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जानिए कैसे आप अपने होम लोन की EMI कम कर सकते हैं?

क्या आप जानते हैं होम लोन किसी दूसरे बैंक में ट्रांसफर करते हुए आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए
अपडेटेड Nov 23, 2019 पर 16:48  |  स्रोत : Moneycontrol.com

होम लोन लॉन्ग टर्म तक चलने वाला लोन है। कोई भी होम लोन सामान्य तौर पर 15 से 30 साल के लिए होता है। इस अवधि के बीच आप बैंक बदलकर अपने ब्याज के बोझ को कम कर सकते है। इसमें ना सिर्फ आपको बेहतर इंटरेस्ट रेट मिलता है। बल्कि आपको कोई प्रोसेसिंग फीस या प्रीपेमेंट पेनाल्टी भी नहीं देनी पड़ती है।


जब आप अपना लोन किसी दूसरे बैंक में ट्रांसफर करते हैं तो नया बैंक आपको बेहतर इंटरेस्ट रेट ऑफर करता है। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि होम लोन किसी दूसरे बैंक में ट्रांसफर करते हुए आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। अगर आप अपने लोन की EMI नियमति तौर पर नहीं चुका रहे हैं तो आपको लोन अकाउंट ट्रांसफर करने की सुविधा नहीं मिलेगी।


होमलोन अकाउंट ट्रांसफर करने से पहले इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।


ट्रांसफर प्रोसेस


सबसे पहले बॉरोअर के तौर पर आपको अपने मौजूदा बैंक को यह बताना होगा कि आप लोन अकाउंट ट्रांसफर करना चाहते हैं। इसके लिए अपने मौजूदा बैंक को आप एक एप्लिकेशन देंगे जिसमें लोन अकाउंट ट्रांसफर करने की रीक्वेस्ट होगी। इसके बाद बैंक आपके रीक्वेस्ट के आधार पर आपको NOC देगा।


यह लेटर आपको नए बैंक को देकर लोन की बाकी रकम ट्रांसफर करना होगा। एकबार लोन ट्रांसफर होने के बाद बैंक आपके प्रॉपर्टी के पेपर भी नए बैंक को ट्रांसफर कर देगा।  


कम लागत का फायदा


अगर आपने 15 साल के लिए 40 लाख रुपए का लोन 9.05 फीसदी के रेट पर लेते हैं तो इंटरेस्ट के तौर पर टोटल रकम 33.24 लाख रुपए जाएगी। लेकिन अगर इंटरेस्ट रेट में मामूली बदलाव भी करते हैं तो इस रकम में बड़ा फर्क आ जाएगा। खासतौर पर जब लोन की अवधि बहुत लंबी होती है तो इसका फायदा ज्यादा मिलता है। उदाहरण के तौर पर अगर लोन अकाउंट ट्रांसफर कराने पर आप 8.05 फीसदी इंटरेस्ट रेट देते हैं तो आपका इंटरेस्ट पर जाने वाला खर्च घटकर 29 लाख रुपए हो जाएगा।


क्या है अतिरिक्त खर्चा?


नया बैंक आपसे प्रोसेसिंग फीस वसूलेगा। हालांकि आप यह फीस बातचीत के जरिए कम कर सकते हैं। मुमकिन है कि बैंक यह चार्ज माफ भी कर दे। फिक्स्ड लोन रेट के लिए बैंक पेनाल्टी चार्ज भी लेते हैं। हालांकि अगर आपका लोन फ्लोटिंग रेट पर है तो कोई पेनाल्टी नहीं देनी होगी। बॉरोअर को स्टैंप ड्यूटी का खर्च भी देना पड़ता है। 


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