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तालिबान ने अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में लड़कियों का लड़कों के साथ पढ़ने पर लगाया प्रतिबंध

अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान द्वारा जारी किया गया यह पहला फतवा है
अपडेटेड Aug 22, 2021 पर 14:25  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Afghanistan-Taliban crisis Live Updates: अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करने की कसम खाने के कुछ दिनों बाद तालिबान की ओर से लड़कियों की पढ़ाई को लेकर एक फतवा जारी कर दिया गया है। अफगानिस्तान के अशांत हेरात प्रांत में तालिबान के अधिकारियों ने सरकारी और प्राइवेट विश्वविद्यालयों को आदेश दिया है कि लड़कियों को अब लड़कों के साथ एक ही क्लास (Co-Education) में नहीं बैठने दिया जाएगा।


खामा प्रेस न्यूज एजेंसी ने शनिवार को बताया कि विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों, प्राइवेट संस्थानों के मालिकों और तालिबान अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों, प्राइवेट संस्थानों के मालिकों और तालिबान अधिकारियों के बीच तीन घंटे की बैठक में कहा गया कि सह-शिक्षा (Co-Education) जारी रखने का कोई विकल्प और औचित्य नहीं है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए।


पिछले हफ्ते अफगानिस्तान पर  कब्जा करने के बाद तालिबान द्वारा जारी किया गया यह पहला फतवा है। अफगानिस्तान में सह-शिक्षा और अलग-अलग कक्षाओं का मिक्स सिस्टम है, जिसमें अलग-अलग क्लास संचालित करने वाले स्कूल हैं, जबकि देश भर के सरकारी और प्राइवेट विश्वविद्यालयों और संस्थानों में सह-शिक्षा लागू की जाती है।


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हेरात प्रांत के प्रोफेसरों ने तर्क दिया है कि सरकारी विश्वविद्यालय और संस्थान अलग-अलग कक्षाओं का प्रबंधन कर सकते हैं, लेकिन प्राइवेट संस्थानों में महिला छात्रों की सीमित संख्या के कारण अलग-अलग कक्षाओं का बंदोबस्त नहीं कर सकते।


अफगानिस्तान इस्लामिक अमीरात के उच्च शिक्षा प्रमुख मुल्ला फरीद, जो हेरात में हुई बैठक में तालिबान का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, ने कहा है कि सह-शिक्षा को समाप्त किया जाना चाहिए क्योंकि व्यवस्था समाज में सभी बुराइयों की जड़ है।


फरीद ने एक विकल्प के रूप में सुझाव दिया कि महिला लेक्चरर या बुजुर्ग पुरुष जो गुणी हैं, उन्हें महिला छात्रों को पढ़ाने की अनुमति है और सह-शिक्षा के लिए न तो कोई विकल्प है और न ही कोई औचित्य है।


हेरात में शिक्षाविदों ने कहा कि चूंकि प्राइवेट संस्थान अलग-अलग क्लास का खर्च नहीं उठा सकते हैं, इसलिए हजारों लड़कियां उच्च शिक्षा से वंचित रह सकती हैं। आपको बता दें कि आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, हेरात प्रांत में प्राइवेट, सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लगभग 40,000 छात्र और 2,000 लेक्चरर हैं।


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