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COVID-19 ने याद दिलाए निवेश के ये गुरुमंत्र, इनका हमेशा रखें ध्यान

COVID-19 महामारी हमारे जीवन में कुछ ऐसे घाव लेकर आई है जो मानव जाति के इतिहास पर अमिट छाप छोड़कर जायेगी।
अपडेटेड Apr 27, 2020 पर 09:29  |  स्रोत : Moneycontrol.com

निशांत कुमार


COVID-19 महामारी हमारे जीवन में कुछ ऐसे घाव लेकर आई है जो मानव जाति के इतिहास पर अमिट छाप छोड़कर जायेगी। हालांकि अतत: हमें  इससे निजात मिलेगी लेकिन ये हमें ऐसे सबक सीखा कर जायेगी जिनकी कभीउपेक्षा नहीं की जा सकती ।


निवेशकों की दुनिया में आम तौर पर कहा जाता है कि बाजार की गिरावट में अच्छे शेयरों में खरीद का मौका मिलता है, ये मंत्र कोरोना काल में भी उपयोगी है लेकिन उसके अलावा भी कई सूत्र हैं जिनको हमें अपनी निवेश यात्रा में ध्यान रखना चाहिए।


जैसे समय-समय पर अपने निवेश की समीक्षा करते रहें। अपने सारे अंडे एक ही टोकरी ना रखें। निवेशको के बीच ये बहुत ही प्रसिद्ध कहावत है। ये एक सफल निवेशक बनने के लिए अहम रुल है लेकिन केवल निवेश का डायवर्सिफेकेशन तब तक आपकी सहायता नहीं करेगा जब तक आप समय-समय पर अपने निवेश की समीक्षा और उसकी रीबैलेसिंग नहीं करते।


समय-समय पर अपने एसेट एलोकेशन की समीक्षा और रीबैलेसिंग करके आप अपने मुनाफे को बढ़ा सकते हैं। इस प्रक्रिया के जरिए आप कम मुनाफे वाले या घाटे वाले स्टॉक्स से निकलकर अधिक रिटर्न देने वाले स्टॉक्स में अपना निवेश ट्रांसफर करते हैं उससे बेहतर रिटर्न की उम्मीद बनती है।


इक्विटी मार्केट में निवेश के साथ सदैव अनिश्चितता और जोखिम जुड़ा रहता है लेकिन अगर हम डर और लालच की भावाना से उबरकर सही निर्णय ले तो जोखिमों से बच सकते हैं।


HDFC Securitie के हेड ऑफ रिसर्च दीपक जसानी का कहना है कि बाजार के मुश्किल दौर में मीडिया और फंड मैनेजरों पर बहुत ज्यादा निर्भर ना करें। मुश्किल दौर में सरकार और रेग्यूलेटरी अथॉरिटी समान्य तौर पर डर और भ्रम की स्थिति को दूर करने की कोशिश करती है। ऐसे समय में हमें उनकी बातों को भी सावधानी और सर्तकता से लेना चाहिए।


उन्होंने आगे कहा कि इस स्थिति में हमें अपने भावनाओं पर नियंत्रण रखने की जरुरत होती है। निवेशकों को भेंड़ चाल से बचना चाहिए। बाजार में किसी रैली या करेक्शन के दौरान निवेशक बाजार का ट्रेंड जानने के लिए एक्सपर्ट्स के पास भागते हैं क्योंकि निवेश का मुख्य लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमना और घाटे को कम से कम रखना है। बाजार में गिरावट के दौर में अक्सर निवेशक पेनिक सेलिंग करने लगते है लेकिन यह ध्यान रखने की बात है कि पेनिक सेलिंग और सोच-समझकर लिए गए एक अच्छे निर्णय के बीच में बहुत पतली सी रेखा होती है।


हमें बाजार के इस मुश्किल दौर में चालू ट्रेंड को समझते हुए विवेकपूर्ण तरीके से निर्णय लेनें चाहिए। उदाहरण के लिए पिछले कुछ दिनों के दौरान बाजार के कई पंडित ये दावा कर रहे थे कि अभी हमें और गिरावट देखने को मिलेगी लेकिन हमें उसका उल्टा देखने को मिला। बाजार ने मजबूती दिखाते हुए ऊपर का रुख पकड़ा।


