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ITR Filing: फाइनेंशियल ईयर 2020-21 के लिए ITR फाइल करने से पहले जान लीजिए ये 10 जरूरी बातें

ITR फॉर्म 1,2 और 4 फाइल करने के लिए ऑफलाइन यूटिलिटी अब नए पोर्टल पर उपलब्ध है और बाकी की यूटिलिटीज भी जल्द ही लॉन्च हो जाएंगी
अपडेटेड Jun 24, 2021 पर 09:37  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अभिषेक अनेजा

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) ने फाइनेंशियल ईयर 2020-21 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के लिए इनकम टैक्स फॉर्म्स (Income Tax Forms) जारी कर दिए हैं। ITR फॉर्म 1,2 और 4 फाइल करने के लिए ऑफलाइन यूटिलिटी अब नए पोर्टल पर उपलब्ध है और बाकी की यूटिलिटीज भी जल्द ही लॉन्च हो जाएंगी। इनकम टैक्स पोर्टल (Income Tax Portal) को नए सिरे से लॉन्च किया गया है और इसमें कई बदलाव हुए हैं। नया इनकम टैक्स पोर्टल incometax.gov.in 7 जून को लॉन्च हो गया है। हालांकि, शुरुआत में नए पोर्टल के कामकाज में कुछ दिक्कतें देखी गई हैं, लेकिन इनके जल्द ही दुरुस्त हो जाने की उम्मीद है।


ऐसे में टैक्सपेयर्स के लिए ये बेहद जरूरी है कि वे सही इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म का चुनाव करें और उसमें सभी जरूरी ब्योरे दर्ज करें। इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही कुछ जरूरी बिंदुओं के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें इस साल आपको अपने इनकम टैक्स रिटर्न को फाइल करते वक्त दिमाग में रखना जरूरी है।


1. सही इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म चुनें


सही इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म का चुनाव बेहद जरूरी है क्योंकि गलत फॉर्म चुनने से आपका इनकम टैक्स रिटर्न डिफेक्टिव घोषित हो सकता है। ITR फाइल करते वक्त टैक्सपेयर्स को सभी निर्देशों को ध्यान से पढ़ना चाहिए और उसके बाद अपने लिए लागू होने वाले फॉर्म को इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट से डाउनलोड करना चाहिए।
 


फॉर्म                                              लागू होने की शर्तें
ITR 1 ऐसे इंडीविजुल्स जो कि रेजिडेंट हैं (जो सामान्य रेजिडेंट्स नहीं हैं उनसे हटकर) और जिनकी कुल इनकम 50 लाख रुपये तक है, कमाई सैलरी से है, एक हाउस प्रॉपर्टी है, अन्य स्रोत (इंटरेस्ट वगैरह) और एग्रीकल्चरल इनकम 5,000 रुपये तक है (ऐसे इंडीविजुअल के लिए नहीं जो कि या तो किसी कंपनी के डायरेक्टर हैं या जिन्होंने अनलिस्टेड इक्विटी शेयरों में निवेश किया है या ऐसे मामलों में जहां u/s 194N के तहत TDS कटा हो या इनकम टैक्स ESOP पर टाला गया हो)
ITR 2 ऐसे इंडीविजुअल्स और HUF के लिए जिनकी कारोबार या पेशे से प्रॉफिट या फायदे से कमाई नहीं है।
ITR 3 ऐसे इंडीविजुअल्स और HUF के लिए जिनकी किसी बिजनेस या पेशे से होने वाले प्रॉफिट या फायदे से कमाई है।
ITR 4 ऐसे इंडीविजुअल्स, HUF और कंपनियों के लिए (LLP को छोड़कर) जो कि बतौर नागरिक 50 लाख रुपये तक की कमाई करते हैं और जिनकी बिजनेस या पेशे से कमाई है जो कि सेक्शंस 44AD, 44ADA या 44AE के तहत आकलित होती है] [ऐसे इंडीविजुअल्स के लिए नहीं जो कि या तो किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं या जिन्होंने किसी अनलिस्टेड कंपनी के शेयरों में निवेश किया है या अगर ESOP पर इनकम टैक्स को टाला गया है।
ITR 5 इन लोगों को छोड़कर बाकियों के लिए- (i) इंडीविजुअल, (ii) HUF, (iii) कंपनी और (iv) ITR-7 फॉर्म फाइल करने वाले लोग।
ITR 6 सेक्शन 11 के तहत एग्जेंप्शन क्लेम करने वाली कंपनियों को छोड़कर बाकी कंपनियों के लिए।
ITR 7 कंपनियों समेत ऐसे लोगों के लिए जिन्हें सेक्शन केवल 139(4A) या 139(4B) या 139(4C) या 139(4D) के तहत ही रिटर्न दाखिल करने की जरूरत होती है।

