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अमेरिका की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, पाकिस्तान में नहीं है फिस्कल ट्रांसपैरेंसी

अमेरिकी की 2020 Fiscal Transparency Report में पाकिस्तान, सउदी अरब, सूड़ान और चीन जैसे देश शामिल हैं
अपडेटेड Jun 16, 2020 पर 18:10  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पाकिस्तान में फाइनेंशियल मामलों की ट्रांसपैरेंसी कैसी है, इसका अमेरिका की एक रिपोर्ट में खुलासा हो गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान फिस्कल ट्रांसपैरेंसी (fiscal transparency) की कम से कम जरूरतों को पूरा नहीं करता है। इसके अलावा ये भी कहा गया है कि जो भी लोन दिया जाता है, उसका कोई खुलासा नहीं किया जाता है। इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 60 अरब डॉलर की चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (China-Pakistan Economic Corridor- CPEC) प्रोजेक्ट के तहत सरकारी कंपनियों को दिए जाने वाले फाइनेंस को लेकर कोई खुलासा नहीं कि गया है।


CPEC पाकिस्तान सरकार का एक खास प्रोजेक्ट है। जिसमें सड़क, रेलवे और बिजली प्रजोक्ट्स का सुनियोजित तरीके से नेटवर्क खड़ा किया जाएगा। इसके तहत चीन के ऊघुर (Uyghur) एरिया को पाकिस्तान के अहम ग्वादर पोर्ट (Gwadar Port) से जोड़ा जाएगा। पाकिस्तान का यह पोर्ट अरब सागर में स्थित है। चीनी राष्ट्रपति शीजिनपिंग (Xi Jinping) जब पाकिस्तान में एक दौरे पर आए थे, तभी से इस प्रोजेक्ट को लॉन्च का गया था। यह शी के अरबों डॉलर की Belt and Road Initiative (BRI) का एक अहम हिस्सा है।  


अमेरिकी के विदेश विभाग ने सोमवार को जारी अपनी 2020 Fiscal Transparency Report में पाकिस्तान भी उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जहां फाइनेंशियल ट्रांसपरेंसी की जरूरतों को पूरा नहीं किया जाता है। दक्षिण एशिया (south Asia) के देशों में बांग्लादेश का नाम शामिल है। इसके अलावा पूरी लिस्ट में सउदी अरब (Saudi Arabia), सूड़ान (Sudan) और चीन (China) जैसे देश शामिल हैं।


यह रिपोर्ट दुनिया भर के 141 देशों में स्टडी करके बनाई गई है। जिसमें भारत समेत 76 देश फाइनेंशिल ट्रांसपैरेंसी के मामले में न्यूनतम जरूरतों को पूरा करते हैं। 


अमेरिका ने CPEC प्रोजेक्ट की कड़ीनिंदा की है। उसका कहना है कि इसमें किसी भी प्रकार की कोई ट्रांसपैरेंसी नहीं है। वर्ल्ड बैंक ने जिन कंपनियों को ब्लैक लिस्ट किया था, पाकिस्तान ने उन्हीं कंपनियों को ठेका दिया गया। इससे पाकिस्तान के ऊपर कर्ज का बोझ बढ़ेगा। हालांकि इस पर पाकिस्तान ने अमेरिका के निंदा बयान को खारिज करते हुए कहा है कि इस प्रोजेक्ट से पाकिस्तान में जो लिक्विडिटी (नकदी), नए रोजगार की कमी थी, उसको पूरा करने में मदद मिली है।


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