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बाजार में करेक्शन नहीं, मंदी है: शकंर शर्मा

प्रकाशित Tue, 30, 2018 पर 12:53  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एनबीएफसी का भूत बाजार को डरा रहा है। खासकर हाउसिंग फाइनेंस यानी घर के लिए लोन देने वाली एनबीएफसी ने पूरे बाजार के ही सेंटिमेंट को बिगाड़ दिया। निवेशकों के एक झटके में अरबों रुपए डूब गए। समझ में नहीं आया है कि जोरदार रिटर्न देने वाले इस सेक्टर में आखिर क्या हो रहा है। दीवान हाउसिंग, इंडियाबुल्स जैसे चमकते सितारे एक झटके में आसमान से जमीन पर आ गए। लिक्विडिटी की दिक्कत और  डिफॉल्ट की आशंका ने निवेशकों के मन में डर बिठा दिया है। एक्सपर्ट यह भी मान रहे हैं कि कुछ कंपनियों में कुछ इंटरनल इश्यू भी हो सकते हैं, जिसकी जानकारी अभी बाहर नहीं आ पाई है लेकिन कुछ बड़े इन्वेस्टर्स को इसकी भनक हो सकती है।


बाजार में चालू हफ्ते में कुछ सुधार देखने को मिला है लेकिन जानकार अभी भी बाजार को लेकर चिंता जता रहे हैं। दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा का कहना है कि बाजार में आई हाल की गिरावट को करेक्शन नहीं मानना चाहिए, ये मंदी का बाजार है। हालांकि, उनके मुताबिक नवंबर में बाजार में रिलीफ रैली दिख सकती है। शंकर शर्मा का ये भी कहना है कि बाजार में 2008 जैसी मंदी नहीं होगी चुनाव तक बाजार में खास बढ़त नहीं होगी। नवंबर महीना थोड़ा अच्छा रह सकता है। सिस्टेमैटिक ढंग से निवेश कर रहे हैं तो जारी रखें।


भारतीय बाजार में ज्यादा मंदी आई है। भारतीय बाजार ज्यादा कमजोर हुआ है। बाजार की स्थिति काफी चिंताजनक है। रुपये पर आरबीआई के बयान ने बाजार को झटका लगा है। आरबीआई ने कहा था गिरते रुपये से वो परेशान नहीं। आरबीआई के इस स्टेटमेंट से बाजार के सेंटीमेंट पर असर पड़ा। शंकर शर्मा के मुताबिक कमजोर रुपये से भारत को कोई फायदा नहीं है।


रुपये में गिरावट का कितना असर होगा? इस सवाल पर शंकर शर्मा ने कहा कि रुपये में छोटी अवधि में तेज गिरावट से चिंता हो रही है। रुपये में गिरावट से सभी लोग मुश्किल में हैं। एक्सपोर्टर्स को भी कमजोर रुपये से फायदा नहीं होने वाला है। 2011 के बाद पहली बार बैलेंस ऑफ पेमेंट निगेटिव रहा है। देश के फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट हो रही है। महंगाई पर आरबीआई के लक्ष्य से सहमत नहीं हुआ जा सकता।


एफआईआई की बिकवाली पर शंकर शर्मा ने कहा कि एफआईआई ने बिकवाली का फैसला सही लिया है आगे म्यूचुअल फंड निवेश में भी गिरावट आएगी। शंकर शर्मा की घरेलू निवेशकों को सलाह है कि वो इक्विटी में 30 फीसदी से ज्यादा निवेश नहीं करें अगर इक्विटी में 30 फीसदी तक निवेश है तो बने रहें। इक्विटी में 30 फीसदी से ज्यादा पैसा लगा है तो उसे कम करें। सिस्टेमैटिक ढंग से निवेश  कर रहे हैं तो जारी रखें।


शंकर शर्मा के मुताबिक भारतीय बाजार की स्थिति बेहद खराब है जबकि दूसरे देश मजबूत स्थिति में हैं। एफआईआई पहले भारत को सेफ हेवन समझकर निवेश करते थे अब भारतीय बाजार में सभी चीजें खराब दिख रही हैं। शंकर शर्मा का मानना है कि क्रूड 100 डॉलर तक जा सकता है। क्रूड के ऊपर जाने के ज्यादा आसार देखने को मिलेंगे। क्रूड में छोटे करेक्शन हो सकते हैं।


एनबीएफसी संकट पर अपनी राय रखते हुए शंकर शर्मा ने कहा कि एनबीएफसी का बिजनेस मॉडल ठीक नहीं है। एनबीएफसी का फंडिंग का जरिया सही नहीं है। हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की स्थिति अच्छी है।


कंज्यूमर फाइनेंस कंपनियों पर अपनी राय देते हुए शंकर शर्मा ने कहा कि 25 फीसदी ब्याज पर पैसा देने वाली कंपनियों पर भरोसा नहीं है। शंकर शर्मा को कई स्मॉलकैप कंपनियां पसंद हैं। उनका मानना है कि अच्छे फंडामेंटल्स वाले शेयर जल्द बॉटम ऑउट हो जाएंगे। जनवरी-फरवरी में बाजार नया निचला स्तर बना सकता है। स्टील कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा है आगे कमोडिटी शेयरों में तेजी देखने को मिलेगी।


कंज्म्पशन सेक्टर को लेकर सतर्क नजरिया रखें। आसान कर्ज से कंज्म्पशन ग्रोथ काफी बढ़ी है। आगे कंज्यूमर सेक्टर में सुस्ती के आसार हैं। कंज्यूमर सेक्टर में थोड़े समय के लिए सुस्ती देखने को मिल सकती है। ऑटो सेक्टर का डिमांड आउटलुक अच्छा है। निजी बैंकों पर भी शंकर शर्मा का मंदी का नजरिया है। मंदी में ज्यादा कर्ज वाली कंपनियों को नुकसान होगा। निजी बैंकों के वैल्युएशन भी काफी ज्यादा है।