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बाजार में जोरदार उतार-चढ़ाव, कैसे मैनेज करें अपने लंबी अवधि के निवेश

सामान्य तौर पर निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की साल में कम से एक बार रीबैलेंसिंग जरूर करनी चाहिए।
अपडेटेड Mar 24, 2021 पर 09:14  |  स्रोत : Moneycontrol.com

सेंसेक्स कुछ समय से 50,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से आंखमिचौली करता नजर आ रहा है और इस स्तर के आसपास इसमें भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हालांकि 50,00 सिर्फ एक आंकड़ा है। वास्तविकता यह है कि मार्च 2020 के लो के बाद से बाजार में करीब 100 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसकी वजह कोरोना के कारण लागू लॉकडाउन के उठने के बाद इकोनॉमी में आई जोरदार रिकवरी है। ऐसे में निवेशकों को अब क्या करना चाहिए। क्योंकि बाजार अपने नए-नए ऑल टाइम हाई बनाता नजर आ रहा है और  उतार-चढ़ाव के बीच यह एक महीने में करीब दोगुना हो चुका है। ऐसे में निवेशकों को क्या बिकवाली करनी चाहिए या फिर उनको होल्ड करना या नया निवेश करना चाहिए। यहां हम इसी मुद्दे पर बात कर रहे हैं।
 
साफ-साफ कहें तो कोई व्यक्ति ऐसा नहीं होगा जो मस्ती भरी पार्टी को बीच में छोड़कर जाना चाहे। बाजार में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। इन दिनों शेयर मार्केट में कमाई करना काफी आसान नजर आ रहा है। ऐसे में कोई क्यों बाजार से दूर नजर रहना चाहेगा। लेकिन वास्तविक सवाल ये है कि इस स्थिति में एक समझदार और लंबे अवधि के निवेशक को क्या करना चाहिए। कदम को रोककर क्या हो रहा है इसकी समीक्षा करना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन किसी निवेशक के लिए यही सही रणनीति है। एक स्मार्ट निवेशक बाजार के इस दौर में मिल रहे रिटर्न में अपना विवेक नहीं खोएगा और अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा और रि-बैलेंसिंग जरूर करेगा।


क्या हो आगे की रणनीति


इसको समझने के लिए हमें एक उदाहरण का सहारा लेना पड़ेगा। मान लीजिए मार्च के निचले स्तर के आसपास आपके पोर्टफोलिया में 60 फीसदी इक्विटी और 40 फीसदी डेट का हिस्सा था। अब मार्च के निचले स्तर से इक्विटी बाजार करीब 100 फीसदी भाग चुका है। अब हम मान लेते हैं कि डेट इंस्टूमेंट से इस अवधि में 6 फीसदी का एनुअल रिटर्न मिला है। इस स्थिति में वर्तमान में हमारा करेंट एलोकेशन 74 फीसदी इक्विटी में और 26 फीसदी डेट में हो जाएगा। ये पोर्टफोलियो के हमारे मूल ढांचे से काफी अलग हो गया। इसका मतलब ये है कि 60:40 के एलोकेशन से शुरू हुए पोर्टफोलिया एलोकेशन में भारी बदलाव आ गया है। इस स्थिति में हमें पोर्टपोलियो रीबैलेंसिंग का सहारा लेने होगा। जिससे हम एक बार फिर अपने मूल एसेट लोकेशन यानी 60:40 को बनाए रखें। इससे हमें अपने जोखिम को कम करने में सहायता मिलेगी। और शॉर्ट टर्म में होने वाली किसी गिरावट से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।


पोर्टफोलियो की रीबैलेंसिंग


सामान्य तौर पर निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की साल में कम से एक बार रीबैलेंसिंग जरूर करनी चाहिए। किंतु बाजार ने अभी तक जोरदार रिटर्न दिया है। इस समय अपने पोर्टफोलियो पर एक बार फिर से नजर डालना और उसकी रीबैलेंसिंग करना एकदम सही रणनीति होगी। पोर्टफोलियो की रीबैलेसिंग से हम अपने जोखिम को कम करके लॉन्ग टर्म रिटर्न को ज्यादा से ज्यादा रख सकते हैं। किसी भी निवेशक को अपने पोर्टफोलियो का एलोकेशन अपने लक्ष्य के हिसाब से करना चाहिए। निवेश गोल आधारित होना चाहिए और उसी आधार पर एसेट एलोकेशन भी होना चाहिए। सभी गोल एक तरह के नहीं होते। इसलिए आप सभी गोल के लिए एक ही तरह से निवेश भी नहीं कर सकते हैं।


अगर आपका गोल या लक्ष्य शॉर्ट टर्म का है और इसके लिए इक्विटी में कम निवेश कर रखा है तो बाजार में आई हालिया तेजी आपको मुनाफा वसूली का अच्छा मौका दे रही है। और इसके साथ ही आप अपने पोर्टफोलियो में शॉर्ट टर्म के लिए इक्विटी का हिस्सा चाहे तो घटा भी सकते हैं। दूसरी तरफ अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि का है तो आपके पोर्टफोलियों में इक्विटी का हिस्सा निश्चित तौर पर बढ़ गया होगा और यह असंतुलित हो गया होगा। ऐसी स्थिति में आपका जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसे हालात मे अपने पोर्टफोलियो को फिर से संतुलन में लाने के लिए रीबैलेसिंग की रणनीति अपनानी होगी।


पोर्टफोलियो की रीबैलेंसिंग करते हुए आपको अपने पोर्टफोलियो से नॉन-परफारमर्स को छांट कर निकाल देना चाहिए।  हाल की रैली आपको पिछल्ले स्टॉकों को निकालने और अच्छे भाव पर अच्छे शेयरों को शामिल करने का बढ़िया मौका दे रहा है।


अगर आपके पास नया निवेश के लिए पैसा है लेकिन आपकी निवेश अवधि छोटी (3 साल से कम) है तो इस स्थिति में बेहतर यही होगा कि आप इक्विटी में निवेश करने से बचें और अपने पोर्टफोलियो में काफी कम भाग में इक्विटी रखें। जब सब कुछ अच्छा चलता रहता है तो तमाम निवेशक भावनाओं के चलते बाजार में अपने मुनाफे को ज्यादा से ज्यादा करने के चक्कर में कुछ ज्यादा ही रुक जाते हैं। लेकिन यह तरीका एकाएक स्थितियां खराब होने पर काम नहीं करता है। इसका असर आप पर उल्टा हो सकता है। अगर आपको अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने और इसे रीबैलेंस करने में मुश्किल हो रही है तो किसी सार्टिफाइड निवेश सलाहकार की सलाह लें।


यह याद रखें कि सेंसेक्स का 50 हजार का पार करना सिर्फ एक आंकड़ा हो सकता है लेकिन इसने आपके पोर्टफोलिया एलोकेशन का मूल ढांचा काफी बदल दिया है। आप बाजार की इस पार्टी में पार्टी छोड़ने वाले आखिरी व्यक्ति न बनें और अपने पोर्टफोलियो को जितना जल्दी हो सके उसे रीबैलेंसे करें।




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