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जानिए क्या है वसीयत और लिखने के बाद क्या करें ?

वसीयत को सावाधानी पूर्वक लिखकर समय-समय पर अपड़ेट करते रहना चाहिए।
अपडेटेड Jul 16, 2019 पर 09:41  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पुरखों की संपत्ति से हो सकता है कि नई पीढ़ी अनजान हो। उन्हें नहीं पता होता कि हमारी संपत्ति कहां और कितनी है? उसका विभाजन कैसे होगा? अब तो संपत्ति के चक्कर में परिवारों में झगड़ा होना भी आम बात हो गई है। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आपके घर में कोई कलह, झगड़ा न हो। तो फिर आप भी एक वसीयतनामा लिख सकते हैं। वैसे तो पूरी दुनिया में विरासतों से संबंधित अनेक बुरी वसीयतों की कहानियां भरी पड़ी हैं। लेकिन भारत में कम से कम वसीयत बनाना वित्तीय प्रबंधन के हिस्से में कम ही देखा जाता है। जब किसी व्यक्ति वसीयत लिखे बिना मृत्यु हो जाती है, तो कई बार उनके वारिसों के बीच खूनी लड़ाई छिड़ जाती है। इसके परिणामस्वरूप लंबे समय तक परिवार में झगड़े चलते रहते हैं या वारिसों को संपत्ति पर अपना अधिकार साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेजों का इंतजाम करने की थकाऊ प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में सबसे बड़ी जरूरत महसूस होती है कि वसीयत लिखी होनी चाहिए।


 वैसे तो वसीयत लिखने के लिए किसी वकील, स्टैंप पेपर की जरूरत नहीं होती है। कोई भी 21 साल से अधिक उम्र का स्वस्थ्य बुद्धि वाला वयस्क व्यक्ति वसीयतनामा लिख सकता है।



आइये जानते हैं वसीयत के बारे में और वसीयत लिखने के बाद क्या करें
 
वसीयत क्या होती है



यह एक प्रकार का कानूनी दस्तावेज होता है जिसमें किसी व्यक्ति/व्यक्तियों का नाम लिखा होता है जो एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी प्रॉपर्टी और व्यवसाय को प्राप्त करेगा। इस दस्तावेज को इसे तैयार करने वाले व्यक्ति द्वारा अपने जीवन में कभी भी निरस्त किया जा सकता है, इसमें परिवर्तन किया जा सकता है या इसे बदला भी जा सकता है।
 
वसीयत की सूचना:-–



आने वाली पीढ़ी को पता होना चाहिए कि वसीयत लिखी गई है। उसी हिसाब से सबको हिस्सा मिलेगा। वसीयत लिखने वाला ही फैसला कर सकता है कि इसे कहां रखा जाए। वसीयत लिखने वाले के पास ऐसी कोई मजबूरी नहीं होती कि उसका खुलासा करें। अपने परिवार को बताएं कि सकी मृत्यु के बाद ही वसीयत को ओपन किया जाए।
 
वसीयत को सुरक्षित रखें:-



वसीयत लिखने के बाद इसे सुरक्षित रखना भी एक बड़ी चुनौती है। हालांकि बैंक लॉकर में वसीयत रखने के लिए सबसे बेहतर जगह है। इसे और अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए आप इसका पंजीकरण करा सकते हैं। वैसे तो वसीयत को रजिस्टर्ड (पंजीकरण) कराने की जरूरत नहीं होती है। लेकिन इसकी वास्तविकता पर संदेहों से बचने के लिए रजिस्टर्ड करा सकते हैं। सभी जिलों में एक सब रजिस्ट्रार ऑफिस होता है। वहां आप इसे रजिस्टर्ड करा सकते हैं।
 
वसीयत को अपडेट करें:-



जैसा कि पहले ही बताया गया था कि वसीयत में कभी बदलाव किया जा सकता है। लिहाजा आपको समय-समय पर अपनी वसीयत को पढ़ते रहना चाहिए और अपनी वर्तमान वित्तीय स्थिति और वरीयताओं के अनुसार उसे अपडेट करते रहना चाहिए। आपके पास बैंक की एफडी, या कोई वित्तीय स्कीम है। उसका जिक्र जरूर करें। उससे जो भी रिटर्ऩ आये । उसको हमेशा अपडेट करते रहें। मान लीजिए कि वसीयत लिखने के बाद आपने कोई वित्तीय स्कीम ली है। तो उस वसीयत को उसी हिसाब से अपडेट कर लेनी चाहिए।  


किसी की मृत्यु होने पर क्या करें ?



वसीयत लिखने के बाद कई बार परिवार में बदलाव आ जाते हैं। जैसे वसीयत लिखने के बाद संपत्ति पाने वालों में किसी का आकस्मिक निधन हो गया। या परिवार में किसी का जन्म हो गया। ऐसे में संपत्ति के विभाजन के लिए आप वसीयत में बदलाव करना चाहते हैं। कई बार ऐसी संभावनाएं आ जाती हैं कि एक्जीक्यूटर की आपसे पहले मृत्यु हो जाती है तो वसीयतकर्ता के रूप में आपको रिप्लेसमेंट ढूंढ़ना पड़ेगा।
अगर वसीयत कर्ता और वसीयत पाने वाले दोनों की मृत्यु हो जाती है, तो वसीयत समाप्त हो जाती है। फिर लाभार्थियों को लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन की प्रक्रिया का पालन करना होगा। जो कि काफी महंगा और थकाऊ है।
अगर दो वसीयत पाने वालों में से एक की मौत हो जाती है तो जिंदा व्यक्ति पूरी संपत्ति मिल जाती है ।
 


नॉमिनी :- 


कई बार ऐसा होता है कि वसीयत के लाभार्थी और नोमिनी में मालिकाना हक के लिए अदालत की शरण में चल जाते हैं। ऐसे में आपको वसीयत लिखते समय सावधानी बरतने की जरूरत है। मान लीजिए कि आपने अपनी जीवन बीमा में मां को नॉमिनी बनाया, तो आपके न रहने पर मां को बीमा की सारी रक़म मिलेगी, पर वो उन्हें आपकी पत्नी और बच्चों के साथ बांटनी होगी और अगर आपने अपनी वसीयत में वो रकम मां के नाम लिखी है, तो उस पर सिर्फ मां का अधिकार होगा। इस लिए अपनी वसीयतनामा को हमेशा अपड़ेट करें। तारीख दर तारीख का जिक्र करें। साथ नोमिनी के लिए तारीख का भी जिक्र करें। संपत्ति के असली उत्तराधिकारी का फैसला वसीयत से या फिर निजी धार्मिक कानून से होता है। नॉमिनी केवल ट्रस्टी की तरह काम करता है।