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Health Insurance Policy: कैसे चुनें अपने लिए सही Health Cover Plan?

आपको पता होना चाहिए कि बाजार में किस तरह के हेल्थ कवर प्लान उपल्बध हैं और आपके लिए सही चुनाव क्या होगा।
अपडेटेड Jul 18, 2019 पर 15:49  |  स्रोत : Moneycontrol.com

सेहत ऐसी चीज है, जिसका कोई मोल नहीं लेकिन इससे जुड़ी समस्याएं कभी बताकर नहीं आतीं इसलिए इसके लिए तैयार रहना बहुत जरूरी है।


हेल्थ इंश्योरेंस ऐसे वक्त में बहुत जरूरी हो जाता है। हेल्थ इंश्योरेंस लेकर मेडिकल जरूरतों के वक्त आपको कैशलेस मेडिकल ट्रीटमेंट की सुविधा मिल सकती है या आप बाद में अपना खर्च रीइंबर्स करा सकते हैं।


अधिकतर लोगों को उनकी कंपनी या एम्पलॉयर की ओर से हेल्थ प्लान मिलता है, जिसके बेनेफिट्स के बारे में उन्हें पता ही नहीं होता। बाजार में अलग-अलग एज ग्रुप्स के लिए अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से हेल्थ कवर प्लान उपलब्ध हैं। बस आपको अपनी जरूरत और एलिजिबिलिटी पता होनी चाहिए। आपको पता होना चाहिए कि बाजार में किस तरह के हेल्थ कवर प्लान उपल्बध हैं और आपके लिए सही चुनाव क्या होगा।


भारत में मोटा-मोटी दो तरह के इंश्योरेंस कवर उपलब्ध हैं- इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी और फैमिली फ्लोटर पॉलिसी।


Individual Health Insurance Policy


इस इंश्योरेंस प्लान में व्यक्तिगत हेल्थ कवर मिलता है। इसमें एक ही व्यक्ति को इसके लाभ मिलते हैं। इस प्लान में परिवार के हर सदस्य को तय व्यक्तिगत लाभ मिलता है। इस प्लान में आपको हॉस्पिटलाइजेशन के वक्त के खर्चे, डॉक्टर के कंसल्टेशन, एंबुलेंस सर्विस, ट्रीटमेंट चार्ज और हॉस्पिटलाइजेशन के पहले और बाद के खर्चों पर कवर मिलता है।


आप जितनी कीमत का प्लान चुनेंगे उसके हिसाब आपको प्रीमियम भरना होगा। ये प्लान अगर आप सिंगल हैं या बस खुद के लिए कवर प्लान देख रहे हैं, तो सही है।


Family Floater Policy


ये प्लान खासतौर पर पूरी फैमिली के हेल्थ को कवर करने के लिए हैं। इन प्लान्स में आपको मैक्सिमम बेनेफिट्स मिलते हैं। साथ ही एक ही पॉलिसी होने की वजह से आपको कई पॉलिसीज मैनेज भी नहीं करनी पड़ती। इसमें आप अपने माता-पिता, लाइफ पार्टनर और बच्चों को एक ही प्लान के तहत हेल्थ कवर प्लान प्रोवाइड करा सकते हैं।


Senior Citizen Insurance Policy


ऊपर बताई गई पॉलिसीज के अलावा सीनियर सिटीजन्स के लिए भी अलग से इंश्योरेंस मिलता है। ओल्ड एज में वैसे भी बीमारियां ज्यादा बढ़ जाने की वजह से अलग ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। इसलिए सीनियर सिटीजन्स के लिए अलग से ये पॉलिसी मिलती है। इस पॉलिसी पर सरकार की ओर से अलग टैक्स डिडक्शन स्लैब भी मिलता है।