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जानिए 80C के तहत आप कहां-कहां टैक्स बचा सकते हैं?

इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत आप 1.50 लाख रुपए तक टैक्स बचा सकते हैं। जानिए 80C के तहत टैक्स सेविंग्स के क्या विकल्प हैं
अपडेटेड Sep 13, 2019 पर 09:25  |  स्रोत : Moneycontrol.com

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का काम खत्म करने के बाद अगले साल की तैयारी शुरू हो जाती है। अगले साल रिटर्न फाइल करने में कोई मुश्किल ना आए, इसलिए जरूरी है कि टैक्स सेविंग्स का काम अभी से शुरू किया जाए। इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत आप 1.50 लाख रुपए तक टैक्स बचा सकते हैं। जानिए 80C के तहत टैक्स सेविंग्स के क्या विकल्प हैं।  


ELSS


ईक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS) टैक्स सेविंग्स वाले म्यूचुअल फंड हैं। 80C के तहत कर छूट के लिए इसमें 1.5 लाख रुपए तक निवेश किया जा सकता है। इसकी एक अच्छी बात यह है कि इसमें सिर्फ तीन साल का लॉक इन पीरियड होता है। यानी तीन साल के बाद आपको जो रकम मिलेगी, उसपर आपको कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा। ELSS शेयर बाजार से जुड़ा है, लिहाजा 12 से 15 फीसदी रिटर्न मिल जाता है। ELSS में निवेश की गई रकम का 65 फीसदी फंड शेयर बाजार में जाता है।


पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)


80C के तहत PPF एकाउंट में पैसा जमा करवाने पर भी आपको टैक्स छूट का फायदा मिलेगा। आयकर की धारा 80C के तहत एक फाइनेंशियल ईयर में अधिकतम निवेश की सीमा 1.5 लाख रुपए है, लिहाजा PPF एकाउंट में भी अधिकतम निवेश की सीमा यही है। PPF में एक तय रिटर्न मिलता है। PPF अकाउंट में जमा रकम पर आपको कितना ब्याज मिलेगा, यह हर साल फाइनेंस मिनिस्ट्री तय करती है।


PPF में निवेश का लॉक इन 15 साल के लिए है। यानी 15 साल से पहले आप यह पैसा नहीं निकाल सकते हैं, लेकिन पैसों की जरूरत होने पर PPF एकाउंट पर लोन जरूर ले सकते हैं। 15 साल के बाद PPF से निकाली गई रकम टैक्स फ्री होगी।


एंप्लॉयी प्रोविडेंट फंड (EPF)


EPF में जमा की गई रकम पर भी 80C के तहत कर छूट मिलती है। इसमें भी अधिकतम 1.5 लाख रुपए ही जमा कर सकते हैं। आपकी बेसिक सैलरी का 12 फीसदी PF में जाता है।


टैक्स सेविंग FD


ये सामान्य FD जैसे ही होते हैं। बस टैक्स सेविंग एफडी में 5 साल का लॉकइन होता है। 80C के तहत इसमें भी अधिकतम 1।5 लाख रुपए का ही निवेश किया जा सकता है। अलग-अलग बैंक FD पर अलग-अलग ब्याज देते हैं, जो 7 से 9 फीसदी के बीच होता है। इसमें रिटर्न पहले से तय होती है। इसमें एक दिक्कत यह है कि 5 साल के बाद ब्याज सहित पूरी रकम आपके हाथ में आती है तो ब्याज को टैक्सेबल इनकम माना जाएगा। यानी ब्याज पर आपको टैक्स चुकाना होगा।


नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)


यह एक पेंशन स्कीम है, जो भारत सरकार ने शुरू की थी। असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की रिटायरमेंट सुरक्षित करने के लिए इसे शुरू किया गया था। 80C के तहत 1.5 लाख रुपए तक के निवेश पर आप कर छूट ले सकते हैं। इसके अलावा आयकर की धारा 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपए टैक्स छूट का फायदा ले सकते हैं।


NPS अपना फंड शेयर बाजार में भी निवेश करता है। आप अपनी जोखिम सहने की क्षमता के अधार पर यह तय कर सकते हैं कि आप जो पैसा NPS में लगा रहे हैं उसका कितना हिस्सा शेयरों में निवेश होगा। ज्यादा से ज्यादा आपके निवेश का 50 फीसदी रकम शेयर बाजार में लग सकता है। NPS में निवेश का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि मैच्योरिटी के बाद आपकी जेब में जो पैसा आएगा उस पूरी रकम पर आपको टैक्स चुकाना होगा। साथ ही इसमें रिटर्न कितना मिलेगा यह भी तय नहीं होता।


नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट्स (NSC)


जिस साल आप NSC खरीदते हैं उस फाइनेंशियल ईयर में आप टैक्स क्लेम कर सकते हैं। 80C के तहत इसमें भी अधिकतम 1.5 लाख रुपए का निवेश कर सकते हैं। पोस्टऑफिस से आप NSC खरीद सकते हैं। इसमें 5 साल का लॉकइन होता है। इस पर चक्रवृद्धि ब्याज मिलता है लेकिन यह टैक्सेबल होता है।


यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (Ulip)


यूलिप इनवेस्टमेंट और इंश्योरेंस का मिक्स है। लेकिन यह अपना काम ठीक से नहीं कर पाया। लिहाजा अब निवेशकों ने इससे दूरी बनाना शुरू कर दिया है। यूलिप का एक हिस्सा आपके इंश्योरेंस के प्रीमियम के तौर पर होता है और बाकी रकम शेयर बाजार में निवेश किया जाता है। इसमें रिटर्न कितना मिलेगा यह तय नहीं होता। साथ ही इसमें यह भी पता नहीं चलता कि आपका पैसा शेयर बाजार के किस सेक्टर में लगाया जा रहा है। आपके निवेश का कितना पैसा कमीशन और दूसरे खर्चों पर जा रहा है, यह भी पता नहीं चलता।


सुकन्या समृद्धि योजना


निवेश की यह सुविधा सिर्फ उन लोगों को ही है, जिनकी बेटियां हैं। अधिकतम निवेश की सीमा 1.5 लाख रुपए ही है। इसमें सालाना चक्रवृद्धि ब्याज जोड़ा जाता है। इसकी अच्छी बात यह है कि निवेश और रिटर्न पूरी तरह टैक्स फ्री है। सुकन्या समृद्धि योजना का खाता 21 साल में मेच्योर होता है। बेटी के 18 साल के होने पर तब तक की जमा रकम का 50 फीसदी रकम जरूरत पड़ने पर मेच्योरिटी से पहले निकाली जा सकती है।


सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम (SCSS)


यह स्कीम 60 साल से ज्यादा उम्र वाले बुजुर्गों के लिए है। 55 साल से उम्रदराज किसी बुजुर्ग ने अगर रिटायरमेंट ले ली हो तो वह भी इसमें निवेश कर सकता है। इसमें 5 साल का लॉकइन पीरियड होता है। इसमें सालाना रिटर्न 8.5 फीसदी है। 80C के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक इसमें निवेश कर सकते हैं।


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