भारत से अलग होकर पाकिस्तान जी नहीं पाएगा, आखिर सरदार पटेल ने ये क्यों कहा था

भारत से अलग होकर पाकिस्तान जी नहीं पाएगा, आखिर सरदार पटेल ने ये क्यों कहा था

बंटवारे के बावजूद हिन्दुस्तान में रह गए मुस्लिम लीग के लोगों ने आरोप लगाया कि जिन्ना ने हमें मंझधार में छोड़ दिया

अपडेटेड Oct 25, 2021 पर 7:24 AM | स्रोत : Moneycontrol.com

सुरेंद्र किशोर

पाकिस्तान का आज जो हाल है, उसका पूर्वाभास सरदार पटेल को विभाजन के समय ही हो गया था !
पटेल ने कहा था कि "पाकिस्तान जी नहीं पाएगा।" बंटवारे के बाद भी भारत में रह गए अपने मुस्लिम अनुयायियों से जिन्ना ने कहा था कि अब आपको हिन्दुस्तान का वफादार नागरिक बन जाना चाहिए। मौलाना अबुल कलाम आजाद का आकलन था कि कांग्रेस नेताओं ने सहज-सरल भाव से बंटवारे को स्वीकार नहीं किया। कुछ ने क्रोध और रोष के वश में अन्य नेताओं ने तंग आकर उसे स्वीकार कर लिया।
 
दरअसल बंटवारे से पहले इन मुस्लिम लीग के लोगों को यह समझा दिया गया था कि और अपनी बेवकूफी के कारण इन लोगों ने मान भी लिया था कि अगर पाकिस्तान बन गया तो मुसलमानों को चाहे वे बहुमत वाले प्रांतों के हों या अल्पमत वाले प्रांतों के "अलग राष्ट्र" समझा जाएगा। और उन्हें अपने भविष्य का निर्णय अपने आप अपने तरीके से करने का हक होगा। पर, जब ऐसा नहीं हुआ तो बंटवारे के बाद भी हिन्दुस्तान में रह गए मुस्लिम लीग के नेताओं ने कहा कि हमारे साथ जिन्ना ने धोखा किया।हमें मंझधार में छोड़ दिया।

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सरदार वल्लभ भाई पटेल ने देश के विभाजन के समय ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि "थोड़े ही अरसे में पाकिस्तानी इमारत भरभरा कर ढह जाएगी।" बाद की घटनाएं बता रही हैं कि पटेल दूरदर्शी नेता थे। सन 1971 में पाकिस्तान दो हिस्सों में बंट गया। अब बचे पाकिस्तान के भी कुछ प्रदेश भी उससे अलग होने के लिए कसमासा रहे हैं। देश की आर्थिक स्थिति चिंताजनक है।

सरदार  पटेल ने तब ही यह कह दिया था कि "नया देश पाकिस्तान जी नहीं सकेगा।" मौलाना अबुल कलाम आजाद ने अपनी किताब में पाकिस्तान के भविष्य पर सरदार पटेल के विचार भी प्रकाशित किए हैं। याद रहे कि "आजादी की कहानी" नामक उनकी पुस्तक बहुत पहले आई थी।   मौलाना आजाद भी भारत के विभाजन के खिलाफ थे। गांधी तो खिलाफ थे ही। अनेक नेता व लोग खिलाफ थे। फिर भी विभाजन नहीं रुका।
 
सरदार पटेल ने विभाजन से पहले ही यह कह दिया था कि "पाकिस्तान की मांग मान लेने से मुस्लिम लीग को अच्छा-खासा सबक मिल जाएगा। जो प्रांत हिन्दुस्तान से अलग हो रहे हैं,उन्हें बेहिसाब मुसीबतें और परेशानियां झेलनी पड़ेंगी।" वैसे पाकिस्तान ने कश्मीर के बहाने भारत पर इस बीच चार बार हमले किए।
 