2. पूरी और सही डिटेल्स भरें
 
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब आपकी कमाई और खर्च को पैन और आधार से लिंक होने की वजह से ट्रैक करता है। इसमें ऊंची वैल्यू वाले ट्रांजैक्शंस और कुछ खास पेमेंट शामिल होते हैं। इस तरह की सूचनाएं बताना बैंकों, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रार, क्रेडिट कार्ड कंपनियों वगैरह के लिए जरूरी कर दिया गया है।
 
ऐसे में इस बात की सलाह दी जाती है कि आप अपनी कमाई का सही आकलन करें और इसे सही तरह से इनकम टैक्स रिटर्न में भरें ताकि बाद में किसी तरह के नोटिस का सामना न करना पड़े।
 
3. प्रीफिल्ड डिटेल्स को वेरिफाई करें
 
लिस्टेड सिक्योरिटीज से मिलने वाले कैपिटल गेन्स, डिविडेंड इनकम, बैंकों और पोस्ट ऑफिस से मिलने वाला ब्याज अब इनकम टैक्स रिटर्न में पहले से ही भरा मिलेगा। हालांकि, इस बात की सलाह दी जाती है कि आप इन ऑटो-फिल्ड सूचनाओं को एक बार चेक कर लें ताकि ये सूचना सही हो। अगर कोई अतिरिक्त जानकारी देनी हो तो आपको उसका खुलासा कर देना चाहिए।
 
4. अगर सेक्शन 115BAC के तहत नई टैक्स रिजीम के तहत टैक्स पेमेंट का चुनाव कर रहे हैं तो फॉर्म10-IE को फाइल करें
 
अगर आपने सेक्शन 115BAC के तहत नई टैक्स पेमेंट रिजीम (नई टैक्स व्यवस्था) का चुनाव किया है तो आपको फॉर्म 10-IE को ऑनलाइन भरने की जरूरत होगी। इसके बाद आपको अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना होगा। आपको ये काम इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग की आखिरी तारीख से पहले कर लेना होगा।
 
अगर आप ऐसा नहीं कर पाते हैं तो आप सेक्शन 115BAC के तहत कम टैक्स रेट का दावा करने के योग्य नहीं रह जाएंगे। फॉर्म को डिजिटल सिग्नेचर के साथ सबमिट किया जा सकता है। इसके अलावा ऑनलाइन जनरेट होने वाले इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन के इस्तेमाल से भी इसे किया जा सकता है।
 
5. इनकम टैक्स रिटर्न में बैंक खातों की सही डिटेल्स दर्ज करें
 
इनकम टैक्स फॉर्म्स में सभी बैंक अकाउंट्स का खुलासा करना अनिवार्य जरूरी है। इसके तहत IFS कोड, बैंक का नाम और बैंक अकाउंट नंबर का खुलासा करना जरूरी है। अपडेटेड बैंक अकाउंट डिटेल्स की जरूरत इस वजह से भी है क्योंकि इसमें ही आपका टैक्स रिफंड भी आता है।
 
कई बैंक और पेटीएम, एयरटेल जैसी वॉलेट कंपनियां/पेमेंट बैंक ऑनलाइन बैंक अकाउंट खोलने की सहूलियत दे रहे हैं. बैंक अकाउंट्स में बदलाव का खुलासा अगर आप नहीं करते हैं तो आपके पास इनकम टैक्स विभाग का नोटिस आ सकता है।
 
6. भारत के बाहर अकाउंट्स और इनवेस्टमेंट और विदेशी इनकम का खुलासा करना अनिवार्य
 
भारत में रहने वाले नागरिकों के लिए अगर आप के पास कोई विदेशी संपत्ति/इनवेस्टमेंट या देश के बाहर अकाउंट है या आपको देश के बाहर किसी स्रोत से कमाई हो रही है तो आपको इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म में शेड्यूल FA भरना जरूरी है। साथ ही इस तरह के टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स रिटर्न को ITR फॉर्म 1 और 4 में नहीं भर सकते हैं। ये शेड्यूल केवल तब लागू होता है चाहे आप एक बेनेफिशियल ओनर हों, एक लाभार्थी या विदेशी एसेट या अकाउंट के लीगल ओनर हों। यहां तक कि अगर आप देश के बाहर खातों के सिग्नेटरी हैं तब भी ये आप पर लागू होगा।
 