निवेशकों के लिए धैर्य, विवेक और आशावाद की जरुरत होती है लेकिन अतिआशावादी होना भी कभी-कभी सही रणनीति नहीं होती। COVID-19 के आउटब्रेक के दौरान बहुत से निवेशकों का सोचना था कि कुछ सेक्टर पर इसका बहुत कम असर पड़ेगा और इन सेक्टर से जुड़े शेयरों में बहुत कम बिकवाली देखने को मिलेगी लेकिन इस संकट के दौरान हमें देखने को मिला कि शेयरों में आई बिकवाली बहुत व्यापक थी और केवल कुछ ही शेयर इस आंधी में अपने को संभाल सके।


Reliance Securities के ईडी और सीईओ लव चतुर्वेदी ने कहा कि अधिकतर मामलों में अतिआशावाद फायदेमंद नहीं होता। अमेरिकन और भारतीय बेंचमार्क सूचकांक अभी भी फरवरी 2020 के अपने उच्चतम स्तर से क्रमश: करीब 18 और 24 फीसदी नीचे नजर आ रहे हैं। इसको देखते हुए हमारा मानना है कि COVID-19 संकट से निपटने के किसी पक्के उपाय की अनुपस्थिति में बाजार में आई हालिया रैली एक रिलीफ रैली ही है। हम कह सकते है कि किसी निवेशक के लिए आशावादी होना अच्छी बात है किंतु अंधा और अतार्किक आशावाद हमारे निवेश की वैल्यू घटा सकता है।


कोरोना वायरस की इस आंधी ने इस मिथक पर भी गहरा आघात किया है कि ब्लूचिप और दिग्गज कंपनियों के शेयर फॉलप्रूफ होते है। Finology के सीईओ प्राजंल कामरा का कहना है कि कौन कहता है कि ब्लूचिप और दिग्गज कंपनियों के शेयर फॉलप्रूफ होते है। ये सोचना पूरी तरह गलत  है कि बाजार में कोई पूरी तरह से फॉलप्रूफ  है। अगर ये सही होता तो सभी ऐतिहासिक ब्लूचिप कंपनियां बाजार में होती और उनमें मजबूती बनी रहती।


कामरा ने बताया कि ऐसी 22 कंपनियां जो 2008 में निफ्टी का हिस्सा थी अब वो वहां नहीं है। इसमें से कई कंपनियां या तो दिवालिया हो गई है या उनका दीवाला पिटने के कगार पर है।


इस मत का समर्थन करते हुए Angel Broking हेड एडवाइजरी अमर देव सिंह ने कहा कि ब्लूचिप शेयरों के फॉलप्रूफ होने की भावना बिलकुल गलत है। बाजार बदलता है और उसी के हिसाब से स्ट़ॉक्स भी बदलते हैं। आज का ब्लूचिप कल का पेनी स्टॉक भी बन सकता है। निवेशकों को सलाह है कि वह निवेश करते समय क्वालिटी और ग्रोथ पर फोकस करें और शेष चीजें अपने आप ठीक हो जाएंगी।


किसी के निवेश का तरीका दूसरे  से भिन्न हो सकता है किंतु निवेश के मूल सिद्धांत कभी नहीं बदलते।  COVID-19 हमें निवेश के मूल सिद्धांतों को एक बार फिर अमल में लाने और उन्हें ध्यान में रखने का पाठ पढ़ा रहा है


बाजार गिरावट के दौर से गुजर रहा है सिर्फ इसलिए अपने दीर्घाअवधि निवेश के लक्ष्यों में बदलाव ना करें। आपको लगातार यह बात ध्यान में रखने की जरुरत है कि आपने इन स्टॉक्स में क्यों निवेश किया था।





मनीकंट्रोल डॉटकॉम पर इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट द्वारा रखें गए विचार और निवेश सलाह उनके अपने है। ये विचार और राय वेबसाइट या प्रबंधन के नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई निवेश निर्णय लेते समय सर्टिफाइड  एक्सपर्ट की सलाह लें।





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