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Covid-19 से पहले घर बुक करा फंस तो नहीं गए, जानिए अब क्या करें

ऐसे वक्त पर जबकि हम एक महामारी के दौर से गुजर रहे हैं, लोगों को सैलरी में कटौती और यहां तक कि छंटनी तक का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में जिन लोगों ने घर की बुकिंग की है उनके लिए आगे की रणनीति क्या होनी चाहिए
अपडेटेड May 24, 2020 पर 12:10  |  स्रोत : Moneycontrol.com

निखिल वालवलकर


पिछले कुछ सालों में घर खरीदने वालों को उनके फ्लैट्स की डिलीवरी में बड़ी देरी का सामना करना पड़ा है। बिल्डरों और रियल्टी डिवेलपर्स को पैसे की किल्लत का सामना करना पड़ा है और इस वजह से प्रोजेक्ट्स के पूरा होने में देरी हुई है।


इन्हीं हालातों के बीच में मार्च 2020 में कोविड-19 ने दस्तक दे दी। इससे पहले से बुरे चल रहे हालात और ज्यादा खराब हो गए।


अगर आप घर के खरीदार हैं और आपने किसी अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी (ऐसी प्रॉपर्टी जिसमें अभी काम चल रहा है और अभी ये रहने के लिए तैयार नहीं हुई है) में पैसा लगाया है तो यह आपके लिए चिंता की वजह है। आपके घर की डिलीवरी में और देरी हो सकती है।


सैलरी में कटौती और नौकरियों में छंटनी का दौर चल रहा है। ऐसे में इस बात की परेशानी भी बढ़ गई है कि आप अपनी ईएमआई कैसे चुकाएंगे।


पिछले हफ्ते वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया था कि निर्माण के काम रुकने के चलते बिल्डर कानूनी रूप से घरों की डिलीवरी में छह महीने तक की देरी कर सकते हैं।


उन्होंने रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डिवेलपमेंट) अथॉरिटीज (रेरा) को इस तरह के बिल्डरों को तीन महीने की और राहत देने की भी इजाजत दे दी है।


 


मौजूदा मुश्किल आर्थिक हालात में नौकरियों और तनख्वाह का संकट बना हुआ है। साथ ही आपके बुक किए गए घर की डिलीवरी भी कब होगी इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसी स्थिति में हम आपको कुछ ऐसे उपायों के बारे में बता रहे हैं जिनसे आपकी मुश्किलें कुछ कम हो सकती हैं।


 


अपने बैंक के साथ फिर से सौदेबाजी कीजिए


होम लोन की दरों में कमी ने उम्मीद की एक किरण पैदा की है। मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग से लिंक्ड इंटरेस्ट रेट्स के साथ रेपो रेट्स में भी गिरावट आई है। अगर आप ने रेपो रेट लिंक्ड लोन लिया है तो ब्याज दर कम हो जाएगी। अगर आपने एमसीएलआर लोन लिया है तो यह देख लीजिए कि क्या बैंक ने इसका फायदा आपको दिया है या नहीं।


मिसाल के तौर पर, 20 साल के लिए 50 लाख रुपये के लोन को अगर 8.75 फीसदी की दर पर लिया गया है तो आप इसके लिए 44,185 रुपये की ईएमआई चुकाते हैं। ब्याज दर कम होने पर अब यही रेट अगर 8 फीसदी पर आ गया है तो आपको 41,822 रुपये चुकाने होंगे और इस तरह से आपकी ईएमआई में 2,363 रुपये महीने की बचत होगी।


जहां तक मुमकिन हो बैंक बदलने से बचिए। रीटेललेंडिंग.कॉम की फाउंडर और सीईओ सुकन्या कुमार कहती हैं, “किसी होम लोन का बैलेंस ट्रांसफर कराना एक जटिल प्रक्रिया होती है। इसमें प्रॉपर्टी का तकनीकी आकलन करने के अलावा दस्तावेजों को एक बैंक से दूसरे बैंक ले जाना होता है। लॉकडाउन के वक्त में यह सब करना मुश्किल साबित होगा। ऐसे में बेहतर यही है कि आप दूसरे बैंकों के यहां ऑफर ढूंढने की बजाय अपने मौजूदा बैंक के पास जाकर इंटरेस्ट रेट्स पर सौदेबाजी करें।”


अगर आप नकदी की किल्लत का सामना कर रहे हैं तो अच्छा होगा कि आप अपने बैंक के पास जाएं और लोन की अवधि को बढ़ाने के लिए आवेदन करें। इससे आपकी ईएमआई घट जाएगी। हालांकि, आपको लोन की अवधि के दौरान ज्यादा रकम का भुगतान करना पड़ेगा। जहां तक मुमकिन हो सके आपको मोरेटोरियम (लोन चुकाने में छूट) लेने से बचना चाहिए। मोरेटोरियम लेने से बाद में आपको ज्यादा पैसा चुकाना पड़ेगा।


 


प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट से कैसे निबटें?


