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मार्केट Covid-19 की नई लहर से डरा,क्यों नहीं इस बिकवाली से डरना चाहिए, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्टस

मार्च के शुरूआत से ही भारतीय बाजार में जोरदार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है.
अपडेटेड Apr 13, 2021 पर 09:39  |  स्रोत : Moneycontrol.com

देश के तमाम राज्यों में कोरोना के नए मामलों के मिलने शुरू होने के साथ मार्च के शुरूआत से ही भारतीय बाजार में जोरदार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।


पिछले 24 घटों में देश भर में कोरोना के  1,68,912 नए मामले मिले हैं। भारत इस समय कोरोना के मामले में अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर आ गया है। कोविड-19 ने एक बार फिर निवेशकों को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है। फिलहाल सेंसेक्स 1600 अंक से ज्यादा टूटकर कारोबार कर रहा है। वहीं, निफ्टी 500 अंक से ज्यादा गिरकर 14,350 के नीचे फिसल गया है।


आज बाजार में आई जोरदार बिकवाली इस बात का संकेत है कि निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हो गए हैं कि अगर कोरोना जल्द कंट्रोल में नहीं आया तो इकोनॉमिक रिकवरी और मजबूत कंपनी नतीजों की उम्मीद पर पानी फिर जाएगा।


CapitalVia Global Research के गौरव गर्ग का कहना है कि कई राज्य सरकारों ने लॉकडाउन लगा दिया है जिससे बजार में घबराहट फैल गई है और हमें बिकवाली देखने को मिल रही है। सभी सपोर्ट लेवल टूट गए हैं और बाजार बहुत ज्यादा मंदी के मूड में चला गया है। निवेशकों को सलाह है कि वे कोई नई पोजीशन लेते समय सतर्क नजरिया बनाए रखें। स्थितियों में अनिश्चितता के चलते उम्मीद है कि बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।


बाजार जानकारों का कहना है कि 2021 भी 2020 की तरह नहीं होगा। 2020 की तरह इस बार केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से कोई बड़ा लॉकडाउन नहीं घोषित किया जाएगा। वैक्सीन की उपलब्धता के साथ ही सरकार इस बार संकट से निपटने के लिए ज्यादा बेहतर तरीके से तैयार नजर आ रही है।


वित्तीय मोर्चे पर देखें तो सरकार के पास वर्तामान में देनें को लिए खास कुछ नहीं है। सरकार इकोनॉमी को प्रोत्साहन देनें के लिए पहले ही जो करना था कर चुकी है।


आसान शब्दों में कहें तो सरकार लंबी अवधि के लिए लॉकडाउन लगाने की स्थिति में नहीं है। लॉक डाउन लगेगा भी तो कुछ खास पॉकेट में लगेगा। इसके अलावा स्थिति के बहुत ज्यादा बिगड़ जाने पर अगर कोई लॉकडाउन लगता भी है तो वह बहुत लंबी अवधि का नहीं होगा।


Equinomics Research & Advisory Private Limited के G Chokkalingam (जी चोक्कालिंगम) का कहना है कि केंद्र सरकार शॉर्ट टर्म  में कर्ज लेकर इकोनॉमी को बूस्ट करने की अपनी सारी वित्तीय क्षमता का उपयोग कर चुकी है। अधिकांश राज्य सरकारों की बॉरोइंग भी रिकॉर्ड स्तरों पर है। अगर सरकार कोरोना से निपटने के लिए इकनॉमिक ओर सामाजिक गतिविधियों पर  प्रतिबंध लगाने की नीति अपनाती है तो उसको इकोनॉमी को बूस्ट देने के लिए पैसे जुटाने में बड़ी मुश्किल का सामना  करना पड़ सकता है।


उस स्थिति में जब इकोनॉमी धीरे-धीरे दबाव से उबरते दिख रही है सरकार ये नहीं चाहेगी की इकोनॉमिक रिकवरी में कोई नई बाधा आए। जानकारों का कहना है कि वित्त वर्ष 2022 में भारत को 12 फीसदी  GDP ग्रोथ की जरूरत होगी।