पाकिस्तान को हर बार हार का मुंह देखना पड़ा। इन युद्धों में दोनों देशों को भारी जन -धन की हानि हुई।
पाकिस्तान को अधिक हानि हो रही है। फिर भी पाक बाहर से भारत के भीतर लगातार आतंकी भेजता रहा है।
इन सब कामों में उसके काफी पैसे खर्च होते हैं।पर, इसकी चिंता पाक को नहीं है।
 
लोग कहते हैं कि पाक के शासकों ने जानबूझकर अपने देश को आतंकिस्तान बना रखा है।उद्देश्य धार्मिक जो है !बंटवारे के विरोधी मौलाना अबुल कलाम आजाद ने कहा था कि देश का बंटवारा कांग्रेस ने स्वीकार किया और मुस्लिम लीग भी। कांग्रेस सारे राष्ट्र की प्रतिनिधि संस्था थी। मुस्लिम लीग को मुसलमानों में काफी समर्थन हासिल था। इसलिए सामान्यतः इसका मतलब यही होना चाहिए कि सारे देश ने बंटवारा स्वीकार किया। परंतु वस्तुस्थिति एकदम भिन्न थी। यह स्वीकृति बस कांग्रेस कार्य समिति के एक प्रस्ताव में और मुस्लिम लीग के अभिलेखों में ही निहित है।

मौलाना आजाद कहते हैं कि "हिन्दुस्तान के लोगों ने बंटवारे को स्वीकार नहीं किया।" जब आदमी डर या रोष से अभिभूत हो जाता है तो वह किसी भी चीज को वस्तुपरक दृष्टि से नहीं परख पाता। यानी बंटवारे के ये हिमायती भावना के आवेश में आकर काम कर रहे थे। वे कैसे समझ पाते कि वे जो कुछ कर रहे हैं ,उसके क्या -क्या नतीजे निकल सकते हैं?

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बंटवारे के बाद भी इस देश में रह गए मुसलमानों के बारे में मौलाना आजाद ने "आजादी की कहानी" में लिखा है कि बंटवारे के बाद सबसे विडंबनापूर्ण स्थिति उन मुस्लिम लीगी नेताओं की थी,जो यहां रह गए थे। 14 अगस्त, 1947 के बाद यहां रह गए मुसलमानों के कई नेता मौलाना आजाद से मिलने गए। मौलाना लिखते हैं कि उनकी दशा दयनीय थी। सभी बड़े अफसोस और गुस्से में कह रहे थे कि "जिन्ना ने हमें धोखा दिया है। हमें मंझधार में छोड़ दिया है।"

दरअसल अफसोस करने वाले लोगों ने बंटवारे की जो तस्वीर अपने मन में बनाई थी,उसका वस्तुस्थिति से कोई नाता नहीं था। मौलाना ने यह रहस्योद्घाटन किया कि जिन्ना समर्थकगण यह बात समझ नहीं पाए थे कि पाकिस्तान के सही मायने क्या होंगे। बंटवारे से पहले इन मुस्लिम लीगियों को यह समझा दिया गया था और अपनी बेवकूफी के कारण इन लोगों ने मान भी लिया था कि अगर पाकिस्तान बन गया तो मुसलमानों को चाहे वे बहुमत वाले प्रांतों के हों या अल्पमत वाले प्रांतों के "अलग राष्ट्र" समझा जाएगा। और उन्हें अपने भविष्य का निर्णय अपने तरीके से करने का हक होगा।

मौलाना आजाद लिखते हैं कि "अब जब मुसलमान बहुल प्रांत हिंन्दुस्तान से निकल गए, तब इन लीगियों को एहसास हुआ कि इन लोगों ने बंटवारा से पाया कुछ भी नहीं,बस कुछ खोया ही खोया है। जिन्ना के आखिरी संदेश ने उनकी कमर तोड़ डाली। वे यानी लीगी मुसलमान और कमजोर हो गए। अपनी बेवकूफियों से उन लीगियों ने हिन्दुओं में रोष और विरोध की भावना और अधिक पैदा कर दी।"

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक मामलों के जानकार हैं)

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First Published: Oct 25, 2021 7:24 AM

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