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2-3 महीने में खपत वाले शेयरों में तेजी संभव: राकेश झुनझुनवाला

बाजार के बिगहुल राकेश झुनझुनवाला का कहना है कि हर आम चुनाव बाद इकोनॉमी में सुस्ती दिखती है।
अपडेटेड Aug 16, 2019 पर 11:08  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बाजार के बिगबुल राकेश झुनझुनवाला का कहना है कि हर आम चुनाव बाद इकोनॉमी में सुस्ती दिखती है। लेकिन NBFC संकट ने बाजार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बाजार में सुस्ती के लिए काफी हद तक NBFC संकट जिम्मेदार है। उम्मीद है कि RBI दरें घटाने के साथ-साथ लक्विडिटी भी मुहैया कराएगा। राकेश झुनझुनवाला का कहना है कि उतार-चढ़ाव बाजार का हिस्सा है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है।


राकेश झुनझुनवाला का मानना है कि अगले 2-3 महीनो में खपत में बढ़त देखने को मिलेगी। सरकारी बैंकों की पूंजीकरण और NBFCs को बूस्टर से लैंडिग में बढ़त होगी।


आरबीआई दरों में कटौती के साथ लिक्विडिटी बढ़ाने पर फोकस करेगा जिससे क्रेडिट ऑफटेक में भी बढ़त देखने को मिलेगी। राकेश झुनझुनवाला ने आगे कहा कि कॉपोर्रेट सेक्टर को बिना सोचे- समझे दिए गए कर्जो की वजह से NBFCs संकट बढ़ा है। इस समय सभी बैंक कॉपोरेट्स को कर्ज देने में झिझक रहे है लेकिन ऐसा लगता है कि NPA साइकिल का सबसे बुरा दौर गुजर चुका है।


राकेश झुनझुनवाला बैंकिंग सेक्टर पर बुलिश है। उनका मानना है कि आगे DHFL जैसी कुछ NBFCs को छोड़कर अच्छी NBFCs कंपनियों को कर्ज मिलने में आसानी होगी। उनका कहना है कि भारत की इकोनॉमी ICU में नहीं है लेकिन खासकर NBFCs को लेकर सरकार को तत्काल कदम उठाने की जरुरत है।


भारत बिजनेस मॉडल के करेक्शन के दौर से गुजर रहा है जिससे फौजी तौर पर कुछ परेशानी हो सकती है लेकिन लंबी अवधि में ये देश के लिए फायदेमंद साबित होगी। सरकार को इकोनॉमी पर ध्यान देना होगा और AIR INDIA, MTNL और BSNL जैसी PSU को सब्सिडाइज करने से बचना होगा। 


राकेश झुनझुनवाला का मानना है कि भारत को ट्रेंड वॉर का फायदा मिलेगा। विदेशी निवेशकों को आर्कषित करने के लिए नीतियों में स्पष्टता और पारदर्शिता जरुरी है। एक बार मांग के रफ्तार पकड़ने पर निवेश में भी सुधार दिखेगा।


राकेश झुनझुनवाला का मानना है कि फार्मा सेक्टर अब बॉटम आउट हो चुका है। आगे इसमें सुधार दिखेगा। वर्तमान स्तरों पर बाजार में मंदी का नजरिया रखना सही नहीं होगा। निफ्टी को 10750 से 11000 के स्तर के बीच मजबूत सपोर्ट है।


राकेश झुनझुनवाला का मानना है कि बाजार में तेजी आएगी पर समय का पता नहीं। 2-3 महीने में खपत वाले शेयरों में तेजी संभव है। राकेश फिलहाल भारतीय बाजार की स्थिति से खुश नहीं हैं। लेकिन उनका मानना है कि अंतत: बाजार और इकोनॉमी में तेजी आएगी ही, भले ही अभी उसका समय न बताया जा सके।


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