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नया सरल जीवन बीमा: क्या आपको खरीदना चाहिए यह स्टैंडर्ड टर्म इंश्योरेंस प्लान

आसान उत्पाद पेश करने की कोशिश के तहत बीमा रेगुलेटर IRDAI ने एक स्टैंडर्ड टर्म इंश्योरेंस प्लान को अनिवार्य कर दिया है
अपडेटेड Oct 23, 2020 पर 13:10  |  स्रोत : Moneycontrol.com

प्रीति कुलकर्णी


स्टैंडर्ड रेगुलर हेल्थ इंश्योरेंस और कोविड-19 के लिए बनाए गए खास तरह के कवर्स के बाद अब आपको 1 जनवरी 2021 से बीमा रेगुलेटर की अनिवार्य बनाई गई स्टैंडर्ड टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने को मिलेगी।


इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने एक स्टैंडर्ड टर्म इंश्योरेंस प्लान पेश किया है। इस स्टैंडर्ड टर्म इंश्योरेंस प्लान को हर जीवन बीमा कंपनी को उतारना होगा। बीमा कंपनियों को इन पॉलिसियों को बेचना शुरू करना होगा। इनका नाम सरल जीवन बीमा होगा और इसके आगे जीवन बीमा कंपनी का नाम होगा। इन कंपनियों को 1 जनवरी 2021 या उससे पहले ये प्लान मार्केट में उतार देना होगा।


IRDAI के चीफ सुभाष खुंटिया के इस तरह के प्लान्स को लॉन्च करने का पहले ही ऐलान कर चुके हैं।


इस प्लान में क्या होगा?


यह पॉलिसी 18 से 65 साल की उम्र के लोगों के लिए पेश की जाएगी। इस पॉलिसी का टेन्योर यानी अवधि पांच साल से लेकर 40 साल तक होगी। इसमें आप न्यूनतम 5 लाख रुपये का सम एश्योर्ड ले सकते हैं। सम एश्योर्ड की अधिकतम सीमा 25 लाख रुपए होगी। हालांकि, बीमा कंपनियां ज्यादा सम एश्योर्ड भी ऑफर कर सकती हैं, लेकिन इसमें सरल जीवन बीमा पॉलिसी की शब्दावली का इस्तेमाल करना जरूरी होगा।


आप रेगुलर प्रीमियम चुकाने वाले टर्म्स चुन सकते हैं। इनमें पांच या 10 साल तक प्रीमियम देने या एक बार में प्रीमियम का भुगतान करने जैसे विकल्प शामिल हैं। रेगुलर और लिमिटेड पे पॉलिसीज में प्रीमियम को मासिक, छमाही या सालाना आधार पर चुकाया जा सकता है।


डेथ बेनेफिट सालाना प्रीमियम के प्रीमियम के 10 गुने, मृत्यु तक चुकाए गए सभी प्रीमियम के 105 फीसदी और पॉलिसीहोल्डर की मौत पर तयशुदा दी जाने वाली रकम में से सबसे ज्यादा होगा।


सिंगल प्रीमियम पॉलिसी में डेथ बेनेफिट सिंगल प्रीमियम के 125 फीसदी और डेथ पर चुकाई जाने वाली तयशुदा रकम में से जो ज्यादा होगा, उसे चुकाया जाएगा।


बीमा कंपनियों को दो राइडर लगाने की छूट है। ये हैं- अतिरिक्त प्रीमियम के लिए एक्सीडेंट और पर्मानेंट डिसेबिलिटी बेनेफिट ऑप्शंस।


कवर पॉलिसी जारी होने के 45 दिन के वेटिंग पीरियड के साथ आएगा। इस दौरान केवल एक्सीडेंट से होने वाली डेथ के लिए भुगतान होगा। अगर किसी अन्य वजह से मौत होती है तो टैक्स छोड़कर 100 फीसदी प्रीमियम को आश्रित व्यक्ति को दे दिया जाएगा।


क्या अन्य टर्म प्लान काम नहीं करेंगे?


गुजरे वर्षों में विशुद्ध रूप से प्रोटेक्शन टर्म इंश्योरेंस की मांग में इजाफा हुआ है। इनमें आपके वारिसों को आपकी मृत्यु के बाद एकमुश्त रकम मिलती है और ऐसे में ये आपके गुजरने के बाद आपके परिवार को बेहद अहम वित्तीय मदद मुहैया कराते हैं।


पारंपरिक एंडोवमेंट प्लान्स के उलट टर्म इंश्योरेंस में पॉलिसी अवधि के दौरान आपके जीवित रहने पर कोई रिटर्न नहीं मिलता है। ऐसे में इन टर्म प्लान्स का प्रीमियम बेहद कम होता है।


लेकिन, मार्केट में मौजूद कई टर्म प्लान भ्रम पैदा कर सकते हैं। एक स्टैंडर्ड टर्म प्लान की क्यों जरूरत पड़ी, इस बारे में आईआरडीएआई ने कहा है, “अलग-अलग नियमों और शर्तों वाले कई टर्म प्लान इस वक्त बाजार में मौजूद हैं। ऐसे कस्टमर्स जिनके पास इतना वक्त और ऊर्जा नहीं है कि वे ठीक से समझकर इन प्लान्स को चुन सकें उनके लिए ऐसे में खासी दिक्कत होती है।”