7. इंडीविजुअल टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख
 
सैलरी, हाउस प्रॉपर्टी, कैपिटल गेन्स, बिजनेस या प्रोफेशन या इंटरेस्ट, डिविडेंड जैसे दूसरे स्रोत से अगर किसी इंडीविजुअल को कमाई होती है, तो उसे तय तारीख के भीतर अपने रिटर्न को फाइल करना जरूरी है। 
 
ऐसे इंडीविजुअल टैक्सपेयर्स के लिए जो ऑडिट के अधीन नहीं हैं उनके लिए फाइनेंशियल ईयर 2020-21 के लिए तय तारीख को बढ़ाकर 30 सितंबर कर दिया गया है.  जो लोग टैक्स ऑडिट के अधीन हैं या पार्टनरशिप फर्म में पार्टनर हैं उनके लिए ये तारीख 30 नवंबर है।
 
8. अगर आप आखिरी तारीख से चूक गए तो क्या होगा?
 
अगर आप फाइनेंशियल ईयर 2020-21 के लिए अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से चूक जाते हैं तो आप इसे केवल 31 जनवरी 2022 (बढ़ाई गई आखिरी तारीख) तक ही फाइल कर पाएंगे।
 
अगर फाइनेंशियल ईयर 2020-21 के लिए आपके इनकम टैक्स रिटर्न में कोई गलत सूचना पाई जाती है और आप उसमें संशोधन करना चाहते हैं तो आप ऐसा केवल 31 जनवरी 2022 तक ही कर सकते हैं। इसके बाद संशोधन की इजाजत नहीं होगी।
 
9. आखिरी तारीख के बाद ITR फाइल करने पर क्या होगा?
 
अगर आप तय तारीख तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने में नाकाम रहते हैं तोः
 
- अगर आपको कोई लॉस हुआ है, जैसे कि हाउस प्रॉपर्टी, कैपिटल गेन्स या बिजनेस या प्रोफेशन में लॉस हुआ है तो आपको इस लॉस को आगे के वर्षों में कैरी फॉरवर्ड करने की इजाजत नहीं होगी।
 
- अगर टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये से कम है तो आप पर 1,000 रुपये लेट फीस लगेगी। इसके बाहर ये रकम 5,000 रुपये होगी।
 
- टैक्सेज के पेमेंट पर इंटरेस्ट भी चुकाना होगा।
 
10. इनकम टैक्स रिटर्न का वेरिफिकेशन
 
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए ये बेहद जरूरी है कि आप ऑनलाइन रिटर्न फाइल करने के 120 दिन के भीतर इसे इलेक्ट्रॉनिक या मैनुअल तरीके से वेरिफाई करें। 
 
इसे इस तरह से किया जा सकता हैः
 
(i) डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) के इस्तेमाल से डिजिटल रूप से दस्तखत करना
 
(ii) इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) के इस्तेमाल से
 
(iii) आधार OTP
 
(iv) पेपर फॉर्म ITR को दस्तखत करके पोस्ट के जरिए इनकम टैक्स CPC (बेंगलुरु) भेजकर। ये CPC में 120 दिन के भीतर पहुंच जाना चाहिए।
 
अगर टैक्सपेयर रिटर्न को ऑनलाइन या इसे CPC भेजकर वेरिफाई करने में असफल रहता है तो इनकम टैक्स रिटर्न को "नॉट फाइल्ड” के तौर पर मान लिया जाएगा।
 
चूंकि इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म और कंप्लायंस कई टैक्सपेयर्स के लिए एक बेहद थकाऊ काम है, खासतौर पर छोटे टैक्सपेयर्स को अक्सर ऐसा करना बोझिल लगता है, ऐसे में इस बात की हमेशा सलाह दी जाती है कि आप किसी प्रोफेशनल से कंसल्ट करें जो कि आपको सही इनकम टैक्स भरने में कैलकुलेशन और दूसरी मदद आपको दे सके और आपका रिटर्न सही तरीके से फाइल हो सके।
 
(लेखक पेशे से CA हैं )

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