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नए निवेशक हैं, ऐसे चुने बेस्ट म्यूचुअल फंड

Mutual funds में निवेश करने दो तरीके हैं। एक SIP और दूसरा एकमुश्त रकम
अपडेटेड May 08, 2019 पर 11:39  |  स्रोत : Moneycontrol.com

नौकरी मिलने के बाद जब पहली सैलरी मिलती है तो कुछ लोग खर्च करते हैं और कुछ लोग निवेश करते हैं। शेयर बाजार की तेजी देखकर कुछ लोग मार्केट में निवेश करना चाहते हैं। लेकिन इसमें खास सावधानी बरतनी पड़ती है। अगर आपको शेयर बाजार की जानकारी नहीं हो तो आपको म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने का सुझाव दिया जाता है।


म्यूचुअल फंड्स में निवेश से पहले इसे समझना जरूरी है। Mutual funds निवेश की वह योजना है जहां निवेशकों का फंड मैनेजर मैनेज करते हैं। वे यह पैसा अलग-अलग सिक्योरिटीज में लगाते हैं जिसका रिटर्न निवेशकों को मिलता है। इसमें निवेशकों का जोखिम कम होता है। 


Mutual funds में निवेश करने दो तरीके हैं। एक SIP और दूसरा एकमुश्त रकम। SIP में हर महीने की एक तय तारीख को तय रकम मार्केट में निवेश की जाती है। जबकि एकमुश्त निवेश में पूरी रकम एकसाथ निवेश किया जाता है। 
 
शेयर बाजार में डायरेक्ट निवेश के मुकाबले म्यूचुअल फंड के जरिए शेयरों में पैसा लगाना नए निवेशकों के लिए ठीक है। इसमें रिटर्न और रिस्क बहुत ज्यादा नहीं होते हैं। म्यूचुअल फंड कई तरह के होते हैं। 


इक्विटी बेस्ड फंड


इस फंड को इक्विटी में बड़ा निवेश करते हैं। इसमें जितना हाई रिटर्न होता है, उतना ही जोखिम भी होता है। हालांकि इसमें लॉन्ग टर्म के लिए इनवेस्ट करना बेहतर होता है। इक्विटी फंड में ही ELSS यानी इक्विटी लिंक्ड सेविग स्कीम्स होती है। इसमें आप डेढ़ लाख रुपये तक का टैक्स बचा सकते हैं। यह कम लॉक पीरियड का होता है।


डेट बेस्ड फंड


इस फंड के जरिए आप कम रिस्क लेकर बेहतर रिटर्न पा सकते हैं। अगर आपको अगले साल कोई महंगी ज्वैलरी खरीदनी है और आप बहुत ज्यादा जोखिन नहीं लेना चाहते हैं तो यह सही विकल्प है। आप इसमें शॉर्ट टर्म में इनवेस्ट कर सकते हैं।


बैलेंस्ड फंड्स


बैलेंस्ड फंड को हाइब्रिड फंड भी कहते हैं। इस फंड में रिस्क कम होता है। इसमें ज्यादातर इनवेस्ट की गई रकम की सुरक्षा की गारंटी होती है। बैलेस्ड फंड्स में इनकम और स्टॉक्स में दोनों में निवेश कर सकते हैं। यहां स्टॉक से आपको बेहतर रिटर्न मिल सकते हैं। जब कि फिक्स्ड इनकम आपको रिस्क कम कर सकती है।


इक्विटी-हेवी बैलेंस्ड फंड्स


इस फंड को 60-80 फीसदी इक्विटी एसेट्स में निवेश किया जाता है और बाकी फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज में। आपके फंड का बड़ा हिस्सा शेयरों में लगाया जाता है यानी आपको रिटर्न अच्छा मिलता है। लेकिन साथ ही इसमें जोखिम भी काफी रहता है।


डेट-हैवी बैलेसंड फंड


अगर आप हाई रिटर्न और लो रिस्क इनवेस्टमेंट देखना चाहते हैं तो आपको डेट हैवी बैलेंस्ड अपनाना होगा। इस फंड को 60-80 फीसदी डेट बेस्ड एसेट में निवेश किया जाता है बाकी स्टॉक्स में। आपके फंड का इक्विटी कंपोनेंट आपके डेट कंपोनेंट से बैलेंस रिटर्न में मदद कर सकता है। इसी को कंजरवेटिव हाइब्रिड फंड्स कहते हैं। 


बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड्स


यहां आप रिटर्न कॉम्बिनेशन का रिस्क ले सकते हैं। आप अपने फंड में इनकम और इक्विटी का निश्चित अनपात रख सकते हैं।


फंड हाउस में निवेशकों का फंड मैनेज करने के लिए प्रोफेशनल लोग होते हैं। आप अपने रिस्क के हिसाब से निवेश कर सकते हैं। आमतौर पर इसका मुनाफा PPF, FD से ज्यादा रहता है।