Moneycontrol » समाचार » बीमा

मोटर इंश्योरेंस लेते वक्त किन बातों का रखें ध्यान

प्रकाशित Wed, 14, 2018 पर 16:11  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

योर मनी को फिक्र है आपके पैसों की, आपकी मेहनत से कमाई हुई पूंजी की। लिहाजा निवेश हो या बीमा, योर मनी आपको देता है सही, साफ और स्टीक सलाह। इंश्योरेंस से जुडे आपके सवालों के जवाब देने के लिए हमारे साथ मौजूद हैं रूंगटा सिक्योरिटी के सीएफपी हर्षवर्धन रूंगटा।


हर्षवर्धन रूंगटा का कहना है कि मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी के दो पहलू है यानि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस और खुद के नुकसान का इंश्योरेंस होता है। पॉलिसी होल्डर को थर्ड पार्टी को होने वाले नुकसान के लिए कवर मिलता है। पॉलिसी के तहत हादसा होने पर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस से नुकसान की भरपाई की जाती है। थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में थर्ड पार्टी की गाड़ी को नुकसान का खर्च उठाना होता है। इसमें डेथ का कवर या मेडिकल खर्च शामिल होता है। आईआरडीए ने थर्ड पार्टी प्रीमियम में बदलाव करते हुए 1 अप्रैल 2018 से इसे लागू किया है। नए नियम के तहत थर्ड पार्टी के अलावा खुद की गाड़ी का भी कवर मिलेगा जिसके लिए हर साल इंश्योरेंस रिन्यू करवाएं।


हर्षवर्धन रूंगटा ने आगे बताया कि जीरो डेप्रिसिएशन कवर जरूर लें। जीरो डेप्रिसिएशन कवर में स्टैंडर्ड पॉलिसी के मुकाबले फुल सेटलमेंट हो जाता है। स्टैंडर्ड पॉलिसी में एक्सिडेंट पर डेप्रिसिएशन निकालकर भरपाई की जाती है। जीरो डेप्रिसिएशन का प्रीमियम, स्टेंडर्ड कवर के मुकाबले ज्यादा महंगा होता है। जीरो डेप्रिसिएशन केवल गाड़ी खरीदने के 3 साल तक ही कवर मिलता है।


इंश्योरेंस के लिए छोटे मोटे क्लेम ना करें। ज्यादा क्लेम करने पर प्रीमियम बढ़ेगा। इंश्योरेंस कंपनी को जल्द से जल्द जानकारी दें। हादसा होने पर एफआईआर कॉपी, गाड़ी को नुकसान की फोटो जमा करें।