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1 फरवरी से बदल रहे हैं Life Insurance Policy के नियम, जानिए इसका असर

ULIPs (unit-linked insurance plans) और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के नए नियम 1 फरवरी 2020 से लागू होंगे।
अपडेटेड Jan 31, 2020 पर 09:42  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अगर आपके पास लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी है या कोई पॉलिसी लेने के लिए सोच रहे हैं तो एक बार रुक जाइये इन नियमों को जरूर पढ़ लीजिए। 1 फरवरी से Insurance Regulatory and Development Authority of India, (IRDAI) ने Traditional life insurance policies (पारंपरिक लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी) और यूलिप पर 1 फरवरी से नए नियम लागू हो जाएंगे। इस नियमें कुछ पॉलिसी के टाइम पीरियड बढ़ा दिया गया है।  तो किसी पॉलिसी में कुछ और बदलाव किए गए हैं। इसी तरह यूलिप में भी कई तरह के बदलाव हुए हैं।


जानिए पॉलिसी होल्डर को किसी तरह का मिलेगा फायदा


1 – पॉलिसी रिवाइवल के लिए टाइम पीरियड में बढ़ोतरी


IRDAI ने लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी को रिवाइवल (फिर से एक्टिव कराना) करने के लिए समय बढ़ाने के लिए कहा है। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, यूलिप प्लान में पहले से चुकाए गए प्रीमीयम की तारीख से 2 के बजाय 3 साल का टाइम मिलेगा। साथ ही गैर-लिंक्ड इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के लिए पॉलिसी फिर से चालू करवाने के लिए समय टाइम पीरियड 5 साल के लिए होगा।


प्रभाव


जानकारों का मानना है कि यह एतक बेहतर बदलाव है। मान लीजिए अगर आपने प्रीमियम का पेमेंट नहीं किया है और कुछ फाइनेंशियली समस्याओं के चलते अपनी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी बंद कर दी तो अब आपको उसको रिवाइवल करने के लिए एक साल एक्सट्रा मिलेगा।


यूलिप खरीदने के लिए सुनिश्चित किया गया प्रीमियम


1 फरवरी से यूलिप खरीदने के के नियम और शर्तें सभी उम्र के लोगों के लिए एक समान हो जाएंगी। 1 फरवरी से 45 साल से कम उम्र के पॉलिसी होल्डर के लिए यूलिप खरीदने के लिए न्यूनतम राशि का भुगतान एनुअल प्रीमियम के 10 गुना से घटाकर 7 गुना कर दिया जाएगा।


मौजूदा समय में केवल 45 साल से अधिक उम्र के लोग ही सालाना प्रीमियम के 10 गुना से कम अश्योर्ड राशि वाले यूलिप खरीद सकते हैं।


प्रभाव – कम अश्योर्ड राशि से बेहतर रिटर्न मिल सकता है।


पेंशन पॉलिसी होल्डर को लाभ


पेंशन प्लान पर मेच्योरिटी लाभ पर दी जा रही अनिवार्य गारंटी अब ऑप्शनल हो जाएगा। मौजूदा समय में इंश्योरेंस कंपनियों को मेच्योरिटी पर गारंटी ऑफर करनी होती है। इसका मतलब ये हुआ कि उन्हें मेंच्योरिटी इनकम पर गारंटी देने के लिए Debt instruments में इन्वेस्टमेंट करना पड़ता है। जिससे इन्वेस्टमेंट से संभावित रिटर्न तकरीबन कम हो जाता है।


अगर आपका लॉन्ग टर्म का लक्ष्य है तो आप बीमा कंपनी से इक्विटी में अधिक राशि का निवेश कर सकते हैं और नो गारंटी का ऑप्शन भी चुन सकते हैं।


पेंशन प्लान से 60 फीसदी तक कर सकते हैं बिदड्रॉ


पॉलिसी होल्डर के लिए फ्लैक्सिबिलिटी और लिक्विडिटी सुधार करने के लिए बीमा कंपनियों को अब 60 फीसदी तक राशि वापस देने की सुविधा देनी होगी। मौजूदा समय में यह 33 फीसदी है।


प्रभाव – जानकारों का मानना है कि इससे पॉलिसी होल्डर को फायदा होगा।


सरेंडर वैल्यू नियमों में बदलाव


सरेंडर वैल्यू से जुड़े नियम भी पॉलिसी होल्डर के मुताबिक हो गए हैं। जब आप योजना से प्री मेच्योर के टाइम निकलने का फैसला करते हैं तो वह राशि है जो आप प्राप्त करते हैं उसे ही सरेंडर वैल्यू कहा जाता है। लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के मामले में यदि आप किसी वजह से अपनी पॉलिसी को खत्म करने की सोचें तो आपको गारंटीड सरेंडर वैल्यू हासिल करने के लिए आपको तीन साल का इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि अब आप दो साल में ही पॉलिसी समाप्त कर सकेंगे।



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