बीमा रेगुलेटर का मानना है कि स्टैंडर्ड प्रोडक्ट के आने से बाजार में गलत तरह से बीमा पॉलिसियां बेचने की गतिविधि भी कम होगी। IRDAI ने कहा है, “इससे कस्टमर्स को जानकारी के साथ चुनाव करने की आजादी मिलेगी। इससे बीमा कंपनियों और पॉलिसी लेने वालों के बीच भरोसा भी बढ़ेगा. साथ ही इससे मिस-सेलिंग और क्लेम सेटलमेंट के वक्त संभावित विवादों को भी कम करने में मदद मिलेगी।”


हालांकि, IRDAI ने फीचर्स और पॉलिसी शब्दावली का जिक्र कर दिया है और यह सभी पॉलिसीज में एक जैसे रहेंगे, लेकिन जीवन बीमा कंपनियां प्रीमियम तय कर सकेंगी। ऐसा ही हेल्थ इंश्योरेंस प्लान आरोग्य संजीवनी, कोरोना कवच और कोरोना रक्षक स्टैंडर्ड पॉलिसीज में होता है।


बजाज आलियांज लाइफ के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर भरत कलसी के मुताबिक, “प्राइसिंग कस्टमर सेगमेंट और सम एश्योर्ड जैसे फैक्टर्स पर आधारित होगी और इसे रेगुलेटर मंजूर करेगा।”


क्या स्टैंडर्ड टर्म प्लान से कोई फायदा होगा?


एक्सपर्ट्स का मानना है कि फीचर्स और पॉलिसी शब्दावली एक जैसी होने से टर्म प्लान खरीदने में आसानी होगी।


पॉलिसीबाजार.कॉम के लाइफ इंश्योरेंस के चीफ बिजनेस ऑफिसर संतोष अग्रवाल कहते हैं, “पहली दफा जीवन बीमा खरीद रहे बायर्स के लिए यह प्लान काफी सही है। इसमें सभी बीमा कंपनियों में एक जैसे फीचर्स, बेनेफिट्स और दूसरी चीजें होंगी, हालांकि, कीमत अलग-अलग हो सकती है।”


इंश्योरेंस कंपनियां कैसे प्रीमियम के साथ प्लान उतारती हैं इसके लिए आपको इंतजार करना पड़ेगा।


चूंकि, IRDAI ने प्रीमियम तय करने का अधिकार बीमा कंपनियों के ऊपर छोड़ दिया है, ऐसे में इसमें आपकी उम्र, आमदनी, स्वास्थ्य इतिहास जैसी चीजों को शामिल किया जाएगा।


ज्यादातर टर्म पॉलिसीज की तरह से ही इनमें भी धूम्रपान करने वालों और नहीं करने वालों के प्रीमियम में फर्क होगा। धूम्रपान नहीं करने वालों का प्रीमियम कम होगा। कुछ चीजों को बाहर रखने और वेटिंग पीरियड की स्पष्ट परिभाषा इसकी एक अच्छी चीज है।


जेबी बोडा इंश्योरेंस एंड रीइंश्योरेंस ब्रोकर्स की चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर सरोज कांता सतपती कहती हैं, “डेथ बेनेफिट ज्यादा फायदेमंद दिखाई देता है क्योंकि इसमें आजीविका सुरक्षा पॉलिसीज (LPP) का ख्याल रखा जाता है। इसके अलावा, इसमें केवल आत्महत्या (पहले साल) को बाहर रखा गया है।”


मनीकंट्रोल की राय


हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों के उलट, प्योर प्रोटेक्शन, रेगुलर टर्म इंश्योरेंस पॉलिसीज काफी सरल उत्पाद होते हैं।


पॉलिसीहोल्डर प्रीमियम चुकाते हैं और मृत्यु होने पर बीमा कंपनी उसके परिवार के सदस्यों को सम एश्योर्ड का भुगतान करती है।


बीते वर्षों में जीवन बीमा कंपनियों ने चरणबद्ध तरीके से पैसे भुगतान करने, एकमुश्त और चरणबद्ध तरीके से पैसे देने और महंगाई आधारित बढ़ते हुए पेआउट्स जैसे नए फीचर्स लॉन्च किए हैं।


इससे शायद कई लोगों के लिए इन टर्म प्लान्स का चुनाव करना थोड़ा मुश्किल हो गया है। हालांकि, बीमा कंपनियां लगातार आसान टर्म प्लान भी जारी कर रही हैं जिनमें पॉलिसीहोल्डर की मौत के बाद परिवार को सम एश्योर्ड की रकम चुका दी जाती है।


ऐसे में यूनिफॉर्म फीचर्स और शर्तों वाली हेल्थ पॉलिसीज के मुकाबले स्टैंडर्ड टर्म प्लान क यूटिलिटी सीमित होगी।


हालांकि, अगर आप पहली बार पॉलिसी खरीद रहे हैं तो यह प्रॉडक्ट आपको चिंतामुक्त शुरुआत करने में मदद देगा क्योंकि इसके फीचर्स सभी जीवन बीमा कंपनियों में एक जैसे होंगे। एक जैसी शब्दावली और एक्सक्लूजंस से भविष्य में किसी तरह के विवाद पैदा होने की भी आशंका नहीं रहती है।


प्रॉडक्ट्स के मार्केट में आने के बाद आप प्रीमियम के आधार पर अपनी बीमा कंपनी का चुनाव कर सकते हैं। इसके साथ ही आप क्लेम सैटलमेंट और ट्रैक रिकॉर्ड जैसी चीजों पर भी नजर डाल सकते हैं।


अगर आप हाई-वैल्यू टर्म कवर की तलाश कर रहे हैं तो खासतौर पर कंपनियों के क्लेम चुकाने के रिकॉर्ड पर जरूर नजर डाल लीजिए।


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