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ऑनलाइन Bike Insurance रिन्यू कराना है? इन चीजों का रखें ध्यान

अगर आप भी अपना बाइक इंश्योरेंस पॉलिसी रिन्यू कराने वाले हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखिए
अपडेटेड Aug 10, 2019 पर 14:05  |  स्रोत : Moneycontrol.com

बाइक इंश्योरेंस खरीदना आसान हो सकता है लेकिन इंश्योरेंस पॉलिसी को रिन्यू कराना कभी-कभी बड़ा टास्क हो जाता है।


अगर आप भी अपना बाइक इंश्योरेंस पॉलिसी रिन्यू कराने वाले हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखिए। जानिए, ऐसे वक्त में क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए।


वक्त पर पॉलिसी रिन्यू कराएं


सबसे पहले तो कभी अपनी पॉलिसी के खत्म हो जाने तक का इंतजार नहीं करना चाहिए। भारत में इंश्योरेंस के बिना या एक्सपायर हो चुके इंश्योरेंस के साथ गाड़ी चलाना कानूनन अपराध है। हमेशा अपने रिन्युअल डेच को लेकर अपडेटेड रहें। एक्सपायरी डेट तक रिन्युअल करा लें।


कभी अपने इंश्योरर से इस संबंध में आने वाले कॉल या मैसेज को इग्नोर न करें।


रिन्युअल के टाइम पेमेंट वगैरह को फिर रिव्यू कर लें


पॉलिसी रिन्यू करते वक्त अच्छा होगा कि आप अपने पेमेंट और चार्ज वगैरह को एक बार रिव्यू कर लें। हो सकता है कि आप ज्यादा पे कर रहे हों, या फिर किसी दूसरी कंपनी से आपको ज्यादा किफायती पॉलिसी मिल रही हो।


कभी भी बस इस वजह से पुरानी पॉलिसी रिन्यू न करा लें क्योंकि आपकी कंपनी ने आपके सामने ऑप्शन रख दिया और ऑनलाइन पेमेंट करना आसान है।


सही IDV चुनें


Insured Declared Value टोटल सम अमाउंट होता है, जो कवर में मिलता है। यह कवर आपको आपकी बाइक चोरी होने या गुम होने पर मिलता है। IDV आपकी बाइक की बाजार में हालिया कीमत और खरीदे गए साल से डेप्रीसिएशन को कैलकुलेट करके तय किया जाता है। जितनी ज्यादा IDV होगी, आपको उतना प्रीमियम भरना होगा।


लेकिन कभी भी कम प्रीमियम भरने के चक्कर में कम IDV न चुनें। IDV इतनी होनी चाहिए कि जरूरत पड़ने पर भरपाई कर सके।


जरूरी एड-ऑन कवर्स लें


आप अपनी पॉलिसी में एड-ऑन कवर्स लेकर इसे मॉडिफाई कर सकते हैं। इसमें आपको बाइक के इंश्योरेंस के इतर पैसेंजर कवरेज, जीरो डेप्रिसिएशन कवर, एक्सेसरीज कवर वगैरह पर कवर मिलेगा। ये मेन पॉलिसी का हिस्सा नहीं होगा लेकिन इससे पॉलिसी की वैल्यू बढ़ जाएगी।