बंद कर दिया गया, जिसके बाद अब उसके प्रक्षेपण का रास्ता साफ हो गया है। दरअसल अब से पहले JWST का प्रक्षेपण कई बार टल चुका है।


इस परीक्षण का निष्कर्ष ये निकला कि वेब के 18 हेक्सागोनल मिरर को अंतरिक्ष में लंबी यात्रा और गहन खोज के लिए अब भेजा जा सकता है और ये अब पूरी तरह से तैयार है। इसके अलावा JWST के दूसरे हिस्सों की भी टेस्टिंग की गई, जिसमें वो सफल रहा।


नॉर्थरोप ग्रूमैन के स्कॉट विलोबी ने बताया कि ये एक 50 फुट लंबी स्विच घड़ी बनाने जैसे है, जिसे तैयार करने के लिए हमने उसे निर्वात में -240 डिग्री सेल्सियम के तापमान में रखा, जिसे चंद्रमा से चार गुना ज्यादा दूरी पर स्थापित होना है। टेलीस्कोप को इन्होंने ही तैयार किया है।


जानकारी के मुताबिक, इस टेलीस्कोप को प्रक्षेपित करने के लिए फ्रेंच गुयाना ले जाया जाएगा, जहां पर टेलीस्कोप को एरिएन 5 रॉकेट के जरिए 31 अक्टूबर को प्रक्षेपित किया जाएगा।


टेलीस्कोप के 18 हेक्सागोनल मिरर एक कर बंद होकर एक रॉकेट के अंदर फिट हो जाएंगे और बाद में अंतरिक्ष में पहुंचने पर एक कर वापस से खुलेंगे और इन 18 मिरर से मिलकर JWST का एक बड़ा मिरर बनेगा। इसकी मदद से अंतरिक्ष की गहराई के बारे में अध्ययन करने में मदद मिलेगी।


वैज्ञानिक इस टेलीस्कोप का इस्तेमाल 13.5 अरब साल पहले के समय की घटनाओं को देखने लिए करना चाहते हैं, जिसमें वो जानना चाहते हैं कि पहली बार तारों और गैलेक्सी का निर्माण हुआ था? इसलिए वैज्ञानिकों ने इतना बड़ा टेलीस्कोप बनाया है, जो ब्रह्माण्ड से आने वाले इंफ्रारेड रेडिएशन की पहचान करेगा।


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