Bihar: राज्य सरकार ने सड़क, तटबंध और सरकारी भवन के निर्माण में लगाया SC/ST स्कॉलरशिप का पैसा

Bihar: राज्य सरकार ने सड़क, तटबंध और सरकारी भवन के निर्माण में लगाया SC/ST स्कॉलरशिप का पैसा

पैसों की कमी का हवाला देकर करीब 6 सालों तक कई छात्रों को स्कॉलरशिप देने से मना कर दिया गया

अपडेटेड Nov 01, 2021 पर 3:01 PM | स्रोत : Moneycontrol.com

बिहार (Bihar) में एक बेहद ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति छात्रवृत्ति (SC/ST Scholarship) के लिए विशेष रूप से बनाए गए फंड के 8,800 करोड़ रुपए का इस्तेमाल सड़कें, तटबंध, मेडिकल कॉलेज और सरकारी भवन, जैसे प्रोजेक्टस पूरा करने में इस्तेमाल कर दिए गए। इतना ही नहीं स्कॉलरशिप के लिए पैसे की कमी का हवाला भी दिया गया और इस कारण लगभग छह सालों के लिए कई छात्रों को स्कॉलरशिप देने से मना कर दिया गया।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, अनुसूचित जाति उप योजना (SCSP) फंड के इस पैसे के कहीं और इस्तेमाल करने को बिहार के वित्त पर अपनी 2018-19 की रिपोर्ट में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने हरी झंडी दिखाई थी।

यह योजना आयोग (अब नीति आयोग) के प्रावधानों के बावजूद हुआ, जिसमें कहा गया था कि SCSP फंड 2.5 लाख रुपए से कम की सालाना पारिवारिक आय वाले SC/ST छात्रों को केंद्र प्रायोजित पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप (PMS) देने के लिए है।

इंडियन एक्सप्रेस ने 10 अगस्त को रिपोर्ट किया था कि बिहार सरकार ने नेशनल एप्लीकेशन पोर्टल में "तकनीकी समस्या" का हवाला देते हुए 2018-19 से PMS के लिए इनकार कर दिया था।

असल में ज्यादातर बिहार SC/ST छात्रों को छह साल यह स्कॉलरशिप नहीं दी गई थी। इतना ही नहीं 2016 में, बिहार सरकार के SC/ ST कल्याण विभाग ने छात्रों पर वित्तीय बोझ को बढ़ाते हुए, इसके तहत एक फीस कैप भी लगाया था।

यह स्कॉलरशिप, जिसका 60 प्रतिशत केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की तरफ से फंडिंग की जाती है, वो 10वीं कक्षा से मास्टर्स लेवल तक के एजुकेशनल और प्रोफेशनल कोर्सों के लिए है।

CAG की रिपोर्ट के अनुसार स्कॉलरशिप फंड का इस्तेमाल:

- राज्य ने स्कॉलरशिप से बिजली विभाग को 2,076.99 करोड़ रुपए दिए और उसे 460.84 करोड़ रुपए का कर्ज भी दिया।

- इसने प्रमुख सड़क प्रोजेक्ट्स के लिए 3,081.34 करोड़ रुपए का इस्तेमाल किया।

- तटबंध और बाढ़ नियंत्रण प्रोजेक्ट्स के निर्माण में 1,202.23 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

- मेडिकल कॉलेजों के लिए 1,222.94 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

- इसने कृषि विभाग के कार्यालय और दूसरे भवनों के निर्माण के लिए 776.06 करोड़ रुपए का इस्तेमाल किया।

2018-19 की CAG रिपोर्ट, जिसकी टिप्पणियों को सरकार ने स्वीकार कर लिया है, इसमें कहा गया, "समिति ने CAG के निष्कर्षों से देखा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए निर्धारित फंड को दूसरे कामों के लिए इस्तेमाल किया गया है।"

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, रिपोर्ट में आगे कहा, "समिति मामले को गंभीरता से लेती है और सिफारिश करती है कि NITI आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति से जुड़े विकास योजनाओं के लिए निर्धारित फंड किसी भी हाल में दूसरे कामों और प्रोजेक्ट्स के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।"

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First Published: Nov 01, 2021 3:01 PM