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ऑटो इंश्योरेंस इंडस्ट्री में बेहतर हुई है रिन्‍युअल और क्‍लेम की प्रक्रिया

इसमें कोई संदेह नहीं है, ग्राहक की खरीदारी के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई सफल प्रयास किए जा चुके हैं
अपडेटेड Sep 14, 2019 पर 16:47  |  स्रोत : Moneycontrol.com

भारतीय जनरल इंश्योरेंस बाजार हर साल 17% की स्थाई दर से बढ़ रहा है। वहीं दूसरी ओर प्राप्‍त हुए कुल वार्षिक प्रीमियम में अकेले मोटर इंश्योरेंस इंडस्ट्री की हिस्‍सेदारी 50% से अधिक है। एक ताजा रिसर्च के परिणाम बताते हैं कि भारत में मोटर इंश्योरेंस इंडस्ट्री का कुल सकल प्रीमियम 2025 के अंत तक 17 बिलियन डॉलर के पार पहुंचने की उम्मीद है। इन आंकड़ों के साथ, यह बात स्पष्ट है कि भारतीय मोटर इंश्योरेंस इंडस्ट्री काफी तेजी से बढ़ रही है और अब यह जरूरी हो गया है कि इंश्योरेंस कंपनियां ऐसे निजी उत्पाद और सेवाएं पेश करें जो ग्राहकों को पूर्ण संतुष्टि प्रदान कर सकें।


क्‍लेम और रिन्‍युअल प्रक्रिया में हुए विकास


इसमें कोई संदेह नहीं है, ग्राहक की खरीदारी के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई सफल प्रयास किए जा चुके हैं। एक समय था जब मोटर इंश्योरेंस खरीदने या किसी मौजूदा पॉलिसी को रिन्‍यू करने के लिए ग्राहकों को कुछ दिनों से लेकर हफ्तों तक इंतजार करना पड़ता था। हालाँकि, अब चीजें बहुत बदल गई हैं, जैसे कि अब आप ऑनलाइन जाकर, कुछ ही क्लिक में अपनी पॉलिसी की तुलना कर सकते हैं, नई पॉलिसी खरीद सकते हैं या मौजूदा पॉलिसी को रिन्‍यू कर सकते हैं। इसके अलावा, इंश्योरेंस कंपनियां अब अपने ग्राहकों को नए दौर की क्‍लेम सेवाओं की सुविधा प्रदान कर रहे हैं जो बिक्री के बाद के अनुभव को बढ़ाने का एक शानदार तरीका है। आज जहां अधिकांश इंश्योरेंस कंपनियां और साथ ही वेब-एग्रीगेटर्स धीरे-धीरे परेशानी मुक्त क्‍लेम प्रक्रिया की जरूरत को महसूस कर रहे हैं और क्‍लेम की प्रक्रिया को अधिक कुशल और प्रभावी बनाने के लिए अपनी ओर से प्रयास कर रहे हैं, वहीं भारतीय ग्राहक भी अब क्‍लेम प्रक्रिया में बड़े बदलाव का अनुभव कर रहे हैं।


एचडीएफसी एर्गो, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड और बजाज एलियांज जैसी इंश्योरेंस कंपनियों और पॉलिसीबाजार.कॉम जैसे ऑनलाइन इंश्योरेंस एग्रीगेटर्स ने ग्राहकों की सुविधा के लिए मोबाइल सेल्फ इंस्पेक्शन सर्विस की शुरुआत की है। विभिन्न इंश्योरेंस कंपनियों के अनुसार सेल्फ इंस्पेक्शन सर्विस ने वाहनों की रिन्‍युअल प्रक्रिया को काफी घटा दिया है क्योंकि पहले जहां जिस चीज़ के लिए कुछ दिन लगते थे, वहीं अब इसमें मुश्किल से कुछ घंटे लगते हैं। कई इंश्योरेंस कंपनियां अपने ग्राहकों को वाहन में होने वाले नुकसान का सेल्‍फ असेस्‍मेंट करने और उसी के लिए तत्काल क्‍लेम पेश करने का विशेषाधिकार देते हैं।


क्‍लेम के लिए, एक ग्राहक को बस इतना करना होता है कि वह उस जगह से तस्वीरें क्लिक करे और उसका वीडियो रिकॉर्ड करें जहां से वह वाहन क्षतिग्रस्त हुआ है और इंश्योरेंस कंपनी के अप्रूवल के लिए उन्हें अपलोड कर दे। वहीं पॉलिसी रिन्‍युअल के मामले में, ग्राहकों को वाहन के 360 डिग्री व्‍यू के साथ एक वीडियो अपलोड करना होगा। एक बार जब इंश्योरेंस कंपनी वाहन की स्थिति से संतुष्ट हो जाती है, तो ग्राहक को भुगतान लिंक के साथ एक सेटिस्‍फेक्‍शन नोटिफिकेशन भेजा जाता है। यह सुविधा ग्राहकों को उनके क्‍लेम की प्रगति पर रियल टाइम अपडेट भी प्रदान करती है, जिसे इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट या ऐप पर “माय अकाउंट” सेक्‍शन के माध्यम से ट्रैक किया जा सकता है।


IRDAI की भूमिका


इसके अलावा, भारतीय इंश्योरेंस और विकास प्राधिकरण (IRDAI) भी पॉलिसीधारकों को 50,000 रुपये तक के क्‍लेम के लिए सेल्‍फ असेस्‍मेंट करने की सुविधा प्रदान करता है। सेल्‍फ इंस्‍पेक्‍शन के अलावा, ऐसी कई सेवाएं हैं जो दूसरी इंश्योरेंस कंपनियां भी प्रदान करती हैं, जैसे बजाज आलियांज की “मोटर ऑन द स्पॉट” सुविधा, जो अपने मोबाइल ऐप “इंश्‍योरेंस वॉलेट” के माध्यम से 20,000 रुपये तक के क्‍लेम के लिए सेल्‍फ इंस्‍पेक्‍शन की सुविधा प्रदान करता है। वहीं आईसीआईसीआई लोम्बार्ड की सेल्‍फ इंस्‍पेक्‍शन सर्विस उसके ऑफिशियल मोबाइल ऐप के माध्यम से उपलब्ध है। साथ ही फ्यूचर जेनेराली में इसी सुविधा का लाभ “i-ViSS” नामक इंटेलिजेंट वीडियो स्ट्रीमिंग एंड सेटलमेट सर्विस के माध्यम से लिया जा सकता है।


Sajja Praveen Chowdary, हेड-मोटर इंश्योरेंस (पॉलिसी बाजार)


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