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ब्याज दरों पर RBI का नया नियम, जानें किनको मिलेगा कितना फायदा

रेपो रेट में कटौती का फायदा सीधा ग्राहकों को पहुंचाने के लिए रिजर्व बैंक ने बड़ा कदम उठाया है।
अपडेटेड Sep 11, 2019 पर 08:56  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रेपो रेट में कटौती का फायदा सीधा ग्राहकों को पहुंचाने के लिए रिजर्व बैंक ने बड़ा कदम उठाया है। रिजर्व बैंक ने सभी फ्लोटिंग रेट वाले लोन को एक्सटर्नल बेंचमार्क से लिंक करना अनिवार्य कर दिया है। यानी होम, पर्सनल या MSME के लिए लोन पर लगने वाला ब्याज इस एक्सटर्नल बेंचमार्क से तय होगा।


ये एक्सटर्नल बेंचमार्क रेपो, सरकारी ट्रेजरी बिल यील्ड जैसे हो सकते हैं। दरअसल RBI मौजूदा MCLR पर आधारित लोन दरों से खुश नहीं थी क्योंकि ग्राहकों को रेपो रेट में कटौती का उतना फायदा नहीं मिल पा रहा था जितना मिलना चाहिए था। ये लिंक 1 अक्टूबर से लागू होगा।


RBI ने लोन दर लिंक करना अनिवार्य कर दिया है।  RBI रेपो रेट एक तरह का एक्स्टर्नल बेंचमार्क तय कर सकती है जिसके तहत फ्लोटिंग रेट वाले सभी लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क से लिंक होंगे। अब FBIL यानी (Financial Benchmarks India Pvt. Ltd) के 3 और 6 महीने के सरकारी ट्रेजरी बिल यील्ड भी बेंचमार्क में शामिल हो सकते हैं। FBIL से पब्लिश बेंचमार्क मार्केट इंटरेस्ट रेट से लिंक होंगे। फिलहाल बैंक MCLR पर ब्याज दर तय करते हैं। इसमें मौजूदा निवेशकों को स्विच करने का विकल्प भी मिलेगा।


MCLR से जुड़े लोन बैंक के कॉस्ट पर आधारित होंगे। रीपेमेंट या रीन्यूअल तक मौजूदा होम और ऑटो लोन MCLR पर आधारित होंगे। सिर्फ फ्लोटिंग रेट पर लिए लोन पर नई नियम का फायदा मिलेगा। जिन लोन पर प्री-पेमेंट चार्ज नहीं उन्हें भी इसका फायदा मिलेगा। फ्लोटिंग रेट वाले लोन एक्स्टर्नल बेंचमार्क से बिना चार्ज स्विच कर सकेंगे।


बता दें कि स्विच करने वालों पर नए लोन ग्राहकों जैसी ही ब्याज दरें लागू होगी। किसी एक कैटेगरी के लोन पर बैंक एक एक्स्टर्नल बेंचमार्क चुन सकते हैं। हालांकि एक्स्टर्नल बेंचमार्क से लिंक के बावजूद बैंक के कुछ चार्ज होंगे। बैंक क्रेडिट रिस्क प्रीमियम खुद तय कर सकेंगे। अंतिम ब्याज दर ग्राहक के क्रेडिट प्रोफाइल के मुताबिक तय किया जायेगा लेकिन एक्स्टर्नल बेंचमार्क में बदलाव के मुताबिक हर 3 महीने में होम और ऑटो लोन दर रीसेट करनी होगी। नए नियम के तहत बैंक 3 साल में एक बार दरों में बदलाव कर सकेंगे।


इस नए नियम के तहत मौजूदा निवेशकों को फायदा मिलेगा। ब्याज दरें पहले से कम हो जाएंगी और मासिक EMIs भी सस्ती हो जाएंगी। लोन खरीदने वालों की संख्या बढ़ेगी। जानकारों की मानें तो RBI के एलान से लोन की मांग बढ़ेगी।


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