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दिवाली स्पेशल: दिग्गजों के समृद्धि के मंत्र

प्रकाशित Fri, 02, 2018 पर 13:39  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दिपावली के मौके पर सीएनबीसी-आवाज़ की कोशिश होती है कि देश के जाने-माने मार्केट एक्सपर्ट्स से ये जानने की कोशिश की जाए की दिवाली से दीवाली तक बाजार की दशा और दिशा क्या होगी और कौन से शेयर और सेक्टर आपको बनाएंगे मालामाल। सीएनबीसी-आवाज़ से साथ आज की इस चर्चा में शामिल हो रहे हैं। कोटक एएमसी के नीलेश शाह, एसबीआई एमएफ के नवनीत मुनोत, क्रेस्ट कैपिटल के विक्रम कोटक और रिलायंस एमएफ के मनीष गुनवानी।


नीलेश शाह का कहना है कि पिछले 20 साल से एफआईआई खरीद रहे थे, घरेलू निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे थे। 20 साल से बाजार का रुख ऊपर की तरफ ही रहा। घरेलू निवेशक की एफआई से तुलना ना करें। अब भारतीय बाजार कम आकर्षक हुए हैं जिससे एफआईआई की नजर दूसरे बाजारों की ग्रोथ पर है। भारतीय बाजार के मुकाबले दूसरे बाजार आकर्षक हैं। घरेलू निवेशक अपने एसेट एलोकेशन पर ध्यान दें।


नवनीत मुनोत का कहना है कि घरेलू निवेशकों का इक्विटी में निवेश बढ़ा है। निवेशक एसआईपी, पेंशन फंड्स के जरिए निवेश बढ़ा रहे हैं। 2009-14 तक घरेलू निवेशकों ने बिकवाली की। 2009-14 के बीच एफआई ने निवेश किया। बाजार में एफआईआई के मुकाबले घरेलू निवेश काफी कम है। आज भी एफआईआई का 19-20 फीसदी निवेश है। नवनीत मुनोत का कहना है कि इस समय फाइनेंशियल सेक्टर में काफी मौके हैं। मजबूत बैंकों के पास भी ग्रोथ के काफी मौके हैं। रिटेल, कॉरपोरेट लोन वाले बैंक आगे अच्छा करेंगे।


एनबीएफसी संकट पर विक्रम कोटक का कहना है कि जिनको पैसा नहीं चाहिए उनके लिए फंड उपलब्ध, जिनको पैसा चाहिए उनके लिए फंड उपलब्ध नहीं है। 10 सालों में एनबीएफसी में तेजी से ग्रोथ हुई है। लोन देने में एनबीएफसी का 18 फीसदी योगदान है। एनबीएफसी में सुस्ती का असर इकोनॉमी पर पड़ेगा। एनबीएफसी इकोनॉमी के लिए अहम हैं।


मनीष गुनवानी का कहना है कि एनबीएफसी इकोनॉमी के लिए जरूरी हैं। गोल्ड फाइनेंस, शॉर्ट टर्म लोन में बैंकों की भूमिका कम है। कुछ सेगमेंट के लिए एनबीएफसी की जरूरत है। मनीष गुनवानी का कहना है कि एनबीएफसी की दिक्कतों का असर बिल्डर फाइनेंसिंग और रियल एस्टेट सेक्टर पर दिखेगा।


नीलेश शाह की सलाह की एनबीएफसी में निवेश का मौका है। खराब सेंटीमेंट के बाद निवेश के बेहतर मौके हैं। अच्छी एनबीसी में निवेश कर सकते हैं। जिन एनबीएफसी में दिक्क्तें नहीं, वहां पैसा बनेगा। खराब एनबीएफसी में निवेश से बचें।


लिक्विडिटी संकट पर विक्रम कोटक का कहना है कि इसका रियल एस्टेट की फंडिंग पर असर पड़ेगा। फंडिंग का असर कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर भी दिखेगा क्योंकि कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में एनबीएफसी का अहम योगदान है। ऑटो पर महंगे ईंधन, ब्याज दरें बढ़ने का असर पड़ेगा।


कंज्म्पशन थीम पर बात करते हुए नीलेश शाह ने कहा कि महंगे वैल्युएशन से कंज्म्पशन सेक्टर पर दबाव है। लिक्विडिटी बढ़ने से स्थिति में सुधार आएगा हालांकि रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली चीजों पर दबाव नहीं हैं।