G Chokkalingam ने आगे कहा कि वित्त वर्ष 2021 में भारतीय इकोनॉमी में 8 फीसदी के संकुचन की उम्मीद है। हमें वित्त वर्ष 2022 में भारत को 12 फीसदी  GDP ग्रोथ की जरूरत होगी जिससे हमें GDP के सामान्य स्तरों पर करीब 4 फीसदी नेट जीडीपी ग्रोथ हासिल होगा।


उन्होंने आगे कहा कि 8 फीसदी संकुचन के कारण वित्त वर्ष 2020 का 100, वित्त वर्ष 2021 में 92 बन गया। अब अगर इस 92 को फिर 100 बनना है तो हमें 8.7 फीसदी ग्रोथ की जरूरत होगी। इस तरह हमें नार्मलाइज्ड बेस पर 4 फीसदी जीडीपी ग्रोथ हासिल करने के लिए 12.7 फीसदी ग्रोथ की जरूरत होगी। भारत को वर्तमान स्थिति में आल-इज-वेल के हाल में रहने के लिए  कम से 4 फीसदी जीडीपी ग्रोथ की जरूरत होगी।


जी चोक्कालिंगम ने आगे कहा कि इस समय इकोनॉमी के 12 फीसदी ग्रोथ के दौर में आने की उम्मीद में दिख रही है। ऐसे में न तो आरबीआई और न ही सरकार इस उम्मीद पर पानी फिराने का काम करेगी।


उन्होंने ये भी कहा कि FIIs भी भारतीय बाजारों में बहुत बड़ी बिकवाली करने की स्थिति में नहीं हैं। शॉर्ट टर्म में भारतीय बाजारों में बड़ी मात्रा में बिकवाली करना  FIIs के लिए भी आत्मघात करने के समान होगा।


बाजार में गिरावट दे रही खरीदारी का अच्छा मौका


अधिकांश बाजार जानकारों का कहना है कि बाजार की इस गिरावट से डरने की जरूरत नहीं है। भारतीय इकोनॉमी ने सुधार से साफ संकेत देने शुरू कर दिए हैं। इस गिरावट को अच्छे क्वालिटी शेयरों में पैसे लगाने का शानदार मौका समझें। भारतीय बाजार में हमें  मध्यम से लंबी अवधि में जोरदार रिटर्न मिलता दिखेगा।


G Chokkalingam का कहना है कि बाजार में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट नहीं होगी। सस्ते वैल्यूशन और नए रिटेल निवेशकों की आमद के कारण small और  mid-cap stocks अपनी चमक बनाए रखेंगे।


Prabhudas Lilladher का कहना है कि infra, housing, IT services, pharma, chemicals, BFSI, agri और e-comm में लॉन्ग टर्म ट्रेंड मजबूत बना हुआ है और ये बाजार को मजबूती देते रहेंगे।


Kotak Securities के Rusmik Oza का कहना है कि सबसे खराब स्थिति में भी निफ्टी जनवरी 2021 का अपना 13,600 का निचला स्तर फिर छू सकता है या फिर ज्यादा से ज्यादा 13,000 तक गिर सकता है। आगे कंपनियों से अच्छे नतीजे निफ्टी में गिरावट को थामने का काम करेंगे।


Rusmik Oza को उम्मीद है कि चौथी तिमाही में सभी सेक्टरों में सालाना आधार पर आय में बढ़त होती दिखेगी। वहीं, automobiles, banks, metals और mining, oil और gas में बहुत तेज ग्रोथ होती दिखेगी। Nifty50 में शामिल कंपनियों के मुनाफे में वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में सालाना आधार पर 122 फीसदी और तिमाही आधार पर  6 फीसदी की बढ़त देखने को मिल सकती है।


Rusmik Oza का कहना है कि Nifty50 में सिंगल डिजिट की किसी गिरावट से बाजार में घबराहट नहीं होना चाहिए। नियर टर्म की मुश्किलें धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगी। अगले 6-12 महीनों में अर्निंग आउटलुक में सुधार दिख सकता है। भारत नियर टर्म में बाय-इन-डिप मार्केट बना रहेगा।


बाजार की हालिय गिरावट उन लोगों के लिए बहुत अच्छा मौका है जिनकी बस मार्च 2020 में छूट गई थी। बाजार के लिए long-term outlook पॉजिटिव बना हुआ है। बाजार में शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है लेकिन बाजार के लिए long-term outlook पॉजिटिव बना हुआ है।



 
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