आपने अपना घर एक खास कीमत पर खरीदा होगा, लेकिन अब आप देख रहे होंगे कि प्रॉपर्टी की कीमत में गिरावट आ रही है। मैंडारस पार्टनर्स के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर नौशाद पंजवानी ने कहा, “घरों की मांग घट गई है, ऐसे में डिवेलपर्स ने बिना बिकी इनवेंटरी से निजात पाने के लिए कीमतों को कम कर दिया है।” वह कहते हैं कि आने वाले वक्त में रियल्टी की कीमतों में और गिरावट आने की आशंका है।


 


आप इस मामले में ज्यादा कुछ कर नहीं सकते। लेकिन, कीमतों में गिरावट उस वक्त काफी अहम हो जाती है जब आप किसी अन्य बैंक से लोन को रीफाइनेंस कराने का फैसला करते हैं। कुमार कहती हैं, “अगर आप किसी बैंक के पास अपने मौजूदा होम लोन को रीफाइनेंस कराने के लिए जाते हैं तो प्रॉपर्टी की कम वैल्यूएशन को दर्ज किया जाएगा।”


कर्ज घटाइए और कैश इकट्ठा कीजिए


अगर आप अपने होम लोन को वक्त से पहले चुकाना चाहते हैं यानी प्रीपेमेंट करना चाहते हैं तो ऐसा कर लीजिए। हालांकि, ऐसा करने के लिए अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स को हाथ मत लगाइए।


 


आने वाले दिनों में प्रॉपर्टी खरीदने की सोच रहे लोगों के लिए इसमें एक सबक छिपा हुआ है।


पहला सबक यह है कि आप अपने मौजूद घर को बेच दीजिए और इसके बाद आप सुस्त चल रहे रियल एस्टेट मार्केट में डील्स की तलाश कीजिए। इस तरीके से आप को अपने बजट का पता चल जाएगा साथ ही आपके लिए ऐसे में खुद को मिलने वाली रकम के आधार पर कोई फैसला करना आसान हो जाएगा।


 


बुकिंग कैंसिल करना


अगर आप अपनी वित्तीय स्थिति में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं तो आपको बुक किए गए घर को कैंसिल करने के विकल्प पर विचार करना चाहिए।


एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के रिसर्च हेड प्रशांत ठाकुर कहते हैं, “लॉकडाउन लागू होने से पहले बुक की गई प्रॉपर्टीज में बुकिंग कैंसिल करने पर शायद पूरे रिफंड का प्रावधान न हो। इनमें बिल्डर कैंसिलेशन चार्ज के तौर पर कुछ रकम काट सकता है।” सेल एग्रीमेंट को पढ़िए और क्लॉज को समझिए। कई डिवेलपर्स एग्रीमेंट वैल्यू की 5-10 फीसदी तक रकम कैंसिलेशन चार्ज के तौर पर काटते हैं.


ठाकुर कहते हैं, “अगर बिल्डर पैसे वापस करने से इनकार कर देता है तो आपके पास संबंधित रेरा अथॉरिटीज के पास जाने या कंज्यूमर कोर्ट में गुहार लगाने समेत कई विकल्प हैं।”


 


इंटीरियर की फिक्र बाद में, पहले पजेशन हासिल कीजिए


अपने नए घर पर होने वाले खर्च को लेकर समझदारी बरतने की जरूरत है। अपनी नई प्रॉपर्टी के लिए घर के सामान और एप्लायंसेज पहले से बुक मत कीजिए। ऐसा तब भी मत कीजिए जबकि इन सामानों पर आपको बढ़िया डिस्काउंट मिल रहा हो।


आपको आपका घर मिलने में देरी हो सकती है और ऐसे में घर के सामानों को पहले से बुक करा लेने से आपको इन पर पैसे खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जबकि हो सकता है कि उस वक्त तक आपको घर की डिलीवरी न मिल पाए।


बिल्डरों के ऑफर अगली किस्त में


ब्याज दरों को लेकर बैंक से सौदेबाजी करने, होम लोन को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने, आपके सामने मौजूद कानूनी रास्ते जैसे कई विकल्पों की यहां जानकारी दी गई है।


अगली किस्त में हम बिल्डरों की दी जा रही अलग-अलग फाइनेंसिंग स्कीमों पर नजर डालेंगे। ये बिल्डर ग्राहकों को लुभाने के लिए कई तरह के आकर्षक ऑफर दे रहे हैं। हम यह भी बताएंगे कि क्या इस महामारी के दौर में नई प्रॉपर्टी खरीदने का फैसला कितना सही साबित होगा।


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